1 नवंबर 2026
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उज्जैन के होटल श्रीगंगा में जहरीली गैस से 4 सफाई कर्मचारियों की मौत, CM मोहन यादव ने ₹4-4 लाख मुआवजे का ऐलान किया

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उज्जैन के होटल श्रीगंगा में जहरीली गैस से 4 सफाई कर्मचारियों की मौत, CM मोहन यादव ने ₹4-4 लाख मुआवजे का ऐलान किया

सारांश

उज्जैन के होटल श्रीगंगा में फूड वेस्ट टैंक साफ करते समय जहरीली गैस की चपेट में आने से चार दिहाड़ी मज़दूरों की जान चली गई — एक के बाद एक, हर कोई पिछले को बचाने उतरा और खुद नहीं लौट सका। CM मोहन यादव ने ₹4-4 लाख मुआवज़े की घोषणा की है, लेकिन यह हादसा सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा पर गहरे सवाल छोड़ गया है।

मुख्य बातें

उज्जैन के होटल श्रीगंगा में 1 नवंबर 2026 की रात 10:30 बजे फूड वेस्ट टैंक सफाई के दौरान जहरीली गैस से 4 श्रमिकों की मौत हुई।
मृतकों की पहचान कमलेश, नितिन, वाहिद और मनोज के रूप में हुई; एक श्रमिक हेमराज बचने में सफल रहा।
CM मोहन यादव ने प्रत्येक मृतक के परिजन को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए।
रेस्क्यू के दौरान 3 पुलिसकर्मी भी घायल हुए; चैंबर को कटिंग मशीन से काटकर खोला गया।
डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा मौके पर पहुँचे; पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद कानूनी कार्रवाई होगी।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में देवास रोड स्थित होटल श्रीगंगा के फूड वेस्ट टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से चार सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। यह दर्दनाक हादसा शनिवार, 1 नवंबर 2026 की रात करीब 10:30 बजे हुआ। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को ₹4-4 लाख की आर्थिक सहायता देने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।

हादसे का घटनाक्रम

रात को रेस्टोरेंट का फूड वेस्ट टैंक जाम हो गया, जिसे ठीक करने के लिए एक श्रमिक चैंबर के भीतर उतरा और वहाँ फँस गया। उसे बचाने के प्रयास में तीन अन्य श्रमिक एक-एक करके अंदर गए, लेकिन चैंबर में भरी जहरीली गैस और दम घुटने की स्थिति के कारण चारों की वहीं मौत हो गई।

चैंबर का मुँह नहीं खुल पा रहा था, इसलिए माधव नगर पुलिस और रेस्क्यू टीम ने कटिंग मशीन से उसे काटा। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद चारों श्रमिकों के शव बाहर निकाले गए। पुलिसकर्मियों ने CPR देने की कोशिश की, लेकिन श्रमिकों को होश में नहीं लाया जा सका।

मृतकों की पहचान

मारे गए चारों श्रमिकों की पहचान वाल्मीकि नगर के निवासी कमलेश और नितिन, सोमवारिया के वाहिद, तथा झालावाड़ के मनोज के रूप में हुई है। एक मृतक के पिता शाकिर ने बताया कि उनका बेटा किराए के घर में रहकर दिहाड़ी मज़दूरी करता था। उन्होंने कहा, 'मुझे लगा कि वह कल रात काम पर गया होगा। वह अपना टिफिन साथ ले गया था। बाद में मुझे पता चला कि उसकी मौत हो गई है।' चारों शवों का पोस्टमॉर्टम जिला अस्पताल में कराया जा रहा है।

इस हादसे में हेमराज नामक एक सफाई कर्मचारी समय रहते चैंबर से बाहर निकलने में सफल रहा और बच गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

रेस्क्यू अभियान के दौरान सब-इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह तोमर, कांस्टेबल संतोष और एक अन्य व्यक्ति भी घायल हो गए। डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने मौके का मुआयना किया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पोस्टमॉर्टम और जाँच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'उज्जैन में एक निजी होटल में चैंबर की सफाई के दौरान हुई दुर्घटना में चार लोगों के दुखद निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। राज्य शासन की ओर से मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।'

उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया ने भी एक्स पर पोस्ट कर इसे 'हृदयविदारक एवं दुखद' बताया और कहा कि 'चार परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया।' उन्होंने दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।

आगे क्या होगा

यह घटना देश में सीमित-स्थान (confined space) में काम करने वाले असंगठित सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल उठाती है। गौरतलब है कि ऐसे हादसे पूरे भारत में बार-बार सामने आते हैं, फिर भी सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण की अनुपस्थिति एक बड़ी समस्या बनी हुई है। पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद होटल प्रबंधन के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक पुरानी और दोहराई जाने वाली लापरवाही की कहानी है — सीमित-स्थान में काम करने वाले असंगठित मज़दूर, बिना सुरक्षा उपकरण, बिना प्रशिक्षण। ₹4 लाख का मुआवज़ा एक परिवार के खोए हुए सदस्य की भरपाई नहीं कर सकता। असली सवाल यह है कि जब ऐसे हादसे बार-बार होते हैं, तो होटल मालिकों और ठेकेदारों की जवाबदेही क्यों नहीं तय होती? पोस्टमॉर्टम और जाँच रिपोर्ट का इंतज़ार उचित है, लेकिन बिना ठोस कानूनी परिणाम के यह जाँच भी महज़ खानापूर्ति बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन होटल में 4 मज़दूरों की मौत कैसे हुई?
होटल श्रीगंगा के फूड वेस्ट टैंक में जाम आने पर एक श्रमिक उसे ठीक करने चैंबर में उतरा और फँस गया। उसे बचाने के लिए तीन अन्य श्रमिक एक-एक करके अंदर गए, लेकिन चैंबर में भरी जहरीली गैस के कारण सभी चारों की दम घुटने से मौत हो गई।
CM मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों के लिए क्या घोषणा की?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रत्येक मृतक के परिजन को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता देने के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर शोकाकुल परिजनों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।
इस हादसे में कितने लोग घायल हुए और कौन-से अधिकारी मौके पर पहुँचे?
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सब-इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह तोमर, कांस्टेबल संतोष और एक अन्य व्यक्ति घायल हुए। डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने मौके का मुआयना किया।
मारे गए श्रमिकों की पहचान क्या है?
चारों मृतकों की पहचान वाल्मीकि नगर के कमलेश और नितिन, सोमवारिया के वाहिद और झालावाड़ के मनोज के रूप में हुई है। सभी दिहाड़ी मज़दूर थे और उज्जैन में किराए पर रहते थे।
हादसे के बाद आगे क्या कार्रवाई होगी?
चारों शवों का पोस्टमॉर्टम जिला अस्पताल में कराया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि पोस्टमॉर्टम और जाँच रिपोर्ट के आधार पर होटल प्रबंधन के विरुद्ध आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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