देवास जहरीली शराब कांड: जीतू पटवारी का आरोप — 20 मौतें, माफिया चला रहे सरकार
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 27 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर देवास में कथित जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में शराब माफिया को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया। पटवारी ने दावा किया कि इस घटना में 20 से अधिक लोगों की जान गई है और प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की।
मुख्य आरोप और बयान
पत्रकारों से बातचीत में जीतू पटवारी ने कहा, 'मध्य प्रदेश में सरकारी सामूहिक हत्याकांड का सिलसिला रुक नहीं रहा है।' उन्होंने मुरैना और सागर में पहले हुई जहरीली शराब त्रासदियों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने इन घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया। उनके अनुसार, सागर में जहरीली शराब से 100 से अधिक परिवारों के सदस्यों की मृत्यु हुई थी, और उस मामले की जांच के लिए बैठाए गए आयोग का कोई नतीजा सामने नहीं आया।
प्रशासन पर सवाल
पटवारी ने देवास के कलेक्टर का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने खुद उनसे बात की, जिसमें कलेक्टर ने कथित तौर पर यह बताया कि 'कोई जहर नहीं है।' पटवारी ने सवाल उठाया कि यदि शराब जहरीली नहीं थी, तो उसे बेचने वाले कुछ लोगों को गिरफ्तार क्यों किया गया? उन्होंने इसे प्रशासनिक विरोधाभास करार दिया और आरोप लगाया कि 'शराब माफिया पाँचवीं मंजिल से सरकार चला रहे हैं।'
केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र
पटवारी ने बताया कि देवास की घटना को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री को भी पत्र लिखा गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सार्वजनिक अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार को अवैध जहरीली शराब के मामले में एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करनी चाहिए और शराब माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
कांग्रेस का आगामी विरोध कदम
मध्य प्रदेश कांग्रेस (MPCC) ने ऐलान किया कि पार्टी देवास जाएगी और पीड़ित परिजनों को साथ लेकर कलेक्टर से सवाल-जवाब करेगी। पटवारी ने स्पष्ट चेतावनी दी, 'अगर सरकार दृढ़ता नहीं दिखाती, तो हम यही मानेंगे कि माफिया सरकार चला रहे हैं।' उल्लेखनीय है कि यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में जहरीली शराब की घटनाएँ बार-बार सुर्खियाँ बटोर रही हैं, और विपक्ष सरकार पर सुशासन विफलता का आरोप लगाता रहा है।
सरकार की ओर से प्रतिक्रिया
फिलहाल मोहन यादव सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन के स्तर पर जिला कलेक्टर के बयान पहले ही विवाद का केंद्र बन चुके हैं। अगले कुछ दिनों में सरकार की आधिकारिक स्थिति और जाँच की दिशा यह तय करेगी कि यह मामला राजनीतिक उथल-पुथल और कानूनी कार्रवाई — दोनों में किस ओर जाता है।