भारतीय स्टार्टअप्स में प्रत्यक्ष रोजगार 36% उछला, 23.64 लाख नौकरियों तक पहुँचा
सारांश
मुख्य बातें
भारत के डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स ने प्रत्यक्ष रोजगार सृजन में ऐतिहासिक छलांग लगाई है — आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, इन स्टार्टअप्स में प्रत्यक्ष रोजगार 23.64 लाख तक पहुँच गया है, जो साल-दर-साल 36.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। दिसंबर 2025 तक उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की कुल संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है, जिससे भारत वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम में शीर्ष देशों की पंक्ति में शामिल हो गया है।
रोजगार और समावेश के आँकड़े
आधिकारिक बयान के अनुसार, मान्यता प्राप्त सभी स्टार्टअप्स में से लगभग 48 प्रतिशत में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार है। यह आँकड़ा भारत के नवाचार-आधारित विकास की समावेशी प्रकृति को रेखांकित करता है और दर्शाता है कि स्टार्टअप क्षेत्र में लैंगिक भागीदारी धीरे-धीरे मज़बूत हो रही है। गौरतलब है कि यह अनुपात वैश्विक औसत से अधिक है।
एक वर्ष में रिकॉर्ड मान्यता
वित्त वर्ष 2025-26 में अकेले 55,200 से अधिक नई संस्थाओं को डीपीआईआईटी की मान्यता मिली — जो इस कार्यक्रम की शुरुआत के बाद किसी एक वित्त वर्ष में सर्वाधिक वृद्धि है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि देश के नवाचार तंत्र ने अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर स्टार्टअप फंडिंग में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की छलांग
आधिकारिक बयान के अनुसार, ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 2015 में 81वें स्थान पर थी, जो 2025 में सुधरकर 38वें स्थान पर आ गई है। 2.23 लाख मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के साथ भारत नवाचार-आधारित विकास को नई गति दे रहा है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह उपलब्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह पहल अब एआई, सेमीकंडक्टर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स के बुनियादी ढाँचे के निर्माण में भी योगदान दे रही है।
यूपीआई और डिजिटल भुगतान का वैश्विक दबदबा
अप्रैल 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने भारत की वित्तीय व्यवस्था में क्रांति लाने के 10 वर्ष पूरे किए। वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई पर 24,162 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए। आज यूपीआई भारत के 81 प्रतिशत डिजिटल भुगतान को संचालित करता है और दुनिया के लगभग 49 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन में इसकी हिस्सेदारी है। भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) अब 23 देशों ने सहयोग समझौतों के ज़रिये अपनाया है।
डिजिटल बुनियादी ढाँचे का विस्तार
मार्च 2026 तक देश में ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं की संख्या 106.58 करोड़ तक पहुँच गई। भारतनेट परियोजना के तहत 2.18 लाख ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ा जा चुका है। भारत का 5जी नेटवर्क अब 99.9 प्रतिशत जिलों तक पहुँच चुका है और इसके लिए 4.74 लाख टावर स्थापित किए जा चुके हैं। फरवरी 2026 में गुवाहाटी में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय डेटा केंद्र का शुभारंभ किया गया, जिससे क्षेत्र की डेटा संप्रभुता और मजबूत हुई। ये आँकड़े मिलकर यह संकेत देते हैं कि भारत का डिजिटल रूपांतरण अब केवल शहरी केंद्रों तक सीमित नहीं रहा।