जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती घोटाला: ओएमआर हेरफेर से इंटरव्यू तक करोड़ों की उगाही, 25 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षा घोटाले की जांच में सीआईडी और विशेष जांच दल (एसआईटी) को एक संगठित सिंडिकेट के चौंकाने वाले तौर-तरीके मिले हैं, जिसमें परीक्षा के विज्ञापन से लेकर अंतिम चयन तक हर स्तर पर 'सेटिंग' की एक समानांतर व्यवस्था सक्रिय थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में इस सिंडिकेट ने करोड़ों रुपये की उगाही की, जिसकी समानांतर जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी शुरू कर दी है।
मुख्य आरोपी और जांच की स्थिति
जांच एजेंसियों का मानना है कि परीक्षा आयोजन करने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) का पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी इस मेरिट स्कैम का सबसे अहम किरदार है। सीआईडी ने 23 अगस्त को अभय तिवारी को तीसरी बार तीन दिनों के लिए रिमांड पर लिया है। उनकी पत्नी सुषमा तिवारी और भाई अक्षय तिवारी को भी आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जा रही है।
भर्ती के हर चरण के लिए तय थीं दरें
आरोपियों के बयानों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के लिए बाकायदा दरें निर्धारित थीं। 11वीं से 14वीं जेपीएससी परीक्षाओं में अंतिम चयन और इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के नाम पर करोड़ों रुपये की उगाही हुई। 14वीं जेपीएससी में सामान्य और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए करीब ₹1 करोड़, जबकि अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए लगभग ₹80 लाख तक का रेट तय किया गया था। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में चुनिंदा अभ्यर्थियों से ₹12-12 लाख वसूल कर उन्हें परीक्षा से पहले एक सुरक्षित स्थान पर एकत्र किया गया और लगभग 65 प्रश्नों के उत्तर रटवाए गए।
ओएमआर शीट में तकनीकी हेरफेर का खुलासा
घोटाले का सबसे गंभीर और तकनीकी पहलू ओएमआर शीट में की गई छेड़छाड़ से जुड़ा है। डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े तकनीकी प्रोग्रामर मोहम्मद एबाद के बयानों के अनुसार, पूर्व-चिन्हित अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में उत्तर वाले गोलों को जानबूझकर खाली छोड़ दिया जाता था। परीक्षा संपन्न होने के बाद जब आधिकारिक आंसर की उपलब्ध हो जाती थी, तब स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन के दौरान उन खाली खानों में सही उत्तर भर दिए जाते थे। इसके लिए पूर्व-निर्धारित अभ्यर्थियों के रोल नंबर सीधे तकनीकी टीम तक पहुंचाए जाते थे। सीआईडी अब मूल ओएमआर शीट, उसकी कार्बन कॉपी और डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक मिलान कर इस हेरफेर के साक्ष्य जुटा रही है।
ऊपरी दबाव और पूर्व अध्यक्ष की भूमिका
जेपीएससी की पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से हुई पूछताछ ने इस मामले में 'ऊपरी दबाव' की परतें उजागर की हैं। उनके बयानों के अनुसार, 11वीं, 13वीं और 14वीं जेपीएससी के विवादित परिणाम तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के सीधे निर्देश और दबाव में जारी किए गए थे। हालांकि, श्वेता गुप्ता ने खुद को किसी भी तकनीकी हेरफेर से अलग बताते हुए वरिष्ठों के आदेशों का पालन करने की बात कही है। यह ऐसे समय में आया है जब सीआईडी पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते सहित 25 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
प्रशासनिक कार्रवाई और आगे की राह
इस वृहद गड़बड़ी के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल समेत 22 भर्ती प्रक्रियाओं को निरस्त करने, 6 को स्थगित करने और 17 अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाने का बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। गौरतलब है कि टीडीपीएल के डिजिटल रिकॉर्ड, ओएमआर डेटा तक तकनीकी कर्मचारियों की पहुंच और उस पहुंच के दुरुपयोग की गहन पड़ताल जारी है। जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों के बयानों को फॉरेंसिक डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन के ट्रेल से जोड़कर अदालत में पुख्ता साक्ष्य के रूप में स्थापित करने की है।