देवास मौत मामला: पोस्टमार्टम में मिलावटी शराब नहीं — MP के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने 25 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि देवास जिले के चंदना और बिजाना गाँवों में हुई मौतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिलावटी या नकली शराब का कोई अंश नहीं पाया गया है। उन्होंने कहा कि कुल 10 मौतों में से 8 प्राकृतिक थीं, जबकि शेष 2 मामलों की रिपोर्ट में भी जहरीली शराब का कोई प्रमाण सामने नहीं आया।
मुख्य घटनाक्रम
पिछले एक महीने में देवास जिले के चंदना और बिजाना गाँवों में लगभग 10 संदिग्ध मौतें हुईं, जिसके बाद मिलावटी शराब की आशंका को लेकर हंगामा मच गया। ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया कि शराब पीने के बाद कई लोगों को धुंधली दृष्टि, पूर्ण अंधापन, बेचैनी और उल्टी जैसे लक्षण महसूस हुए — जो कथित तौर पर मेथनॉल विषाक्तता के संकेत हो सकते हैं।
उप-मंडल मजिस्ट्रेट अभिषेक शर्मा ने चंदना गाँव में नकली शराब से 15-20 मौतों के दावों को 'भ्रामक और निराधार' बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जाँच में अब तक ऐसा कोई संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
विपक्ष की माँगें
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता अरुण यादव ने माँग की कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए। उन्होंने दोषी अधिकारियों के तत्काल निलंबन और अवैध शराब व्यापार में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग भी की।
यादव ने आरोप लगाया कि रविवार की सुबह तक प्रशासन मौतों की खबरों को झुठला रहा था। उन्होंने कहा, 'प्रभावित परिवारों से मिलने के बाद जब हम कलेक्ट्रेट पहुँचे, तो प्रशासन ने दावा किया कि ये प्राकृतिक मौतें हैं। अब जाँच दल का गठन होना ही इस बात का प्रमाण है कि देवास प्रशासन सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रहा था।' उन्होंने यह भी कहा कि केवल जाँच दल गठित करना पर्याप्त नहीं होगा।
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और अरुण यादव ने शनिवार को प्रभावित गाँवों का दौरा कर परिवारों से मुलाकात की और मामले की गहन जाँच की माँग की।
प्रशासन का रुख
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौतों का सटीक कारण फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) और आंतरिक अंगों की विस्तृत जाँच रिपोर्ट मिलने के बाद ही तय किया जा सकेगा। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पी गई शराब जहरीली थी या नहीं, इसकी पुष्टि तकनीकी रिपोर्ट आने पर ही होगी। FSL रिपोर्ट के आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपुष्ट जानकारी न फैलाने का आग्रह किया है और आश्वस्त किया है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उचित कदम उठाए जाएंगे।
आम जनता पर असर
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में अवैध शराब से जुड़ी घटनाएँ सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। गाँव वाले विस्तृत जाँच की माँग कर रहे हैं, क्योंकि वे प्रशासनिक स्पष्टीकरणों से संतुष्ट नहीं हैं।
क्या होगा आगे
सरकार और विपक्ष दोनों की नजरें अब FSL रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद में निर्णायक भूमिका निभाएगी। यदि रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होती है, तो राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर बड़ी हलचल की संभावना है।