13 अगस्त 2026
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हुगली नदी में कंटेनर जहाज की टक्कर: डायमंड हार्बर के नूरपुर फेरी घाट के पास किनारे से भिड़ा एमवी नवाता भूम

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हुगली नदी में कंटेनर जहाज की टक्कर: डायमंड हार्बर के नूरपुर फेरी घाट के पास किनारे से भिड़ा एमवी नवाता भूम

सारांश

हुगली नदी के तीखे मोड़ पर स्टीयरिंग जाम होने से 147 मीटर लंबा कंटेनर जहाज एमवी नवाता भूम डायमंड हार्बर के नूरपुर फेरी घाट के पास किनारे से टकरा गया। कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन यह घटना हुगली की नौवहन चुनौतियों को एक बार फिर उजागर करती है।

मुख्य बातें

12 अगस्त 2026 को एमवी नवाता भूम कंटेनर जहाज डायमंड हार्बर के नूरपुर फेरी घाट के पास हुगली नदी के किनारे से टकराया।
जहाज मलेशिया के पोर्ट क्लैंग से कोलकाता बंदरगाह की ओर जा रहा था; लंबाई 147.82 मीटर , डेडवेट टनेज 13,852 टन ।
दुर्घटना का कारण नदी का तेज बहाव और संभावित स्टीयरिंग गियर खराबी बताया जा रहा है।
कोई हताहत नहीं; जहाज का मुख्य ढाँचा सुरक्षित है।
टग नावें भेजी गई हैं; अगली ज्वार पर जहाज को बाहर निकाले जाने की योजना।
SMPA अधिकारी दुर्घटना की जाँच कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर के निकट हुगली नदी में 12 अगस्त 2026 को एक बड़ी नौवहन दुर्घटना उस समय हुई जब सिंगापुर के झंडे वाला कंटेनर जहाज एमवी नवाता भूम नदी के तेज बहाव और संभावित स्टीयरिंग गियर खराबी के चलते नूरपुर फेरी घाट के पास किनारे से जा टकराया। अधिकारियों के अनुसार इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ, हालाँकि नदी का किनारा क्षतिग्रस्त हो गया और स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई।

दुर्घटना का घटनाक्रम

जहाज मलेशिया के पोर्ट क्लैंग से कंटेनर लेकर कोलकाता बंदरगाह की ओर आ रहा था। कोलकाता से लगभग 50 किलोमीटर दक्षिण में डायमंड हार्बर के पास नदी के एक तीखे मोड़ पर मुड़ते समय जहाज का स्टीयरिंग गियर जाम हो गया और वह किनारे से टकरा गया। अधिकारियों ने बताया कि स्टीयरिंग में खराबी का अंदेशा होते ही जहाज के मास्टर ने लगातार हॉर्न बजाकर किनारे पर मौजूद लोगों को सचेत किया।

सौभाग्यवश, टक्कर के समय आसपास कोई फेरी नहीं थी — अधिकारियों ने माना कि यदि उस समय कोई फेरी होती तो वह कुचली जा सकती थी।

जहाज का विवरण

एमवी नवाता भूम की लंबाई 147.82 मीटर है और इसकी डेडवेट टनेज 13,852 टन है। यह सिंगापुर के ध्वज के तहत पंजीकृत है। जहाज पर सवार श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट अथॉरिटी (SMPA) के पायलट ने टक्कर के तुरंत बाद बंदरगाह प्राधिकरण से संपर्क किया। SMPA के पायलट हुगली में चलने वाले सभी बड़े जहाजों पर सवार होकर उन्हें संकरे नेविगेशन चैनल से सुरक्षित निकालने में सहायता करते हैं।

हुगली नदी की चुनौतियाँ

हुगली नदी अपने तीखे मोड़ों, उथले पानी और रेत के टीलों के लिए जानी जाती है, जो बड़े जहाजों के लिए नेविगेशन को विशेष रूप से जटिल बनाते हैं। अधिकारियों के अनुसार, स्टीयरिंग गियर की यह समस्या अक्सर सिंगल-स्क्रू वाले जहाजों में देखी जाती है — विशेष रूप से तब, जब जहाज किसी मोड़ से निकलकर सीधा होने की कोशिश करता है। इस घटना में तेज जलधारा ने भी दुर्घटना में भूमिका निभाई होगी, ऐसा अधिकारियों का कहना है। गौरतलब है कि पूर्वी मिदनापुर जिले के जियोनखाली के पास इससे पहले भी इसी प्रकार की दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं।

बचाव एवं राहत कार्य

सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल पर टग नावें भेजी गई हैं और जहाज को किनारे से हटाने के लिए अगली ज्वार का इंतज़ार किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जहाज का मुख्य ढाँचा सुरक्षित है और टग की सहायता से इसे कोलकाता बंदरगाह तक सुरक्षित रूप से पहुँचाया जा सकता है।

आगे की कार्रवाई

SMPA अधिकारी दुर्घटना के कारणों की जाँच कर रहे हैं। स्टीयरिंग गियर की तकनीकी जाँच और जहाज के लॉग की समीक्षा अपेक्षित है। यह घटना हुगली नदी में नौवहन सुरक्षा प्रोटोकॉल और जहाजों की तकनीकी जाँच की प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो परिणाम बहुत अलग होते। असली सवाल यह है कि नदी के इन जटिल मोड़ों पर सिंगल-स्क्रू जहाजों के लिए विशेष प्रोटोकॉल कब लागू होंगे।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमवी नवाता भूम जहाज दुर्घटना क्या है?
12 अगस्त 2026 को सिंगापुर के झंडे वाला कंटेनर जहाज एमवी नवाता भूम हुगली नदी में डायमंड हार्बर के नूरपुर फेरी घाट के पास किनारे से टकरा गया। जहाज मलेशिया से कोलकाता बंदरगाह की ओर जा रहा था और नदी के मोड़ पर स्टीयरिंग गियर जाम होने से यह दुर्घटना हुई।
क्या इस दुर्घटना में कोई हताहत हुआ?
अधिकारियों के अनुसार इस दुर्घटना में कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ। हालाँकि नदी का किनारा क्षतिग्रस्त हुआ और स्थानीय लोगों में दहशत फैली, क्योंकि टक्कर वाली जगह एक फेरी घाट के निकट थी।
जहाज को किनारे से कैसे हटाया जाएगा?
सूत्रों के अनुसार घटनास्थल पर टग नावें भेजी गई हैं और जहाज को किनारे से हटाने के लिए अगली ज्वार का इंतज़ार किया जाएगा। जहाज का मुख्य ढाँचा सुरक्षित बताया गया है और टग की सहायता से इसे कोलकाता तक पहुँचाया जा सकता है।
हुगली नदी में जहाज चलाना इतना कठिन क्यों है?
हुगली नदी अपने तीखे मोड़ों, उथले पानी और रेत के टीलों के लिए जानी जाती है। बड़े जहाजों को संकरे नेविगेशन चैनल का सावधानी से पालन करना पड़ता है और SMPA के पायलट इन जहाजों पर सवार होकर उन्हें सुरक्षित मार्गदर्शन देते हैं।
क्या हुगली नदी में पहले भी ऐसी दुर्घटनाएँ हुई हैं?
हाँ, पूर्वी मिदनापुर जिले के जियोनखाली के पास इससे पहले भी इसी प्रकार की नौवहन दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सिंगल-स्क्रू जहाजों में तीखे मोड़ों पर स्टीयरिंग गियर जाम होने की समस्या आम है।
राष्ट्र प्रेस
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