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सितंबर में रूस से भारत का कच्चे तेल आयात 13% घटा, यूराल क्रूड $90.7 प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर

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सितंबर में रूस से भारत का कच्चे तेल आयात 13% घटा, यूराल क्रूड $90.7 प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर

सारांश

सितंबर में भारत का रूस से कच्चे तेल आयात 13% घटा — पर यह कमी पश्चिमी प्रतिबंधों की जीत नहीं, बल्कि कीमतों में उछाल की देन है। यूराल क्रूड $90.7/बैरल पर EU की मूल्य सीमा से दोगुना हो गया, और ट्रंप के नए कार्यकारी आदेश ने भारत-चीन के लिए रास्ता और आसान कर दिया।

मुख्य बातें

सितंबर 2026 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात 13% घटकर अप्रैल 2026 के बाद के न्यूनतम स्तर पर आया — CREA रिपोर्ट के अनुसार यह लगातार दूसरा महीना है।
जामनगर (रिलायंस) में 27% , पारादीप (IOC) में 21% और वाडिनार (नायरा एनर्जी) में 8% की रिफाइनरी-स्तरीय गिरावट दर्ज हुई।
भारत ने सितंबर में €4.1 अरब मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदे — रूस का दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार बना रहा।
यूराल क्रूड की कीमत महीने-दर-महीने 32% बढ़कर $90.7/बैरल — EU की $44.1/बैरल की मूल्य सीमा से दोगुनी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कार्यकारी आदेश से रूसी तेल प्रतिबंधों में छूट दी — भारत और चीन को राहत।
अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के बाद छह महीनों में रूस की समुद्री निर्यात आय में $35.9 अरब की अतिरिक्त वृद्धि: CREA।

भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात सितंबर 2026 में 13 प्रतिशत घटकर अप्रैल 2026 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यह लगातार दूसरा महीना है जब रूसी कच्चे तेल की खरीद में कमी दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया संकट से उपजे व्यापार-मार्ग व्यवधान और कीमतों में उछाल इस गिरावट की मुख्य वजह बताए जा रहे हैं।

रिफाइनरी-वार गिरावट का ब्यौरा

रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का आयात सबसे तेज़ी से — 27 प्रतिशत — गिरा। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) की पारादीप रिफाइनरी में 21 प्रतिशत और नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी में 8 प्रतिशत की गिरावट रही। इन तीनों रिफाइनरियों की संयुक्त हिस्सेदारी भारत के रूसी कच्चे तेल आयात में बड़ी भूमिका रखती है।

भारत फिर भी रूस का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार

गिरावट के बावजूद भारत, सितंबर 2026 में रूस का दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार बना रहा। CREA के आँकड़ों के अनुसार, इस अवधि में भारत ने 4.1 अरब यूरो मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया, जिसमें 88 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल का था। इससे अधिक खरीद केवल चीन ने की। यह ऐसे समय में आया है जब दिसंबर 2022 से अब तक रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की संचयी हिस्सेदारी 37 प्रतिशत और चीन की 50 प्रतिशत रही है।

यूराल क्रूड की कीमत मूल्य सीमा से दोगुनी

CREA की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में रूस के यूराल ग्रेड कच्चे तेल की औसत कीमत महीने-दर-महीने 32 प्रतिशत उछलकर $90.7 प्रति बैरल हो गई — जो अप्रैल 2026 के बाद का सबसे ऊँचा मासिक औसत है। यह कीमत यूरोपीय संघ और ब्रिटेन द्वारा 1 फरवरी 2026 से लागू $44.1 प्रति बैरल की मूल्य सीमा से दोगुने से भी अधिक है। यह मूल्य सीमा EU के 21वें प्रतिबंध पैकेज के तहत बरकरार रखी गई है। गौरतलब है कि यूराल क्रूड का इतनी ऊँची कीमत पर कारोबार यह दर्शाता है कि पश्चिमी प्रतिबंध वास्तविक रूसी निर्यात आय को सीमित करने में व्यापक रूप से विफल रहे हैं।

ट्रंप का कार्यकारी आदेश — भारत और चीन को राहत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश जारी कर रूसी तेल निर्यात से जुड़े कई प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट दे दी, जो अगले ही दिन लागू होने वाले थे। ट्रंप ने इस निर्णय को अमेरिका के 'राष्ट्रीय हित' में बताया। CREA के विश्लेषण के अनुसार, इस आदेश से भारत और चीन को मौजूदा स्तर पर रूसी तेल आयात जारी रखने में सहूलियत मिलेगी।

होर्मुज संकट और रूस की अतिरिक्त आय

रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले तेल परिवहन में सितंबर 2026 में महीने-दर-महीने 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, फिर भी वैश्विक जीवाश्म ईंधन की कीमतें ऊँची बनी रहीं। CREA के अनुमान के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद के छह महीनों में ऊँची कीमतों के कारण रूस की समुद्री मार्ग से होने वाली निर्यात आय में लगभग $35.9 अरब (करीब €31 अरब) की अतिरिक्त बढ़ोतरी हुई है।

रूस का निर्यात: चुनिंदा बाज़ारों पर निर्भरता

CREA की रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि रूस का जीवाश्म ईंधन निर्यात अभी भी कुछ प्रमुख खरीदारों पर अत्यधिक निर्भर है। चीन कच्चे तेल और कोयले का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है; तुर्किये तेल उत्पादों की सबसे बड़ी खरीद कर रहा है; जबकि यूरोपीय संघ तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और पाइपलाइन गैस का सबसे बड़ा आयातक बना हुआ है। यह केंद्रीकरण मॉस्को के लिए दीर्घकालिक ऊर्जा कूटनीति में एक संरचनात्मक कमज़ोरी भी बनती जा रही है। आने वाले महीनों में ट्रंप के कार्यकारी आदेश के प्रभाव और पश्चिम एशिया में तनाव के रुख पर रूसी तेल प्रवाह की दिशा काफी हद तक निर्भर रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन €4.1 अरब की खरीद बताती है कि यह 'कटौती' मूल्य-संचालित है, नीति-संचालित नहीं। असली सवाल यह है कि जब कीमतें स्थिर हों, तो क्या भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता घटाएगा — या यह एक सुविधाजनक रिश्ता बना रहेगा जिसे 'राष्ट्रीय हित' की आड़ में जारी रखा जाता रहेगा?
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सितंबर 2026 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात कितना घटा?
CREA की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात 13 प्रतिशत घटा और यह अप्रैल 2026 के बाद का सबसे निचला स्तर रहा। यह लगातार दूसरा महीना था जब रूसी कच्चे तेल की खरीद में कमी आई।
यूराल क्रूड की कीमत इतनी ऊँची क्यों है, जबकि EU ने मूल्य सीमा लगाई हुई है?
EU और ब्रिटेन ने 1 फरवरी 2026 से यूराल क्रूड पर $44.1 प्रति बैरल की मूल्य सीमा लागू की है, लेकिन सितंबर में यूराल की औसत कीमत $90.7 प्रति बैरल रही — इस सीमा से दोगुनी से भी अधिक। पश्चिम एशिया संकट से उपजे आपूर्ति व्यवधान और होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव ने वैश्विक कीमतें ऊँची रखीं, जिससे यह सीमा व्यवहार में अप्रभावी रही।
ट्रंप के कार्यकारी आदेश से भारत को क्या फ़ायदा होगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल निर्यात से जुड़े कई प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट देने वाला कार्यकारी आदेश जारी किया, जो अगले दिन लागू होने वाले थे। इससे भारत और चीन को मौजूदा स्तर पर रूसी तेल आयात जारी रखने में कानूनी और व्यावसायिक राहत मिलेगी।
भारत की कौन-सी रिफाइनरियाँ सबसे अधिक प्रभावित हुईं?
CREA रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का आयात 27 प्रतिशत घटा — जो सबसे बड़ी गिरावट है। IOC की पारादीप रिफाइनरी में 21 प्रतिशत और नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी में 8 प्रतिशत की कमी आई।
पश्चिम एशिया संकट का वैश्विक तेल बाज़ार पर क्या असर पड़ा है?
अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष के कारण लाल सागर व्यापार मार्ग और होर्मुज जलडमरूमध्य दोनों प्रभावित हुए, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा और कीमतें ऊँची रहीं। CREA के अनुसार, इस संघर्ष के बाद के छह महीनों में रूस की समुद्री निर्यात आय में लगभग $35.9 अरब की अतिरिक्त वृद्धि हुई।
राष्ट्र प्रेस
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