जेपीएससी परीक्षा घोटाले में ईडी की एंट्री: ₹40 करोड़ के मनी ट्रेल की जांच, 19 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए रांची जोनल कार्यालय से एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज कर ली है। राज्य पुलिस और सीआईडी की प्राथमिकियों को आधार बनाते हुए ईडी ने कथित तौर पर ₹40 करोड़ के वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल शुरू की है, जिसमें परीक्षा पास कराने और ओएमआर शीट में हेरफेर के आरोपों की जांच शामिल है।
मनी ट्रेल पर ईडी का फोकस
ईडी की जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि अभ्यर्थियों से कथित तौर पर वसूली गई रकम किन लोगों तक पहुँची और उसका किस तरह इस्तेमाल हुआ। जांच एजेंसी बिचौलियों की भूमिका और पूरे वित्तीय नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है। सूत्रों के मुताबिक, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की 2024 की सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर ईडी अलग से भी ईसीआईआर दर्ज कर सकती है।
टीडीपीएल की संदिग्ध भूमिका
जांच के केंद्र में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) है, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार और जेएसएससी द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद जेपीएससी परीक्षा का ठेका दिया गया — यह तथ्य जांचकर्ताओं के लिए सबसे गंभीर सवाल बन गया है। गौरतलब है कि इस प्रकरण की जांच सीआईडी पिछले 20 दिनों से कर रही है।
इस्तीफे और गिरफ्तारियाँ
विवाद के केंद्र में रहे जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के जाने के बाद आयोग के तीन सदस्यों — अजीता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और जमाल अहमद — ने भी इस्तीफा दे दिया है। सीआईडी पूर्व अध्यक्ष खियांग्ते से चार दौर की पूछताछ कर चुकी है, जबकि सोमवार को सदस्य अजीता भट्टाचार्य को भी तलब किया गया। इस मामले में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें कथित तौर पर अनुचित तरीके से सफल होने वाले अभ्यर्थी और कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल हैं।
छापेमारी में क्या मिला
सीआईडी ने रांची, हजारीबाग, पलामू और धनबाद समेत 18 ठिकानों पर छापेमारी में दस्तावेज और डिजिटल सामग्री बरामद की है। इनमें ब्लैंक चेक, अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र, ओएमआर शीट की कार्बन प्रतियाँ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। सीआईडी ने अभय कुमार तिवारी को भी गिरफ्तार किया है, जो राज्य सरकार के एक कार्यालय में कार्यरत था और टीडीपीएल से भी जुड़ा बताया जा रहा है — उसे कथित सिंडिकेट की अहम कड़ी बताया जा रहा है।
आगे क्या होगा
ईडी की ईसीआईआर दर्ज होने के बाद अब जांच का दायरा केवल परीक्षा अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहेगा — धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत संपत्तियों की कुर्की और बैंक खातों की जांच भी संभव है। यह मामला झारखंड में भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर एक बड़े सवालिया निशान के रूप में सामने आया है।