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उत्तराखंड चुनाव 2027: रुद्रप्रयाग जिले की दोनों सीटों पर भाजपा का दबदबा, कांग्रेस के लिए चुनौती बरकरार

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उत्तराखंड चुनाव 2027: रुद्रप्रयाग जिले की दोनों सीटों पर भाजपा का दबदबा, कांग्रेस के लिए चुनौती बरकरार

सारांश

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ रुद्रप्रयाग जिले की दोनों सीटों — रुद्रप्रयाग और केदारनाथ — पर भाजपा के वर्चस्व की तस्वीर साफ है। 2022 के आँकड़े और 2024 का उपचुनाव बताते हैं कि कांग्रेस के लिए यह किला तोड़ना आसान नहीं होगा।

मुख्य बातें

रुद्रप्रयाग सीट पर राज्य गठन के बाद से पाँच में से चार चुनाव भाजपा ने जीते हैं।
2022 में भाजपा के भरत सिंह चौधरी ने 29,660 वोट पाकर कांग्रेस के प्रदीप थपलियाल को 9,802 मतों से हराया।
केदारनाथ सीट पर 2024 के उपचुनाव में भाजपा की आशा नौटियाल ने 5,622 मतों से जीत दर्ज की।
रुद्रप्रयाग में 92% ग्रामीण, 54% राजपूत मतदाता; भाजपा के लिए अनुकूल जातीय समीकरण।
कांग्रेस के पुराने नेता ग्यालू लाल ने 35 वर्ष बाद पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियाँ अभी से तेज़ होने लगी हैं। रुद्रप्रयाग जिले की दोनों विधानसभा सीटों — रुद्रप्रयाग और केदारनाथ — पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का वर्चस्व बना हुआ है, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सत्ता में वापसी की राह तलाश रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव के आँकड़े इन दोनों सीटों की राजनीतिक बनावट को समझने की कुंजी हैं।

रुद्रप्रयाग सीट: भाजपा का लगातार दबदबा

राज्य गठन के बाद से रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट पर अब तक पाँच चुनाव हुए हैं, जिनमें से चार बार भाजपा और एक बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। 2017 और 2022 — लगातार दो बार — भाजपा के भरत सिंह चौधरी इस सीट से विजयी रहे हैं। 2022 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार प्रदीप थपलियाल को 9,802 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया।

भरत सिंह चौधरी को 29,660 वोट मिले, जबकि थपलियाल 19,858 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। चौधरी फिलहाल उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और उनके पास ग्रामीण विकास, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम समेत कई विभागों का कार्यभार है।

जातीय समीकरण और ग्रामीण मतदाताओं का दबदबा

रुद्रप्रयाग सीट पर करीब 92 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण हैं। जातीय संरचना की दृष्टि से यह सीट ठाकुर (राजपूत) बाहुल्य मानी जाती है — लगभग 54 प्रतिशत राजपूत, 28 प्रतिशत ब्राह्मण और करीब 18 प्रतिशत अनुसूचित जाति (SC) व अन्य मतदाता यहाँ हैं। यह समीकरण भाजपा के पक्ष में ऐतिहासिक रूप से झुका रहा है।

गौरतलब है कि हाल ही में कांग्रेस के पुराने नेता ग्यालू लाल ने 35 वर्ष के लंबे जुड़ाव के बाद पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। यह घटनाक्रम 2027 से पहले कांग्रेस की संगठनात्मक चुनौतियों को और उजागर करता है।

केदारनाथ सीट: धार्मिक आस्था भी राजनीति की धुरी

केदारनाथ विधानसभा सीट इस क्षेत्र की सबसे चर्चित सीटों में शुमार है। केदारनाथ धाम — हिंदुओं के चार धामों में से एक — इस सीट की सीमाओं में आता है, जिससे यहाँ के चुनावी विमर्श में स्थानीय विकास के साथ-साथ हिंदू आस्था और धार्मिक भावनाएँ भी प्रमुख भूमिका निभाती हैं।

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की शैला रानी रावत ने यह सीट जीती थी। उनके निधन के बाद 2024 में हुए उपचुनाव में भाजपा की आशा नौटियाल ने कांग्रेस उम्मीदवार मनोज रावत को 5,622 मतों से पराजित कर सीट पर पार्टी की पकड़ बनाए रखी। नौटियाल को 23,814 वोट और रावत को 18,192 वोट मिले थे।

केदारनाथ सीट का चुनावी इतिहास

राज्य गठन के बाद से केदारनाथ सीट पर भाजपा चार बार जीत चुकी है, जबकि कांग्रेस को केवल दो बार सफलता मिली है। यह सीट मुख्य रूप से राजपूत मतदाताओं की बड़ी आबादी के लिए जानी जाती है, इसके अलावा OBC तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति (SC/ST) वर्ग के मतदाता भी यहाँ उल्लेखनीय संख्या में हैं।

2027 के लिए राजनीतिक बिसात

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने संगठन को चुनावी मोड में लाने की कोशिश में जुटी हैं। भाजपा हैट्रिक की तैयारी में है, तो कांग्रेस जमीनी स्तर पर नई ऊर्जा भरने की कोशिश कर रही है। रुद्रप्रयाग जिले के नतीजे न केवल इन दो सीटों का भाग्य तय करेंगे, बल्कि पूरे पहाड़ी क्षेत्र की राजनीतिक दिशा का भी संकेत देंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जातीय-भौगोलिक समीकरणों में गहरी पैठ पर टिका है — जिसे तोड़ना कांग्रेस के लिए संगठनात्मक मज़बूती के बिना संभव नहीं दिखता। ग्यालू लाल जैसे अनुभवी नेताओं का पार्टी छोड़ना दर्शाता है कि कांग्रेस को चुनावी प्रबंधन से पहले अंदरूनी एकजुटता का संकट हल करना होगा। केदारनाथ सीट पर धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन जैसे मुद्दों को भाजपा अपने पक्ष में भुनाती रही है — 2027 में भी यही उसकी सबसे बड़ी ताकत होगी।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2022 के चुनाव में रुद्रप्रयाग सीट से कौन जीता था?
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के भरत सिंह चौधरी ने रुद्रप्रयाग सीट से 29,660 वोट पाकर जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के प्रदीप थपलियाल को 9,802 मतों के अंतर से हराया था।
केदारनाथ सीट पर 2024 का उपचुनाव क्यों हुआ और कौन जीता?
2022 में केदारनाथ सीट से जीती भाजपा विधायक शैला रानी रावत के निधन के बाद 2024 में उपचुनाव हुआ। भाजपा की आशा नौटियाल ने कांग्रेस के मनोज रावत को 5,622 मतों से हराकर यह सीट पार्टी के पास बनाए रखी।
रुद्रप्रयाग सीट पर जातीय समीकरण कैसा है?
रुद्रप्रयाग सीट पर लगभग 54 प्रतिशत राजपूत, 28 प्रतिशत ब्राह्मण और करीब 18 प्रतिशत अनुसूचित जाति व अन्य मतदाता हैं। यहाँ करीब 92 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण हैं, जो ऐतिहासिक रूप से भाजपा के पक्ष में रहे हैं।
केदारनाथ सीट पर चुनाव में धर्म की भूमिका क्यों अहम है?
केदारनाथ धाम — चार धामों में से एक — इस विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है, जिसके कारण यहाँ हिंदू आस्था और धार्मिक भावनाएँ चुनावी विमर्श को प्रभावित करती हैं। स्थानीय विकास के अलावा तीर्थयात्रा से जुड़े मुद्दे भी मतदाताओं की प्राथमिकता में रहते हैं।
2027 उत्तराखंड चुनाव में कांग्रेस की राह में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
रुद्रप्रयाग जिले में कांग्रेस को भाजपा के मज़बूत जातीय आधार और सत्ता-विरोधी लहर की अनुपस्थिति से जूझना होगा। हाल ही में वरिष्ठ नेता ग्यालू लाल का 35 वर्ष बाद पार्टी छोड़ना संगठनात्मक कमज़ोरी का संकेत है, जो 2027 की तैयारियों को और कठिन बना सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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