धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मिले बिना जंतर मंतर आंदोलन नहीं होगा वापस: हुसैन दलवई
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने 25 जुलाई को स्पष्ट किया कि जंतर मंतर पर जारी छात्र आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते। दलवई ने प्रदर्शनकारियों की मांगों को पूरी तरह उचित बताते हुए कहा कि वापस लौटने का सवाल ही नहीं उठता।
आंदोलन की मांगें और कांग्रेस का रुख
हुसैन दलवई ने कहा कि प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए तीनों प्रमुख मुद्दे न्यायसंगत हैं और केंद्र सरकार को उन्हें स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री को किसी अन्य जिम्मेदारी में भेजा जा सकता है, किंतु मौजूदा परिस्थितियों में उनका इस्तीफा अनिवार्य है।
यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और राजनीतिक दलों की जवाबदेही की माँग तेज हो गई है।
पेपर लीक कानून पर सवाल
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित सख्त कानून — जिसमें दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की जेल और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है — पर प्रतिक्रिया देते हुए दलवई ने सवाल उठाया कि सरकार ने अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की। उनका कहना था कि यदि समय रहते ठोस कदम उठाए गए होते, तो यह संकट पैदा ही नहीं होता।
सोनम वांगचुक के अनशन पर टिप्पणी
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिनों का अनशन समाप्त करने के मुद्दे पर दलवई ने कहा कि उनके अनशन की पवित्रता पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने वांगचुक के जनहित संघर्ष की सराहना की, लेकिन यह भी कहा कि अस्पताल में दो केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में अनशन समाप्त करने से गलत संदेश गया और इससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचा।
हालांकि, दलवई ने किसी भी तरह की 'डील' होने की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे वांगचुक के चरित्र पर किसी प्रकार का संदेह नहीं करते।
युवाओं की भागीदारी और विश्वविद्यालयों की भूमिका
दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंद किए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में युवाओं की आंदोलन में उपस्थिति को दलवई ने लोकतांत्रिक जागरूकता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने इतने बड़े पैमाने पर युवाओं की भागीदारी पहले कभी नहीं देखी।
दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू द्वारा छात्रों को जंतर मंतर प्रदर्शन में जाने से रोकने के निर्देशों की उन्होंने आलोचना की। दलवई का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों के निजी लोकतांत्रिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
अन्य मुद्दों पर प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने बच्चों से संवाद बढ़ाने की बात कही थी — दलवई ने कहा कि यह सकारात्मक विचार है, लेकिन सरकार उस दिशा में काम करती दिखाई नहीं देती। उन्होंने माँग की कि विभिन्न आंदोलनों में प्रदर्शनकारियों के साथ हुई हिंसा की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के कथित एआई-संपादित वीडियो पर दलवई ने कहा कि यदि किसी का बयान गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है तो उसका समर्थन नहीं किया जा सकता, और संबंधित व्यक्ति को स्वयं स्पष्ट रूप से अपनी बात सामने रखनी चाहिए।
आंदोलन की आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्र सरकार छात्रों की माँगों पर किस हद तक ठोस कदम उठाती है।