यूपी विधानसभा चुनाव 2027: महराजगंज की 5 सीटों पर जातीय समीकरण और 2022 के नतीजों का पूरा विश्लेषण
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पूर्वांचल के महराजगंज जिले की पाँच विधानसभा सीटें — फरेंदा, नौतनवा, सिसवा, महराजगंज सदर (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित) और पनियरा — एक बार फिर राजनीतिक दलों की रणनीति के केंद्र में आ गई हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन ने इनमें से चार सीटें जीती थीं, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने अकेले फरेंदा सीट पर अपना परचम लहराया था।
फरेंदा: जिले की सबसे करीबी लड़ाई
फरेंदा सीट महराजगंज की सबसे रोमांचक सीट मानी जाती है। 2022 में कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी ने भाजपा के बजरंग बहादुर सिंह को महज 1,246 मतों के अत्यंत करीबी अंतर से पराजित किया। वीरेंद्र चौधरी को 85,181 वोट मिले, जबकि बजरंग बहादुर सिंह 83,935 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के ईशू चौरसिया 21,665 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर ब्राह्मण, ठाकुर और मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में माने जाते हैं।
नौतनवा: तीन चुनावों में तीन अलग-अलग पार्टियाँ
नौतनवा सीट का राजनीतिक इतिहास बेहद अस्थिर रहा है। 2012 में कांग्रेस के कौशल किशोर, 2017 में निर्दलीय अमन मणि त्रिपाठी और 2022 में भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के ऋषि त्रिपाठी ने यहाँ जीत दर्ज की। 2022 में ऋषि त्रिपाठी को 90,263 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) के कुंवर कौशल सिंह को 74,932 वोट प्राप्त हुए और जीत का अंतर 15,331 वोट रहा। बसपा के अमन मणि त्रिपाठी 46,128 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस क्षेत्र में निषाद, मछुआरा और अन्य अति पिछड़ा वर्ग के मतदाता चुनावी समीकरण तय करते हैं।
सिसवा और पनियरा: भाजपा के मज़बूत गढ़
सिसवा सीट पर 2017 और 2022 दोनों चुनावों में भाजपा के प्रेमसागर पटेल ने एकतरफा जीत हासिल की। 2022 में उन्हें 1,27,673 वोट मिले, जबकि सपा के सुशील कुमार तिबड़ेवाल को 64,942 वोट और बसपा के धीरेंद्र प्रताप सिंह को 33,498 वोट प्राप्त हुए। जीत का अंतर 62,000 से अधिक वोट रहा। इससे पहले 2012 में यह सीट समाजवादी पार्टी के पास थी।
पनियरा सीट पर भाजपा के ज्ञानेंद्र सिंह ने 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज कर इसे पार्टी का मज़बूत गढ़ बना दिया। 2022 में उन्हें 1,35,463 वोट मिले और उन्होंने सपा के कृष्णभान सिंह को 61,428 वोटों के अंतर से पराजित किया। बसपा के ओमप्रकाश चौरसिया 34,829 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। गौरतलब है कि 2007 और 2012 में इस सीट पर बसपा का प्रभाव था। पनियरा और सिसवा में सैंथवार (कुर्मी) समुदाय के मतदाताओं का खासा प्रभाव माना जाता है।
महराजगंज सदर (आरक्षित): दलित वोट बैंक की निर्णायक भूमिका
महराजगंज सदर (अनुसूचित जाति आरक्षित) सीट पर 2012 में समाजवादी पार्टी जीती थी, परंतु 2017 और 2022 में भाजपा के जय मंगल कनौजिया ने लगातार दो बार विजय प्राप्त की। 2022 में कनौजिया को 1,36,071 वोट मिले, निर्दलीय निर्मेश मंगल 59,168 वोट के साथ दूसरे और गीता रत्ना 22,395 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। भाजपा को यहाँ 76,000 से अधिक वोटों की बड़ी बढ़त मिली। इस सीट पर दलित वोट बैंक चुनावी परिणाम निर्धारित करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है।
जातीय समीकरण और 2027 की चुनौतियाँ
महराजगंज जिले में जातीय समीकरण चुनावी परिणामों पर गहरा असर डालते हैं। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सभी प्रमुख दल — भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा — अपनी-अपनी रणनीतियाँ तैयार कर रहे हैं। 2022 के नतीजों के अनुसार, भाजपा गठबंधन का इस जिले में स्पष्ट वर्चस्व दिखा, लेकिन फरेंदा जैसी सीट यह याद दिलाती है कि यहाँ कोई भी सीट आसान नहीं है। 2027 में जातीय गणित, स्थानीय मुद्दे और गठबंधन की रूपरेखा तय करेगी कि इन पाँच सीटों पर राजनीतिक बाज़ी कौन मारता है।