वृंदावन गुरुकुल में 4 छात्रों की दम घुटने से मौत: सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान हादसा, परिजनों ने मांगी मजिस्ट्रेट जांच
सारांश
मुख्य बातें
वृंदावन (मथुरा) के एक संस्कृत गुरुकुल में 7 अक्टूबर 2026 की रात सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान जहरीली गैस से दम घुटने के कारण 4 छात्रों की मौत हो गई। मृतकों में जयंती माता शक्ति पीठ, हस्तिनापुर (मेरठ) के मठ पुजारी पंडित विशु शर्मा भी शामिल हैं। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
हादसे का घटनाक्रम
परिजनों के अनुसार, मंगलवार रात लगभग 10 बजे गुरुकुल प्रबंधन ने छात्रों से जबरन सेप्टिक टैंक की सफाई कराई। जयंती माता शक्ति पीठ के अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि छात्रों के मना करने के बावजूद उन्हें टैंक के अंदर भेजा गया। टैंक चारों तरफ से बंद था और एक व्यक्ति के लिए भी अंदर जाना मुश्किल था। भीतर जाते ही जहरीली गैस से दम घुटने लगा और चारों छात्र बेहोश होकर वहीं गिर पड़े।
सुदेश कुमार ने बताया, 'मना करने के बावजूद बच्चों को अंदर भेजा गया। जहरीली गैस से दम घुटने लगा और वो बेहोश होकर गिर गए, वहीं चारों ने दम तोड़ दिया।' मृतक चारों छात्र कथित तौर पर बेहद गरीब ब्राह्मण परिवारों से थे।
परिजनों को सूचना देने में देरी का आरोप
सुदेश कुमार के अनुसार, घटना के बाद गुरुकुल प्रबंधन ने परिजनों को सूचित तक नहीं किया। पूरे उत्तर प्रदेश में खबर फैल गई, लेकिन परिजन अंधेरे में रहे। सुदेश कुमार को जानकारी मंगलवार रात 1:35 बजे वृंदावन कोतवाली इंस्पेक्टर के माध्यम से हस्तिनापुर एसएचओ से मिली, जब दो पुलिसकर्मी आश्रम पहुंचे। इसके बाद उन्होंने गुरुकुल के आचार्य अंकुर और आशीष गुरुजी को फोन किया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। परिजन रात ढाई बजे मेरठ से वृंदावन के लिए रवाना हुए।
मृतकों का परिचय और परिवारों का दर्द
हादसे में जान गंवाने वाले 17 वर्षीय देवांश का परिवार विदिशा, मध्य प्रदेश से पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचा। मृतक के बड़े भाई राघवेंद्र दुबे ने बताया कि उन्हें रात 12 बजे एक मित्र के माध्यम से हादसे की सूचना मिली। देवांश का इसी साल जुलाई में संस्कृत, ज्योतिष और वेद की पढ़ाई के लिए गुरुकुल में प्रवेश कराया गया था।
राघवेंद्र दुबे ने बताया, 'हम पाँच भाई-बहन हैं, देवांश सबसे छोटा था। परिवार को उससे बहुत उम्मीदें थीं। पिता खेती करते हैं।' इसके अलावा हादसे में मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी मनु कटारे और आर्यन पांडेय की भी मौत हुई है।
विशु शर्मा को 18 अगस्त 2026 को संस्कृत शिक्षा के लिए गुरुकुल में प्रवेश दिलाया गया था। उनकी फीस ₹51,000 तय हुई थी, जिसमें से ₹24,000 ऑनलाइन जमा किए गए थे। सुदेश कुमार ने बताया कि नवरात्रि के अवसर पर विशु को हस्तिनापुर वापस बुलाया जाना था और उसी दिन उसे लौटना था।
परिजनों और जांच की मांग
सुदेश कुमार ने तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने, मजिस्ट्रेट जांच और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने योगी सरकार से गरीब परिजनों को सरकारी सहायता प्रदान करने की अपील की है। यह घटना उस व्यापक समस्या की याद दिलाती है जिसमें धार्मिक शैक्षणिक संस्थाओं में छात्रों से श्रम करवाए जाने के आरोप समय-समय पर सामने आते हैं।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और जांच जारी है। गौरतलब है कि सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान मौतें देशभर में एक गंभीर समस्या रही हैं — केंद्र सरकार ने मैनुअल स्केवेंजिंग पर कानूनी प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं रुक नहीं पा रही हैं। मामले में जिम्मेदार गुरुकुल प्रबंधन पर कानूनी कार्रवाई की संभावना है।