धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस का हमला: हरिप्रसाद बोले- यह छात्र आंदोलन की जीत, पेपर लीक पर 152 बार हुई चूक
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष और एमएलसी बीके हरिप्रसाद ने 25 जुलाई को बेंगलुरु में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि यह इस्तीफा परीक्षा प्रणाली में व्यापक अनियमितताओं के खिलाफ देशभर में उठे छात्र आंदोलन की नैतिक जीत है, न कि किसी राजनीतिक दल की उपलब्धि।
मुख्य घटनाक्रम
इंदिरा गांधी भवन, बेंगलुरु स्थित केपीसीसी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरिप्रसाद ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा-पत्र स्वयं एक विडंबना बन गया, क्योंकि उसमें उन्होंने अपनी कथित उपलब्धियों का बखान किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 152 बार परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और इसके बावजूद सरकार ने जवाबदेही से मुँह मोड़ा।
हरिप्रसाद के अनुसार, जब छात्रों ने इन अनियमितताओं के विरुद्ध सड़कों पर उतरकर आवाज़ उठाई, तो उन्हें लाठीचार्ज और आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, 'छात्रों ने सामूहिक कार्रवाई की ताकत दिखाई है। यह छात्र आंदोलन की जीत है, किसी राजनीतिक दल की नहीं।'
पूर्व शिक्षा मंत्रियों से तुलना
हरिप्रसाद ने भारत की शैक्षणिक विरासत का हवाला देते हुए कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद ने नौ वर्षों तक शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया और विश्व-भारती, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाई।
उन्होंने वीकेआरवी राव, एसआर बोम्मई और अर्जुन सिंह जैसे पूर्व शिक्षा मंत्रियों की विद्वता और शिक्षा के प्रति समर्पण को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'IIT, IIM और AIIMS जैसे संस्थानों की स्थापना ने भारत के भविष्य को दिशा दी।' हरिप्रसाद ने यह भी याद दिलाया कि देश की साक्षरता दर आजादी के समय 11 प्रतिशत थी, जो अब 76 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है — और इसका श्रेय उन्होंने पिछली सरकारों की सामूहिक नीतियों को दिया।
सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप
हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बार-बार सुधार के वादे करने के बावजूद शिक्षा को वास्तविक प्राथमिकता देने में विफल रही है। उनका कहना था कि शिक्षा क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप पहले कभी नहीं लगे और मौजूदा दौर में विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा व शैक्षणिक स्तर में गिरावट आई है।
उन्होंने उन आरोपों को भी सिरे से खारिज किया जिनमें कहा गया था कि 400 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग विरोध प्रदर्शनों में घुस आए थे। उनके अनुसार, इस तरह के दावे एक शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश थे।
कांग्रेस की माँगें
हरिप्रसाद ने स्पष्ट किया कि केवल धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने तीन प्रमुख माँगें रखीं: परीक्षा विवाद के दौरान आत्महत्या करने वाले 22 छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए; छात्र प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएँ; और नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत दिल्ली पुलिस को दिए गए अतिरिक्त अधिकार रद्द किए जाएँ।
उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा उठाई गई माँगों को भी पूरा किया जाना चाहिए। कांग्रेस तब तक अपना आंदोलन जारी रखेगी।' यह बयान ऐसे समय आया है जब पेपर लीक और परीक्षा घोटालों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह छात्रों की माँगों को संसद और सड़क — दोनों मोर्चों पर उठाती रहेगी। शिक्षा मंत्रालय में नए नेतृत्व की नियुक्ति और पेपर लीक मामलों की जाँच की दिशा पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।