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स्टार्टअप इंडिया से 2.5 लाख से अधिक स्टार्टअप्स मान्यता प्राप्त, 25.42 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित

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स्टार्टअप इंडिया से 2.5 लाख से अधिक स्टार्टअप्स मान्यता प्राप्त, 25.42 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित

सारांश

स्टार्टअप इंडिया पहल ने एक दशक से भी कम समय में 770 से अधिक जिलों तक पहुँच बनाई है — 2.5 लाख से ज्यादा मान्यता प्राप्त उद्यम, 25.42 लाख रोजगार और ₹68,000 करोड़ से अधिक के सरकारी ऑर्डर। एंजेल टैक्स हटाने और 900 कानूनी प्रावधानों को अपराध-मुक्त करने जैसे सुधारों ने इस पारिस्थितिकी तंत्र को नया आकार दिया है।

मुख्य बातें

DPIIT के अनुसार स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत देश के 770 से अधिक जिलों में 2.5 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स को मान्यता दी जा चुकी है।
इन स्टार्टअप्स ने मिलकर 25.42 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन किया है।
लगभग 52% मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स गैर-मेट्रो शहरों से हैं; 48% में कम से कम एक महिला निदेशक शामिल हैं।
फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स के तहत AIF को ₹12,600 करोड़ से अधिक की प्रतिबद्धता; लगभग 1,500 स्टार्टअप्स में ₹28,000 करोड़ से अधिक का निवेश।
GeM पर पंजीकृत स्टार्टअप्स की संख्या 2021 में 8,000 से कम से बढ़कर अब 43,000 से अधिक ; ₹68,000 करोड़ से ज्यादा के सरकारी ऑर्डर प्राप्त।
जन विश्वास अधिनियम के तहत केंद्रीय कानूनों के लगभग 900 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया; 48,000 अनुपालन आवश्यकताएँ कम की गईं।

केंद्र सरकार ने 27 अक्टूबर 2026 को बताया कि स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत देश में अब तक 2.5 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को आधिकारिक मान्यता मिल चुकी है और इन उद्यमों ने मिलकर 25.42 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन किया है। सरकार के अनुसार, कारोबारी माहौल को अनुमति-आधारित व्यवस्था से भरोसा-आधारित ढाँचे में बदलने के लिए उठाए गए नियामकीय सुधारों ने इस विस्तार को नई रफ्तार दी है।

स्टार्टअप इंडिया का विस्तार और भौगोलिक पहुँच

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के आँकड़ों के अनुसार, मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स अब देश के 770 से अधिक जिलों और 56 क्षेत्रों में फैले हुए हैं। गौरतलब है कि इनमें से लगभग 52 प्रतिशत स्टार्टअप्स गैर-मेट्रो शहरों से हैं, जो दर्शाता है कि उद्यमिता की संस्कृति अब महानगरों की सीमाओं को पार कर छोटे शहरों और कस्बों तक पहुँच चुकी है।

इसके अतिरिक्त, 48 प्रतिशत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक शामिल है — एक आँकड़ा जो महिला उद्यमिता में आ रहे बदलाव का स्पष्ट संकेत देता है।

सरकारी वित्तपोषण योजनाओं का दायरा

स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम के अंतर्गत 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 244 इन्क्यूबेटरों के माध्यम से 4,100 से अधिक स्टार्टअप्स को ₹775 करोड़ से अधिक की सहायता स्वीकृत की गई है।

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) द्वारा संचालित फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स के तहत वैकल्पिक निवेश फंडों (AIF) को ₹12,600 करोड़ से अधिक की प्रतिबद्धता दी गई है। इन फंडों ने आगे चलकर लगभग 1,500 स्टार्टअप्स में ₹28,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया है।

क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स के अंतर्गत 500 से अधिक ऋण मामलों को समर्थन मिला है, जिनकी कुल राशि ₹1,662 करोड़ से अधिक है। इन स्टार्टअप्स में 41,000 से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। गारंटी कवर की सीमा ₹10 करोड़ से बढ़ाकर ₹20 करोड़ कर दी गई है और प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए वार्षिक शुल्क में भी कमी की गई है।

नियामकीय सुधार और कर राहत

DPIIT के अनुसार, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए कई अहम कर और नियामकीय सुधार किए गए हैं। इनमें एंजेल टैक्स की समाप्ति, सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध शेयरों पर पूंजीगत लाभ कर व्यवस्था का सरलीकरण तथा बीमा कंपनियों और पेंशन फंड जैसे संस्थागत निवेशकों को AIF में निवेश की अनुमति देना शामिल है। इसके अलावा 4,400 से अधिक स्टार्टअप्स को आयकर अधिनियम की धारा 80-IAC के तहत पात्रता प्रमाणन भी दिया गया है।

केंद्र और राज्यों में लगभग 48,000 अनुपालन आवश्यकताएँ कम की गई हैं, जबकि 22,000 से अधिक अनुपालन प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। जन विश्वास अधिनियम के तहत केंद्रीय कानूनों के लगभग 900 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाया गया है।

सरकारी खरीद में स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर पंजीकृत स्टार्टअप्स की संख्या 2021 में 8,000 से कम थी, जो अब बढ़कर 43,000 से अधिक हो गई है। सरकारी खरीदारों द्वारा इन स्टार्टअप्स को ₹68,000 करोड़ से अधिक के ऑर्डर दिए जा चुके हैं — यह आँकड़ा दर्शाता है कि सरकारी खरीद अब स्टार्टअप विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, नियामकीय सुधारों की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और डिजिटल सेवाओं तथा उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नए उद्यमों को प्रोत्साहित करना सरकार की प्राथमिकता बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'प्रत्यक्ष रोजगार' की परिभाषा और इसकी जाँच-पड़ताल की पद्धति सार्वजनिक नहीं की गई है — यह एक अहम खामी है। गौरतलब है कि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में बड़े पैमाने पर छँटनी और बंद होने की दर भी ऊँची रहती है, जो शुद्ध रोजगार के आँकड़े को सकल सृजन से काफी कम कर सकती है। GeM पर ₹68,000 करोड़ के ऑर्डर और गैर-मेट्रो क्षेत्रों में 52% उपस्थिति जैसे तथ्य नीतिगत सफलता के वास्तविक संकेतक हैं, लेकिन एंजेल टैक्स हटाने जैसे सुधारों का वास्तविक असर तब ही मापा जा सकेगा जब निवेश प्रवाह के दीर्घकालिक आँकड़े सामने आएँ।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत कितने स्टार्टअप्स को मान्यता मिली है?
DPIIT के आँकड़ों के अनुसार, स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत अब तक देश के 770 से अधिक जिलों और 56 क्षेत्रों में 2.5 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स को आधिकारिक मान्यता दी जा चुकी है। इन स्टार्टअप्स ने मिलकर 25.42 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं।
स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम क्या है और इससे कितने स्टार्टअप्स को फायदा मिला?
स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम नए उद्यमों को शुरुआती पूँजी उपलब्ध कराने की सरकारी योजना है। अब तक 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 244 इन्क्यूबेटरों के माध्यम से 4,100 से अधिक स्टार्टअप्स के लिए ₹775 करोड़ से अधिक की सहायता स्वीकृत की जा चुकी है।
क्या भारत में स्टार्टअप्स सरकारी खरीद में भाग ले सकते हैं?
हाँ, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर पंजीकृत स्टार्टअप्स की संख्या 2021 में 8,000 से कम थी, जो अब बढ़कर 43,000 से अधिक हो गई है। सरकारी खरीदारों द्वारा इन स्टार्टअप्स को ₹68,000 करोड़ से अधिक के ऑर्डर दिए जा चुके हैं।
स्टार्टअप्स के लिए एंजेल टैक्स खत्म होने का क्या मतलब है?
एंजेल टैक्स की समाप्ति का अर्थ है कि अब स्टार्टअप्स को अपने उचित बाजार मूल्य से अधिक पर प्राप्त निवेश पर कर नहीं देना होगा। यह बदलाव निवेशकों और संस्थापकों दोनों के लिए अनुकूल कारोबारी माहौल बनाता है और घरेलू तथा विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करता है।
स्टार्टअप इंडिया पहल से महिला उद्यमिता पर क्या असर पड़ा है?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, मान्यता प्राप्त 48 प्रतिशत स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक शामिल हैं। यह आँकड़ा महिला उद्यमिता में बढ़ती भागीदारी का संकेत देता है, हालाँकि महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स की अलग संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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