देवास पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: 5 मौतों के बाद तीन अधिकारी निलंबित, लापरवाही पर गिरी गाज
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के देवास जिले की टोंकखुर्द तहसील के ग्राम टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और आगजनी की घटना में 5 लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पुलिस और राजस्व विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। 16 मई 2026 को जारी आदेश के अनुसार यह कार्रवाई फैक्ट्री निरीक्षण में गंभीर चूक और कर्तव्य के प्रति उदासीनता के आधार पर की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
दो दिन पूर्व ग्राम टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में अचानक विस्फोट हुआ, जिसके बाद भीषण आग फैल गई। इस हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हैं जिनका उपचार जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब विस्फोटक सामग्री से जुड़ी फैक्ट्रियों की निगरानी को लेकर प्रदेशभर में सवाल उठते रहे हैं।
किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत सोनकच्छ की अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) दीपा मांडे को निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई आयुक्त उज्जैन संभाग से प्राप्त प्रतिवेदन और पुलिस महानिदेशक की अनुशंसा के आधार पर की गई।
इसी क्रम में संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने टोंकखुर्द के एसडीएम संजीव सक्सेना और टप्पा चिडावद के नायब तहसीलदार रवि शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। तीनों अधिकारियों पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 तथा मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।
लापरवाही की प्रकृति
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारियों ने शासन स्तर से समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुरूप फैक्ट्री का निरीक्षण नहीं किया। वरिष्ठ कार्यालयों को आवश्यक प्रतिवेदन भी नहीं भेजे गए। विस्फोटक सामग्री से जुड़े प्रकरणों में निर्धारित मानकों के अनुसार प्रशासनिक निगरानी न होने को गंभीर कर्तव्य-लापरवाही माना गया है।
निलंबन की शर्तें
निलंबन अवधि के दौरान दीपा मांडे का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, भोपाल निर्धारित किया गया है। संजीव सक्सेना और रवि शर्मा का मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय, देवास रहेगा। तीनों अधिकारियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता बनी रहेगी।
आगे क्या होगा
घायलों का उपचार अभी जारी है और मृतकों की संख्या में बदलाव की आशंका बनी हुई है। प्रारंभिक जाँच में प्रशासनिक चूक उजागर होने के बाद विभागीय जाँच की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। गौरतलब है कि इस तरह की घटनाएँ अनाधिकृत या अनिरीक्षित विस्फोटक इकाइयों के नियमन की माँग को फिर से केंद्र में ला देती हैं।