यूएनजीए 2026: जयशंकर की मेक्सिको से मुलाकात, मिस्री ने अफगानिस्तान और WFP पर की अहम चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों ने 27 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के हाई-लेवल वीक के दौरान मेक्सिको, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) और अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूनामा) के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। ये तीनों बैठकें द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर भारत की व्यापक कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती हैं।
भारत-मेक्सिको: तकनीक और स्वास्थ्य में साझेदारी पर चर्चा
विदेश मंत्री जयशंकर ने मेक्सिको के विदेश मंत्री रॉबर्टो वेलास्को अल्वारेज से मुलाकात की। मेक्सिकी पक्ष की ओर से बताया गया कि दोनों विदेश मंत्रियों ने प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य समेत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मज़बूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
गौरतलब है कि भारत और मेक्सिको के बीच पहले से ही व्यापार, दवा उद्योग, ऑटोमोबाइल, विज्ञान और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग की ठोस नींव मौजूद है। जयशंकर ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिये इसकी जानकारी साझा की।
WFP के साथ बातचीत: वैश्विक मानवीय संकट पर फोकस
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) के कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ से अलग से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों ने बदलते वैश्विक हालात और मानवीय सहायता प्रयासों के सामने मौजूद चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
यह बातचीत ऐसे समय में आई है जब दुनिया के कई हिस्सों में एक साथ उभरते संकटों के चलते मानवीय सहायता एजेंसियों पर दबाव तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत और WFP की साझेदारी अब सीधी खाद्य सहायता से आगे बढ़कर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, पोषण कार्यक्रमों और तकनीकी सहयोग तक विस्तृत हो चुकी है।
अफगानिस्तान: मानवीय ज़रूरतें सर्वोच्च प्राथमिकता
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि और यूनामा प्रमुख रबाब फातिमा से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय ने बताया कि बैठक में अफगानिस्तान की जनता की मानवीय ज़रूरतों को सतत प्राथमिकता देने पर विशेष बल दिया गया।
भारत की ओर से यूनामा की भूमिका की सराहना की गई और लगातार सहयोग का आश्वासन दिया गया। उल्लेखनीय है कि बैठक से जुड़ी जारी जानकारी में तालिबान सरकार को औपचारिक राजनयिक मान्यता देने का कोई उल्लेख नहीं था और न ही अफगानिस्तान पर भारत की मौजूदा नीति में किसी बदलाव की घोषणा की गई।
यूएनजीए में भारत की बहुआयामी कूटनीति
इन तीनों बैठकों को मिलाकर देखें तो यह ऐसे समय में आया है जब भारत ग्लोबल साउथ की आवाज़ के रूप में अपनी भूमिका को और पुख्ता करने में जुटा है। द्विपक्षीय स्तर पर मेक्सिको के साथ साझेदारी, बहुपक्षीय स्तर पर WFP के साथ खाद्य सुरक्षा और मानवीय सहायता पर संवाद, तथा क्षेत्रीय स्थिरता के मद्देनज़र अफगानिस्तान पर केंद्रित चर्चा — तीनों मिलकर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत की सक्रिय और संतुलित भूमिका को रेखांकित करते हैं।
आगे के हफ्तों में इन बैठकों में हुई चर्चाओं के नतीजे संबंधित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय ढाँचों में किस रूप में आकार लेते हैं, यह देखना अहम होगा।