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यूपी चुनाव 2027: कानपुर देहात की चारों सीटों पर 2022 में भाजपा का दबदबा, सपा से होगी कड़ी टक्कर

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यूपी चुनाव 2027: कानपुर देहात की चारों सीटों पर 2022 में भाजपा का दबदबा, सपा से होगी कड़ी टक्कर

सारांश

2022 में भाजपा ने कानपुर देहात की चारों सीटें जीती थीं — रसूलाबाद, अकबरपुर-रनियां, सिकंदरा और भोगनीपुर। 2027 में सपा इस गढ़ को तोड़ने की कोशिश में है। जातीय समीकरण, उम्मीदवारी और स्थानीय मुद्दे इस बार के चुनावी गणित को निर्धारित करेंगे।

मुख्य बातें

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कानपुर देहात की सभी 4 सीटें जीती थीं।
अकबरपुर-रनियां सीट पर प्रतिभा शुक्ला ने 13,417 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
सिकंदरा सीट पर मतदान प्रतिशत 60.79% और भोगनीपुर पर 62.34% रहा था।
रसूलाबाद सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है; पूनम शंखवार यहाँ से भाजपा विधायक हैं।
2027 में सपा और भाजपा के बीच कड़े मुकाबले की संभावना जताई जा रही है।
कानपुर देहात का नाम 2010 में रमाबाई नगर किया गया था, जो 2012 में पुनः बदल दिया गया।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच कानपुर देहात जिला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जिले की सभी चार विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज कर इसे अपना मजबूत गढ़ साबित किया था। अब 2027 के चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है, और आकलन यह है कि इस बार समाजवादी पार्टी (सपा) और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

रसूलाबाद: आरक्षित सीट पर भाजपा का कब्जा

रसूलाबाद विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहाँ से भाजपा की पूनम शंखवार विधायक हैं, जो 18वीं विधानसभा में जिले का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 2022 के चुनाव में उन्होंने सपा के प्रत्याशी कमलेश चंद्र दिवाकर को बड़े अंतर से पराजित किया था।

अकबरपुर-रनियां: 13,417 वोटों के अंतर से भाजपा की जीत

अकबरपुर-रनियां सीट पर भी भाजपा का कब्जा है। यहाँ से प्रतिभा शुक्ला विधायक हैं, जिन्होंने 2022 में सपा के डॉ. राम प्रकाश कुशवाहा को करीब 13,417 मतों के अंतर से हराया था। यह जीत का अंतर जिले में भाजपा की मज़बूत पकड़ को दर्शाता है।

सिकंदरा: इटावा लोकसभा क्षेत्र की अनारक्षित सीट

सिकंदरा विधानसभा सीट सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी की है और इटावा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। 2022 के चुनाव में भाजपा के अजीत सिंह पाल ने यहाँ से सपा के प्रभाकर पांडे को बड़े अंतर से हराया था। इस सीट पर मतदान प्रतिशत 60.79% दर्ज किया गया था।

भोगनीपुर: जालौन संसदीय क्षेत्र की सीट पर भाजपा का वर्चस्व

भोगनीपुर विधानसभा सीट भी सामान्य है और जालौन संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है। 2022 में भाजपा के राकेश सचान ने यहाँ से सपा के नरेंद्र पाल सिंह को बड़े अंतर से पराजित किया था। इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के जुनैद खान तीसरे स्थान पर रहे थे। यहाँ का मतदान प्रतिशत 62.34% रहा था।

कानपुर देहात: भौगोलिक और प्रशासनिक परिचय

कानपुर देहात उत्तर प्रदेश का एक महत्त्वपूर्ण जिला है जिसका मुख्यालय माती में स्थित है। उल्लेखनीय है कि 1 जुलाई 2010 की अधिसूचना द्वारा इसका नाम बदलकर रमाबाई नगर कर दिया गया था, किंतु 2012 में पुनः कानपुर देहात नाम बहाल हो गया। भौगोलिक दृष्टि से यह जिला गंगा और यमुना के दोआब के निचले भाग में स्थित है और हमीरपुर, जालौन, औरैया, कन्नौज तथा कानपुर नगर — पाँच जिलों से सीमा साझा करता है।

प्रशासनिक रूप से जिले में 6 तहसीलें हैं — भोगनीपुर, अकबरपुर, डेरापुर, सिकंदरा, रसूलाबाद और मैथा। वहीं 10 विकास खंड हैं जिनमें अमरौधा, मलासा, डेरापुर, झींझक, अकबरपुर, सरवन खेड़ा, राजपुर, संदलपुर, रसूलाबाद और मैथा सम्मिलित हैं।

2027 की राह: क्या बदलेगा समीकरण

गौरतलब है कि 2022 में चारों सीटों पर एकछत्र राज के बाद भाजपा के सामने 2027 में अपना जनाधार बरकरार रखने की चुनौती होगी। सपा ने जातीय और स्थानीय समीकरणों को साधकर अपनी रणनीति तेज़ की है। आने वाले महीनों में दोनों दलों की उम्मीदवारी, गठबंधन और जातीय गणित ही तय करेगा कि कानपुर देहात का गढ़ बरकरार रहता है या बदलाव की हवा चलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि 60-62% मतदान प्रतिशत बताता है कि एक बड़ा वर्ग मतदान से दूर रहा — जो 2027 में किसी भी दल के लिए असली अवसर है। जातीय आरक्षण वाली रसूलाबाद सीट पर दलित मतदाताओं का रुझान और सिकंदरा-भोगनीपुर जैसी सामान्य सीटों पर ओबीसी गणित निर्णायक भूमिका निभाएगा। सपा ने पिछले चुनावों में इन्हीं समीकरणों को भुनाने की कोशिश की थी, और 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश में सपा के बेहतर प्रदर्शन ने उसके हौसले बढ़ाए हैं। असली परीक्षा यह होगी कि भाजपा स्थानीय एंटी-इनकंबेंसी को कितना नियंत्रित कर पाती है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कानपुर देहात में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
कानपुर देहात जिले में कुल 4 विधानसभा सीटें हैं — रसूलाबाद, अकबरपुर-रनियां, सिकंदरा और भोगनीपुर। इनमें रसूलाबाद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है जबकि शेष तीन सामान्य (अनारक्षित) सीटें हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में कानपुर देहात में किसने जीत दर्ज की?
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कानपुर देहात की सभी चारों सीटें जीती थीं। रसूलाबाद से पूनम शंखवार, अकबरपुर-रनियां से प्रतिभा शुक्ला, सिकंदरा से अजीत सिंह पाल और भोगनीपुर से राकेश सचान ने सपा प्रत्याशियों को हराया था।
2027 में कानपुर देहात में मुख्य राजनीतिक मुकाबला किनके बीच होगा?
2027 में कानपुर देहात में भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच कड़ी टक्कर की संभावना बताई जा रही है। दोनों दलों ने अपनी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं और जातीय-स्थानीय समीकरण इस मुकाबले को निर्धारित करेंगे।
कानपुर देहात जिले का पुराना नाम क्या था?
1 जुलाई 2010 की सरकारी अधिसूचना द्वारा कानपुर देहात का नाम बदलकर रमाबाई नगर कर दिया गया था। हालाँकि 2012 में इसे पुनः कानपुर देहात नाम दे दिया गया, जो अब भी प्रचलन में है।
कानपुर देहात की भोगनीपुर और सिकंदरा सीट किस लोकसभा क्षेत्र में आती हैं?
भोगनीपुर विधानसभा सीट जालौन संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जबकि सिकंदरा सीट इटावा लोकसभा क्षेत्र में शामिल है। 2022 में दोनों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी।
राष्ट्र प्रेस
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