24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सोनम वांगचुक अन्ना हजारे जैसे मोहरे न बनें: कांग्रेस नेता हुसैन दलवई की चेतावनी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सोनम वांगचुक अन्ना हजारे जैसे मोहरे न बनें: कांग्रेस नेता हुसैन दलवई की चेतावनी

सारांश

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बाद चेतावनी दी कि वे अन्ना हजारे की तरह किसी पार्टी के राजनीतिक हथियार न बन जाएं। नीट विवाद पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बातचीत की पूर्व शर्त बताया।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 24 जुलाई को मुंबई में सोनम वांगचुक को राजनीतिक मोहरा बनने से बचने की चेतावनी दी।
दलवई ने कहा कि नीट विवाद पर बातचीत से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अनिवार्य है।
2011 के अन्ना हजारे आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि उस आंदोलन को कथित तौर पर भाजपा ने भुनाया था।
आरोप लगाया कि देशभर में नीट-विरोधी आंदोलन को दबाने की कोशिशें हो रही हैं; मुंबई में छात्रों पर हमले का उल्लेख किया।
सोनिया गांधी के 'एजुकेशन सिस्टम के पतन' पर लिखे लेख से सहमति जताई; सरकार को शिक्षा व्यवस्था में पूर्णतः विफल बताया।
दिल्ली पुलिस द्वारा 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक किए जाने पर कहा — यह सरकार का विषय है।

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 24 जुलाई को मुंबई में कहा कि नीट पेपर लीक विवाद पर अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे किसी पार्टी के राजनीतिक हथियार न बन जाएं। उन्होंने आगाह किया कि जिस तरह अन्ना हजारे के आंदोलन को कथित तौर पर भाजपा ने अपने पक्ष में भुनाया, वैसी ही स्थिति वांगचुक के साथ न हो।

मुख्य मांग: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

दलवई ने स्पष्ट किया कि नीट विवाद पर किसी भी बातचीत से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा, 'मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर है। उसके बाद ही कोई बातचीत हो सकती है। उस मांग को पूरा किए बिना मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करना सही तरीका नहीं है।'

आंदोलन दबाने के आरोप

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि देशभर में चल रहे नीट-विरोधी आंदोलन को कुचलने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने कहा, 'लोगों पर हमले, छात्रों और लड़कियों की पिटाई जैसे गंभीर मुद्दे हैं। मुंबई में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। जहाँ भी ऐसे विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, सरकार को सबसे पहले उनसे बातचीत करनी चाहिए।'

उन्होंने सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) को भी सतर्क रहने की सलाह दी और कहा कि इस आंदोलन की राजनीतिक शुचिता बनाए रखना ज़रूरी है।

अन्ना हजारे से तुलना

दलवई ने 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन का संदर्भ देते हुए कहा कि उस समय कई मंत्री अन्ना से मिलने गए और अंततः वह आंदोलन कथित तौर पर भाजपा के राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल हुआ। उनके अनुसार, वांगचुक को इस ऐतिहासिक उदाहरण से सबक लेना चाहिए।

सोनिया गांधी के लेख पर प्रतिक्रिया

कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के लेख 'एजुकेशन सिस्टम का पतन: भारत के युवाओं में फैला आक्रोश' पर दलवई ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि छात्र सरकार की परीक्षा प्रणाली को लेकर गहरी चिंता में हैं और यह व्यापक शासन विफलता का संकेत है।

पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक करने पर रुख

दिल्ली पुलिस द्वारा 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक किए जाने के सवाल पर दलवई ने कहा कि यह सरकार का विषय है और वही तय करेगी कि स्थिति को कैसे संभाला जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक विरोधाभास भी है — कांग्रेस खुद नीट आंदोलन को अपने विपक्षी एजेंडे में शामिल कर चुकी है। जब एक दल किसी सामाजिक आंदोलन को 'राजनीतिक मोहरा' बनने से बचाने की नसीहत दे, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह वास्तव में आंदोलन की स्वायत्तता की चिंता है या प्रतिद्वंद्वी दलों को उससे दूर रखने की रणनीति। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को 'पूर्व शर्त' बनाना बातचीत को व्यावहारिक रूप से असंभव बना देता है — जो विपक्षी राजनीति में एक जानी-पहचानी चाल है। वांगचुक की विश्वसनीयता इसी में है कि वे किसी एक दल की भाषा न बोलें।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुसैन दलवई ने सोनम वांगचुक को क्या चेतावनी दी?
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि सोनम वांगचुक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे किसी पार्टी के राजनीतिक मोहरे न बनें। उन्होंने 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन का उदाहरण दिया, जो कथित तौर पर बाद में भाजपा के हित में इस्तेमाल हुआ।
नीट विवाद पर कांग्रेस की मुख्य माँग क्या है?
कांग्रेस की मुख्य माँग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। दलवई के अनुसार, इस माँग के पूरा हुए बिना किसी भी बातचीत का कोई अर्थ नहीं है।
सोनम वांगचुक का नीट मुद्दे से क्या संबंध है?
सोनम वांगचुक ने नीट पेपर लीक विवाद के विरोध में अनशन किया था, जो हाल ही में समाप्त हुआ। उनके अनशन ने राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को नई चर्चा दी और विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं।
दलवई ने आंदोलन दबाने के क्या आरोप लगाए?
दलवई ने कहा कि देशभर में नीट-विरोधी आंदोलन को कुचलने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने मुंबई समेत कई जगहों पर छात्रों और लड़कियों पर हमलों का उल्लेख किया और सरकार से पहले बातचीत करने की माँग की।
सोनिया गांधी के शिक्षा पर लिखे लेख पर दलवई की क्या राय है?
दलवई ने सोनिया गांधी के लेख 'एजुकेशन सिस्टम का पतन: भारत के युवाओं में फैला आक्रोश' से पूरी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि छात्र परीक्षा प्रणाली की विफलता को लेकर गहरी चिंता में हैं और सरकार इस मोर्चे पर पूरी तरह नाकाम रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 2 दिन पहले
  4. 5 दिन पहले
  5. 6 दिन पहले
  6. 6 दिन पहले
  7. 6 दिन पहले
  8. 1 सप्ताह पहले