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यूपी चुनाव 2027 से पहले सिद्धार्थनगर की 5 सीटों का हाल: 2022 में BJP को 3, सपा को 2 सीटें मिली थीं

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यूपी चुनाव 2027 से पहले सिद्धार्थनगर की 5 सीटों का हाल: 2022 में BJP को 3, सपा को 2 सीटें मिली थीं

सारांश

यूपी चुनाव 2027 की आहट के बीच सिद्धार्थनगर की पाँच सीटों का 2022 का लेखा-जोखा अहम हो जाता है — BJP गठबंधन ने 3 सीटें रखीं, सपा ने 2 छीनीं। डुमरियागंज में 771 वोटों का फ़र्क बताता है कि जिले की राजनीति कितनी करवट ले सकती है।

मुख्य बातें

सिद्धार्थनगर जिले की 5 विधानसभा सीटों में से 3 पर BJP गठबंधन (बांसी, कपिलवस्तु, शोहरतगढ़) और 2 पर सपा (डुमरियागंज, इटवा) ने 2022 में जीत दर्ज की।
जय प्रताप सिंह ने बांसी से 84,596 मत पाकर आठवीं बार विधानसभा जीती; सपा प्रत्याशी को 64,256 वोट मिले।
डुमरियागंज में सपा की सैयदा खातून ने BJP के राघवेंद्र प्रताप सिंह को महज 771 मतों के अंतर से हराया।
सपा के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इटवा में 2017 की हार का बदला लेकर 2022 में सीट वापस जीती।
कपिलवस्तु में BJP के श्यामधनी राही को 1,22,940 वोट मिले; शोहरतगढ़ में अपना दल (सोनेलाल) के विनय वर्मा ने NDA की सीट बरकरार रखी।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच सिद्धार्थनगर जिले की पाँच विधानसभा सीटों — बांसी, डुमरियागंज, इटवा, कपिलवस्तु और शोहरतगढ़ — के 2022 के नतीजे फिर से चर्चा में हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की तीन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके गठबंधन ने जीत दर्ज की थी, जबकि दो सीटों पर समाजवादी पार्टी (सपा) ने बाज़ी मारी थी। यह ज़िला अगले चुनाव में दोनों प्रमुख दलों के लिए एक महत्वपूर्ण रणभूमि बना हुआ है।

बांसी सीट: जय प्रताप सिंह की आठवीं जीत

बांसी विधानसभा सीट पर BJP के वरिष्ठ नेता जय प्रताप सिंह को 84,596 मत मिले, जबकि सपा प्रत्याशी नवीन को 64,256 वोट प्राप्त हुए। बसपा के राधेश्याम 22,071 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस की किरण शुक्ला भी इस मैदान में थीं।

जय प्रताप सिंह ने इस जीत के साथ अपने करियर की आठवीं विधानसभा जीत दर्ज की। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी 1989 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में शुरू की थी और तब से इस क्षेत्र में उनका प्रभाव लगातार बना रहा है, हालाँकि उनके लंबे करियर में एक पराजय भी दर्ज है।

डुमरियागंज सीट: 771 मतों का ऐतिहासिक अंतर

डुमरियागंज विधानसभा सीट पर सपा की सैयदा खातून ने BJP के राघवेंद्र प्रताप सिंह को महज 771 मतों के अत्यंत कम अंतर से पराजित किया। सैयदा खातून को 85,098 वोट मिले, जबकि राघवेंद्र प्रताप सिंह को 84,327 मत प्राप्त हुए। बसपा के अशोक कुमार तिवारी 20,416 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

गौरतलब है कि नेपाल सीमा के निकट स्थित यह सीट जिले की सबसे रोमांचक सीट रही। इतने कम अंतर की जीत ने जिले भर में चर्चा का माहौल बना दिया और सपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पकड़ सुनिश्चित की।

इटवा सीट: माता प्रसाद पांडेय की सपा में वापसी

इटवा विधानसभा सीट पर सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने BJP के सतीश चंद्र द्विवेदी को पराजित कर जीत दर्ज की। यह ऐसे समय में आया जब 2017 में द्विवेदी ने पांडेय को हराया था और सीट पर कब्ज़ा जमाया था।

माता प्रसाद पांडेय 2002 से 2012 तक लगातार तीन बार इटवा से विधायक रहे हैं। 2022 में उनकी वापसी ने सिद्धार्थनगर जिले में सपा की राजनीतिक स्थिति को और मज़बूत किया। यह जीत जिले के प्रमुख चुनावी परिणामों में गिनी जाती है।

कपिलवस्तु सीट: BJP का लगातार वर्चस्व

भगवान बुद्ध की धरती के रूप में प्रसिद्ध कपिलवस्तु विधानसभा सीट पर BJP के श्यामधनी राही ने 1,22,940 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। सपा प्रत्याशी विजय कुमार को 92,001 वोट मिले। कांग्रेस के देवेंद्र कुमार गुड्डू और बसपा के कन्हैया प्रसाद भी मैदान में थे।

2017 के विधानसभा चुनाव में भी श्यामधनी राही को 1,14,082 वोट मिले थे, जबकि सपा के विजय कुमार पासवान को 75,928 मत प्राप्त हुए थे और बसपा के चंद्रभान 37,166 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे। 2022 में मतों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ BJP ने इस सीट पर अपनी पकड़ और मज़बूत की।

शोहरतगढ़ सीट: NDA गठबंधन का दबदबा बरकरार

शोहरतगढ़ विधानसभा सीट पर BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवार और अपना दल (सोनेलाल) के विनय वर्मा ने जीत हासिल की। इस सीट पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रेमचंद्र, कांग्रेस के चौधरी रविंद्र प्रताप और बसपा के राधारमण त्रिपाठी भी चुनाव में उतरे थे।

2017 के चुनाव में अपना दल (सोनेलाल) के अमर सिंह चौधरी ने 67,653 वोट पाकर 36.24% मत प्रतिशत के साथ जीत दर्ज की थी और बसपा के मोहम्मद जमील को 22,124 वोटों के अंतर से हराया था। इससे पहले 2012 में सपा की लालमुनि सिंह इस सीट से विधायक बनी थीं। 2022 में NDA गठबंधन की जीत ने जिले में गठबंधन की पकड़ को बनाए रखा।

यूपी चुनाव 2027 के नज़दीक आते-आते सिद्धार्थनगर की ये पाँच सीटें फिर से दोनों प्रमुख दलों की रणनीति के केंद्र में आ जाएंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग मतदाताओं का समीकरण सपा के लिए एक स्थायी अवसर बना हुआ है। 2027 में असली मुकाबला उन्हीं मतदाताओं के इर्द-गिर्द घूमेगा जो पिछली बार दोनों पार्टियों के बीच झूलते रहे।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2022 में सिद्धार्थनगर की कौन-सी सीटें BJP और सपा ने जीती थीं?
2022 के विधानसभा चुनाव में BJP गठबंधन ने बांसी, कपिलवस्तु और शोहरतगढ़ सीटें जीतीं, जबकि सपा ने डुमरियागंज और इटवा पर कब्ज़ा किया। इस तरह जिले की 5 सीटों पर 3-2 का बँटवारा रहा।
डुमरियागंज सीट पर जीत का अंतर इतना कम क्यों था?
2022 में डुमरियागंज से सपा की सैयदा खातून ने BJP के राघवेंद्र प्रताप सिंह को केवल 771 मतों से हराया — यह जिले का सबसे कम अंतर वाला परिणाम था। इस सीट पर बसपा के उम्मीदवार को भी 20,416 वोट मिले, जो दर्शाता है कि मतदाता कई दलों में बँटे हुए हैं।
माता प्रसाद पांडेय ने इटवा सीट पर 2022 में कैसे वापसी की?
सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय 2017 में BJP के सतीश चंद्र द्विवेदी से हार गए थे। 2022 में उन्होंने उसी सीट पर वापसी करते हुए द्विवेदी को हराया और 2002 से 2012 के अपने विधायक-काल के बाद एक बार फिर इटवा का प्रतिनिधित्व हासिल किया।
कपिलवस्तु सीट पर BJP का प्रदर्शन कैसा रहा है?
BJP के श्यामधनी राही ने 2017 में 1,14,082 और 2022 में 1,22,940 वोट पाकर लगातार इस सीट पर जीत दर्ज की। भगवान बुद्ध की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध कपिलवस्तु में BJP का वोट शेयर दोनों चुनावों में बढ़ता रहा है।
यूपी 2027 चुनाव के लिहाज़ से सिद्धार्थनगर की सीटें कितनी अहम हैं?
2022 के 3-2 के परिणाम और कई सीटों पर कड़े मुकाबले को देखते हुए सिद्धार्थनगर 2027 में दोनों प्रमुख दलों के लिए एक निर्णायक जिला बन सकता है। विशेष रूप से डुमरियागंज जैसी सीटें, जहाँ जीत का अंतर बेहद कम था, आगामी चुनाव में रणनीतिक केंद्र बिंदु रहेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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