यूपी चुनाव 2027: कानपुर देहात की चारों सीटों पर 2022 में भाजपा का दबदबा, सपा से होगी कड़ी टक्कर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच कानपुर देहात जिला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जिले की सभी चार विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज कर इसे अपना मजबूत गढ़ साबित किया था। अब 2027 के चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है, और आकलन यह है कि इस बार समाजवादी पार्टी (सपा) और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
रसूलाबाद: आरक्षित सीट पर भाजपा का कब्जा
रसूलाबाद विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहाँ से भाजपा की पूनम शंखवार विधायक हैं, जो 18वीं विधानसभा में जिले का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 2022 के चुनाव में उन्होंने सपा के प्रत्याशी कमलेश चंद्र दिवाकर को बड़े अंतर से पराजित किया था।
अकबरपुर-रनियां: 13,417 वोटों के अंतर से भाजपा की जीत
अकबरपुर-रनियां सीट पर भी भाजपा का कब्जा है। यहाँ से प्रतिभा शुक्ला विधायक हैं, जिन्होंने 2022 में सपा के डॉ. राम प्रकाश कुशवाहा को करीब 13,417 मतों के अंतर से हराया था। यह जीत का अंतर जिले में भाजपा की मज़बूत पकड़ को दर्शाता है।
सिकंदरा: इटावा लोकसभा क्षेत्र की अनारक्षित सीट
सिकंदरा विधानसभा सीट सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी की है और इटावा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। 2022 के चुनाव में भाजपा के अजीत सिंह पाल ने यहाँ से सपा के प्रभाकर पांडे को बड़े अंतर से हराया था। इस सीट पर मतदान प्रतिशत 60.79% दर्ज किया गया था।
भोगनीपुर: जालौन संसदीय क्षेत्र की सीट पर भाजपा का वर्चस्व
भोगनीपुर विधानसभा सीट भी सामान्य है और जालौन संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है। 2022 में भाजपा के राकेश सचान ने यहाँ से सपा के नरेंद्र पाल सिंह को बड़े अंतर से पराजित किया था। इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के जुनैद खान तीसरे स्थान पर रहे थे। यहाँ का मतदान प्रतिशत 62.34% रहा था।
कानपुर देहात: भौगोलिक और प्रशासनिक परिचय
कानपुर देहात उत्तर प्रदेश का एक महत्त्वपूर्ण जिला है जिसका मुख्यालय माती में स्थित है। उल्लेखनीय है कि 1 जुलाई 2010 की अधिसूचना द्वारा इसका नाम बदलकर रमाबाई नगर कर दिया गया था, किंतु 2012 में पुनः कानपुर देहात नाम बहाल हो गया। भौगोलिक दृष्टि से यह जिला गंगा और यमुना के दोआब के निचले भाग में स्थित है और हमीरपुर, जालौन, औरैया, कन्नौज तथा कानपुर नगर — पाँच जिलों से सीमा साझा करता है।
प्रशासनिक रूप से जिले में 6 तहसीलें हैं — भोगनीपुर, अकबरपुर, डेरापुर, सिकंदरा, रसूलाबाद और मैथा। वहीं 10 विकास खंड हैं जिनमें अमरौधा, मलासा, डेरापुर, झींझक, अकबरपुर, सरवन खेड़ा, राजपुर, संदलपुर, रसूलाबाद और मैथा सम्मिलित हैं।
2027 की राह: क्या बदलेगा समीकरण
गौरतलब है कि 2022 में चारों सीटों पर एकछत्र राज के बाद भाजपा के सामने 2027 में अपना जनाधार बरकरार रखने की चुनौती होगी। सपा ने जातीय और स्थानीय समीकरणों को साधकर अपनी रणनीति तेज़ की है। आने वाले महीनों में दोनों दलों की उम्मीदवारी, गठबंधन और जातीय गणित ही तय करेगा कि कानपुर देहात का गढ़ बरकरार रहता है या बदलाव की हवा चलती है।