25 जुलाई 2026
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस का हमला: हरिप्रसाद बोले- यह छात्र आंदोलन की जीत, पेपर लीक पर 152 बार हुई चूक

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस का हमला: हरिप्रसाद बोले- यह छात्र आंदोलन की जीत, पेपर लीक पर 152 बार हुई चूक

सारांश

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को कांग्रेस ने छात्र शक्ति की जीत करार दिया — लेकिन केपीसीसी अध्यक्ष हरिप्रसाद ने साफ कहा कि यह काफी नहीं। 152 पेपर लीक, 22 छात्रों की जान और NSA के दुरुपयोग के आरोपों के बीच कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा।

मुख्य बातें

केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने 25 जुलाई को बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन की जीत बताया।
हरिप्रसाद के अनुसार परीक्षाओं में 152 बार पेपर लीक हुए और विरोध करने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज व आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए।
कांग्रेस ने 22 छात्रों की मौत पर परिवारों को मुआवजा, छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापसी और NSA के तहत दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त अधिकार रद्द करने की माँग की।
हरिप्रसाद ने मौलाना अबुल कलाम आजाद के नौ वर्षों के कार्यकाल और IIT, IIM, AIIMS की स्थापना का हवाला देकर मौजूदा सरकार की शिक्षा नीति की आलोचना की।
देश की साक्षरता दर आजादी के समय 11% से बढ़कर अब 76% से अधिक हो गई है — हरिप्रसाद ने इसका श्रेय पूर्ववर्ती सरकारों को दिया।
कांग्रेस ने कहा — सिर्फ इस्तीफा नहीं, राहुल गांधी और छात्र संगठनों की सभी माँगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष और एमएलसी बीके हरिप्रसाद ने 25 जुलाई को बेंगलुरु में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि यह इस्तीफा परीक्षा प्रणाली में व्यापक अनियमितताओं के खिलाफ देशभर में उठे छात्र आंदोलन की नैतिक जीत है, न कि किसी राजनीतिक दल की उपलब्धि।

मुख्य घटनाक्रम

इंदिरा गांधी भवन, बेंगलुरु स्थित केपीसीसी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरिप्रसाद ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा-पत्र स्वयं एक विडंबना बन गया, क्योंकि उसमें उन्होंने अपनी कथित उपलब्धियों का बखान किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 152 बार परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और इसके बावजूद सरकार ने जवाबदेही से मुँह मोड़ा।

हरिप्रसाद के अनुसार, जब छात्रों ने इन अनियमितताओं के विरुद्ध सड़कों पर उतरकर आवाज़ उठाई, तो उन्हें लाठीचार्ज और आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, 'छात्रों ने सामूहिक कार्रवाई की ताकत दिखाई है। यह छात्र आंदोलन की जीत है, किसी राजनीतिक दल की नहीं।'

पूर्व शिक्षा मंत्रियों से तुलना

हरिप्रसाद ने भारत की शैक्षणिक विरासत का हवाला देते हुए कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद ने नौ वर्षों तक शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया और विश्व-भारती, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाई।

उन्होंने वीकेआरवी राव, एसआर बोम्मई और अर्जुन सिंह जैसे पूर्व शिक्षा मंत्रियों की विद्वता और शिक्षा के प्रति समर्पण को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'IIT, IIM और AIIMS जैसे संस्थानों की स्थापना ने भारत के भविष्य को दिशा दी।' हरिप्रसाद ने यह भी याद दिलाया कि देश की साक्षरता दर आजादी के समय 11 प्रतिशत थी, जो अब 76 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है — और इसका श्रेय उन्होंने पिछली सरकारों की सामूहिक नीतियों को दिया।

सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप

हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बार-बार सुधार के वादे करने के बावजूद शिक्षा को वास्तविक प्राथमिकता देने में विफल रही है। उनका कहना था कि शिक्षा क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप पहले कभी नहीं लगे और मौजूदा दौर में विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा व शैक्षणिक स्तर में गिरावट आई है।

उन्होंने उन आरोपों को भी सिरे से खारिज किया जिनमें कहा गया था कि 400 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग विरोध प्रदर्शनों में घुस आए थे। उनके अनुसार, इस तरह के दावे एक शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश थे।

कांग्रेस की माँगें

हरिप्रसाद ने स्पष्ट किया कि केवल धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने तीन प्रमुख माँगें रखीं: परीक्षा विवाद के दौरान आत्महत्या करने वाले 22 छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए; छात्र प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएँ; और नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत दिल्ली पुलिस को दिए गए अतिरिक्त अधिकार रद्द किए जाएँ।

उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा उठाई गई माँगों को भी पूरा किया जाना चाहिए। कांग्रेस तब तक अपना आंदोलन जारी रखेगी।' यह बयान ऐसे समय आया है जब पेपर लीक और परीक्षा घोटालों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह छात्रों की माँगों को संसद और सड़क — दोनों मोर्चों पर उठाती रहेगी। शिक्षा मंत्रालय में नए नेतृत्व की नियुक्ति और पेपर लीक मामलों की जाँच की दिशा पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि परीक्षा तंत्र की प्रणालीगत खामी को उजागर करता है। मुख्यधारा की कवरेज इस्तीफे के नाटक पर केंद्रित है, जबकि असली मुद्दा — पेपर लीक रोकने का तंत्र, जाँच एजेंसियों की स्वायत्तता और NSA के इस्तेमाल की सीमाएँ — हाशिये पर है। कांग्रेस की माँगें राजनीतिक रूप से सही हैं, पर उनकी विश्वसनीयता तब बनेगी जब वे राज्यों में अपनी सरकारों की शिक्षा व्यवस्था पर भी उतनी ही सख्ती से जवाबदेही तय करें।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा परीक्षाओं में व्यापक पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ देशभर में उठे छात्र आंदोलन के बीच आया। कांग्रेस के अनुसार कथित तौर पर 152 बार पेपर लीक की घटनाएँ हुईं, जिससे राजनीतिक दबाव चरम पर पहुँच गया था।
बीके हरिप्रसाद ने इस इस्तीफे पर क्या कहा?
केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने 25 जुलाई को बेंगलुरु में कहा कि यह इस्तीफा छात्र आंदोलन की जीत है, किसी राजनीतिक दल की नहीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं — छात्रों की सभी माँगें पूरी होनी चाहिए।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
कांग्रेस ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: आत्महत्या करने वाले 22 छात्रों के परिवारों को मुआवजा, छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापस लेना, और NSA के तहत दिल्ली पुलिस को दिए गए अतिरिक्त अधिकार रद्द करना।
हरिप्रसाद ने पूर्व शिक्षा मंत्रियों का जिक्र क्यों किया?
हरिप्रसाद ने मौलाना अबुल कलाम आजाद के नौ वर्षीय कार्यकाल और IIT, IIM, AIIMS जैसे संस्थानों की स्थापना का उल्लेख कर मौजूदा सरकार की शिक्षा नीति से तुलना की। उनका उद्देश्य यह दर्शाना था कि पहले के मंत्री विद्वता और समर्पण के लिए जाने जाते थे।
पेपर लीक आंदोलन में छात्रों के साथ क्या हुआ?
हरिप्रसाद के अनुसार, पेपर लीक के खिलाफ विरोध करने वाले छात्रों को लाठीचार्ज और आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, आंदोलन के दौरान कथित तौर पर 22 छात्रों ने आत्महत्या की, जिनके परिजनों के लिए मुआवजे की माँग कांग्रेस ने उठाई है।
राष्ट्र प्रेस
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