रूसी तेल आयात पर अमेरिकी दबाव नहीं, भारत राष्ट्रीय हित से लेगा फैसले: हरदीप पुरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत कच्चे तेल के आयात संबंधी सभी निर्णय अपने राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर ले रहा है और फिलहाल रूसी तेल आयात कम करने के लिए अमेरिका की ओर से कोई दबाव नहीं है। मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत की तेल खरीद रणनीति लगातार अंतरराष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बनी हुई है।
मध्य-पूर्व से आयात में उछाल
एक कार्यक्रम में बोलते हुए हरदीप पुरी ने कहा कि मध्य-पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति में तेज़ वृद्धि दर्ज हुई है और बड़ी संख्या में कार्गो उस क्षेत्र से सुगमता से निकल पा रहे हैं। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, सितंबर 2026 में भारत का मध्य-पूर्व से कच्चे तेल का आयात युद्ध-पूर्व के स्तर पर वापस आ गया है।
यह बदलाव इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि रिफाइनरियाँ अब खाड़ी देशों से छूट पर उपलब्ध तेल की खरीद बढ़ा रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, रूसी तेल की खरीद मुख्यतः उपलब्ध छूट और तुलनात्मक कीमत पर निर्भर करती है।
रूसी तेल आयात में बदलाव की असली वजह
मंत्री ने बताया कि यूक्रेन युद्ध से पहले भारत अपनी कुल कच्चे तेल की ज़रूरत का मात्र 0.2 प्रतिशत ही रूस से आयात करता था। युद्ध के बाद रूसी तेल पर मिलने वाली भारी छूट के कारण यह आयात तेज़ी से बढ़ा। अब चीन की कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते रूसी तेल पर मिलने वाली छूट सिकुड़ी है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी है — यह एक व्यावसायिक निर्णय है, न कि किसी बाहरी दबाव का परिणाम।
गौरतलब है कि अक्टूबर 2026 की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 'राष्ट्रीय हित' से जुड़े प्रावधानों का उपयोग करते हुए रूसी ऊर्जा निर्यात पर लगने वाले नए प्रतिबंधों और शुल्कों को हटा दिया। इससे भारत को 100 प्रतिशत तक के संभावित शुल्कों से राहत मिली है।
भारत की ऊर्जा कूटनीति: मंत्री का पक्ष
सितंबर 2026 में पुरी ने कहा था कि भारत ने भू-राजनीतिक संकटों के बीच आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों को सफलतापूर्वक संभाला है और ऊर्जा आयात को निर्बाध बनाए रखा है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की 'ऊर्जा कूटनीति' की सफलता बताया।
मंत्री ने कहा, 'आज ऊर्जा सुरक्षा का मतलब सिर्फ आपूर्ति सुनिश्चित करना नहीं है; बल्कि इसका मतलब संघर्षों, मुश्किल रास्तों, कीमतों में उतार-चढ़ाव और अचानक आने वाली रुकावटों के बीच देश और उसकी अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से आगे बढ़ाते रहना भी है।'
वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत की भूमिका
पुरी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को आकार देने में एक बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है। अनुमानों के अनुसार, अगले दो दशकों में दुनिया की कुल ऊर्जा माँग में होने वाली वृद्धि का लगभग एक-चौथाई हिस्सा भारत से आने की संभावना है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल उत्पादक देश और उपभोक्ता राष्ट्र दोनों ही भारत को एक निर्णायक बाज़ार के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में भारत की ऊर्जा खरीद रणनीति न केवल घरेलू अर्थव्यवस्था, बल्कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी असर डालती रहेगी।