देवास में 20 दिनों में 13 मौतें: अरुण यादव का मोहन सरकार पर हमला, 'शराब माफिया पर कब होगी कार्रवाई?'
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के देवास जिले में 27 सितंबर से 16 अक्टूबर 2026 के बीच 20 दिनों में 13 लोगों की मौत का मामला सामने आया है, जिसे लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर तीखा हमला बोला है। परिजनों का आरोप है कि मृतकों ने शराब पी थी, जिसके बाद उल्टी, चक्कर और आँखों की रोशनी जाने की शिकायत हुई और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। जिला प्रशासन इन आरोपों को खारिज करते हुए मौतों के कारण अलग-अलग बता रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देवास जिले के चंदाना गांव में 9 और बिंजाना गांव में 4 लोगों की मौत हुई है — कुल मिलाकर 13 मौतें। पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों का दावा है कि इन सभी की मृत्यु शराब पीने के बाद हुई। मृतकों में अधिकांश मजदूर वर्ग से बताए जा रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब सागर जिले के बंडा में पहले से ही कथित जहरीली शराब से 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। देवास में इसी तरह के आरोप उठने के बाद मध्य प्रदेश में शराब की अवैध आपूर्ति का मुद्दा एक बार फिर से राजनीतिक केंद्र में आ गया है।
अरुण यादव का सरकार पर हमला
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा, 'मध्यप्रदेश में जहरीली शराब से गरीबों की मौत का सिलसिला कब रुकेगा? सागर के बाद देवास में 13 मौतें, शराब पीकर पहले आँखों की रोशनी गई, फिर जिंदगी।'
यादव ने आगे सवाल उठाया, 'यह सरकार शराब माफिया चला रहे हैं या सरकार ही शराब माफिया के इशारे पर चल रही है? हर मौत के बाद सरकार की खामोशी क्यों?' उन्होंने यह भी पूछा कि राज्य में 'बड़े मगरमच्छों' पर कार्रवाई कब होगी।
प्रशासन का रुख
जिला प्रशासन ने परिजनों और ग्रामीणों के आरोपों को नकारा है। अधिकारियों के अनुसार, मौतों के कारण अलग-अलग हैं और इन्हें सीधे जहरीली शराब से जोड़ना उचित नहीं है। हालांकि, प्रशासन ने अब तक कोई आधिकारिक जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है।
गौरतलब है कि परिजनों का विवरण — उल्टी, चक्कर और दृष्टि हानि — मेथनॉल विषाक्तता के क्लासिक लक्षणों से मेल खाता है, जो अवैध शराब में पाया जाता है। इस पहलू पर स्वतंत्र चिकित्सा जाँच की माँग अभी तक सामने नहीं आई है।
कांग्रेस का राजनीतिक हमला
कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर मोहन यादव सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पार्टी ने सागर और देवास की घटनाओं को एक ही कड़ी में जोड़ते हुए राज्य में शराब माफिया के खिलाफ ठोस कार्रवाई की माँग की है। यह मध्य प्रदेश में विपक्षी दल के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
क्या होगा आगे
सामाजिक दबाव और राजनीतिक विरोध के बीच यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस मामले में स्वतंत्र जाँच के आदेश देती है या नहीं। मृतकों के परिजनों को न्याय और मुआवजे की प्रतीक्षा है, जबकि दोनों गांवों में भय और अनिश्चितता का माहौल है। यदि जाँच में जहरीली शराब की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय करने की माँग और तेज होगी।