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देवास मौत मामला: पोस्टमार्टम में मिलावटी शराब नहीं — MP के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा

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देवास मौत मामला: पोस्टमार्टम में मिलावटी शराब नहीं — MP के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा

सारांश

देवास में 10 संदिग्ध मौतों के बाद मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मिलावटी शराब के आरोपों को खारिज किया। विपक्षी कांग्रेस नेता ₹1 करोड़ मुआवजे और दोषी अधिकारियों के निलंबन की माँग कर रहे हैं, जबकि FSL रिपोर्ट का इंतजार है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश के देवास जिले में पिछले एक महीने में 10 संदिग्ध मौतें हुईं — चंदना और बिजाना गाँवों में।
डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने कहा कि 10 में से 8 मौतें प्राकृतिक थीं; शेष 2 की पोस्टमार्टम में भी मिलावटी शराब का कोई अंश नहीं।
ग्रामीणों ने शराब पीने के बाद धुंधली दृष्टि , अंधापन , उल्टी जैसे लक्षणों का हवाला दिया।
कांग्रेस नेता अरुण यादव ने प्रत्येक मृतक परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजे और दोषी अधिकारियों के निलंबन की माँग की।
FSL रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों का अंतिम कारण तय होगा और आगे की कार्रवाई होगी।

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने 25 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि देवास जिले के चंदना और बिजाना गाँवों में हुई मौतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिलावटी या नकली शराब का कोई अंश नहीं पाया गया है। उन्होंने कहा कि कुल 10 मौतों में से 8 प्राकृतिक थीं, जबकि शेष 2 मामलों की रिपोर्ट में भी जहरीली शराब का कोई प्रमाण सामने नहीं आया।

मुख्य घटनाक्रम

पिछले एक महीने में देवास जिले के चंदना और बिजाना गाँवों में लगभग 10 संदिग्ध मौतें हुईं, जिसके बाद मिलावटी शराब की आशंका को लेकर हंगामा मच गया। ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया कि शराब पीने के बाद कई लोगों को धुंधली दृष्टि, पूर्ण अंधापन, बेचैनी और उल्टी जैसे लक्षण महसूस हुए — जो कथित तौर पर मेथनॉल विषाक्तता के संकेत हो सकते हैं।

उप-मंडल मजिस्ट्रेट अभिषेक शर्मा ने चंदना गाँव में नकली शराब से 15-20 मौतों के दावों को 'भ्रामक और निराधार' बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जाँच में अब तक ऐसा कोई संबंध स्थापित नहीं हुआ है।

विपक्ष की माँगें

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता अरुण यादव ने माँग की कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए। उन्होंने दोषी अधिकारियों के तत्काल निलंबन और अवैध शराब व्यापार में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग भी की।

यादव ने आरोप लगाया कि रविवार की सुबह तक प्रशासन मौतों की खबरों को झुठला रहा था। उन्होंने कहा, 'प्रभावित परिवारों से मिलने के बाद जब हम कलेक्ट्रेट पहुँचे, तो प्रशासन ने दावा किया कि ये प्राकृतिक मौतें हैं। अब जाँच दल का गठन होना ही इस बात का प्रमाण है कि देवास प्रशासन सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रहा था।' उन्होंने यह भी कहा कि केवल जाँच दल गठित करना पर्याप्त नहीं होगा।

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और अरुण यादव ने शनिवार को प्रभावित गाँवों का दौरा कर परिवारों से मुलाकात की और मामले की गहन जाँच की माँग की।

प्रशासन का रुख

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौतों का सटीक कारण फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) और आंतरिक अंगों की विस्तृत जाँच रिपोर्ट मिलने के बाद ही तय किया जा सकेगा। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पी गई शराब जहरीली थी या नहीं, इसकी पुष्टि तकनीकी रिपोर्ट आने पर ही होगी। FSL रिपोर्ट के आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपुष्ट जानकारी न फैलाने का आग्रह किया है और आश्वस्त किया है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उचित कदम उठाए जाएंगे।

आम जनता पर असर

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में अवैध शराब से जुड़ी घटनाएँ सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। गाँव वाले विस्तृत जाँच की माँग कर रहे हैं, क्योंकि वे प्रशासनिक स्पष्टीकरणों से संतुष्ट नहीं हैं।

क्या होगा आगे

सरकार और विपक्ष दोनों की नजरें अब FSL रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद में निर्णायक भूमिका निभाएगी। यदि रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होती है, तो राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर बड़ी हलचल की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि प्रशासन ने स्वयं माना है कि FSL और अंग-जाँच रिपोर्ट अभी आनी बाकी हैं — यानी पोस्टमार्टम का निष्कर्ष अंतिम नहीं है। ग्रामीणों के लक्षण — अंधापन, बेचैनी — मेथनॉल विषाक्तता के क्लासिक संकेत हैं, जिन्हें सतही पोस्टमार्टम में नजरअंदाज किया जा सकता है। यह पैटर्न नया नहीं है: मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में अतीत में हुई शराब-त्रासदियों में भी शुरुआती प्रशासनिक बयान 'प्राकृतिक मौत' से ही शुरू हुए थे। असली जवाबदेही FSL रिपोर्ट के बाद होगी — उससे पहले के दावे-प्रतिदावे राजनीतिक युद्ध के हिस्से से अधिक नहीं।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवास में कितनी मौतें हुईं और क्या कारण बताया गया है?
देवास जिले के चंदना और बिजाना गाँवों में पिछले एक महीने में कुल 10 संदिग्ध मौतें हुईं। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के अनुसार 8 मौतें प्राकृतिक थीं और शेष 2 की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मिलावटी शराब का कोई अंश नहीं पाया गया।
क्या देवास में मिलावटी शराब की पुष्टि हुई है?
अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिलावटी शराब की पुष्टि नहीं हुई है। हालाँकि, FSL और आंतरिक अंगों की विस्तृत जाँच रिपोर्ट अभी आनी बाकी है, जिसके बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।
कांग्रेस ने देवास मामले में क्या माँगें की हैं?
कांग्रेस नेता अरुण यादव ने प्रत्येक मृतक परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजा, दोषी अधिकारियों का तत्काल निलंबन और अवैध शराब व्यापार में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग की है। पार्टी का आरोप है कि प्रशासन ने शुरू में मौतों की खबरें दबाने की कोशिश की।
ग्रामीणों ने शराब पीने के बाद कौन-से लक्षण बताए?
मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों ने बताया कि शराब पीने के बाद धुंधली दृष्टि, पूर्ण अंधापन, बेचैनी और उल्टी जैसे लक्षण सामने आए। ये लक्षण कथित तौर पर मेथनॉल युक्त जहरीली शराब के सेवन से जुड़े हो सकते हैं, हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
देवास मामले में आगे क्या होगा?
प्रशासन ने FSL रिपोर्ट और आंतरिक अंगों की जाँच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। जाँच दल का गठन हो चुका है और वैज्ञानिक साक्ष्यों के सामने आने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
राष्ट्र प्रेस
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