सोनम वांगचुक अन्ना हजारे जैसे मोहरे न बनें: कांग्रेस नेता हुसैन दलवई की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 24 जुलाई को मुंबई में कहा कि नीट पेपर लीक विवाद पर अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे किसी पार्टी के राजनीतिक हथियार न बन जाएं। उन्होंने आगाह किया कि जिस तरह अन्ना हजारे के आंदोलन को कथित तौर पर भाजपा ने अपने पक्ष में भुनाया, वैसी ही स्थिति वांगचुक के साथ न हो।
मुख्य मांग: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
दलवई ने स्पष्ट किया कि नीट विवाद पर किसी भी बातचीत से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा, 'मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर है। उसके बाद ही कोई बातचीत हो सकती है। उस मांग को पूरा किए बिना मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करना सही तरीका नहीं है।'
आंदोलन दबाने के आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि देशभर में चल रहे नीट-विरोधी आंदोलन को कुचलने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने कहा, 'लोगों पर हमले, छात्रों और लड़कियों की पिटाई जैसे गंभीर मुद्दे हैं। मुंबई में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। जहाँ भी ऐसे विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, सरकार को सबसे पहले उनसे बातचीत करनी चाहिए।'
उन्होंने सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) को भी सतर्क रहने की सलाह दी और कहा कि इस आंदोलन की राजनीतिक शुचिता बनाए रखना ज़रूरी है।
अन्ना हजारे से तुलना
दलवई ने 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन का संदर्भ देते हुए कहा कि उस समय कई मंत्री अन्ना से मिलने गए और अंततः वह आंदोलन कथित तौर पर भाजपा के राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल हुआ। उनके अनुसार, वांगचुक को इस ऐतिहासिक उदाहरण से सबक लेना चाहिए।
सोनिया गांधी के लेख पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के लेख 'एजुकेशन सिस्टम का पतन: भारत के युवाओं में फैला आक्रोश' पर दलवई ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि छात्र सरकार की परीक्षा प्रणाली को लेकर गहरी चिंता में हैं और यह व्यापक शासन विफलता का संकेत है।
पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक करने पर रुख
दिल्ली पुलिस द्वारा 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक किए जाने के सवाल पर दलवई ने कहा कि यह सरकार का विषय है और वही तय करेगी कि स्थिति को कैसे संभाला जाए।