सिक्किम के 51वें स्थापना दिवस पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले — प्रकृति, संस्कृति और शासन का अनूठा संगम है यह राज्य
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शनिवार, 16 मई 2026 को गंगटोक में आयोजित सिक्किम के 51वें राज्य स्थापना दिवस समारोह में भाग लिया और हिमालयी राज्य की पिछले पाँच दशकों की विकास-यात्रा को 'असाधारण' करार दिया। उन्होंने कहा कि सिक्किम प्रकृति, संस्कृति और शासन के बीच सामंजस्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। राधाकृष्णन ने यह भी उल्लेख किया कि एक छात्र के रूप में उन्होंने सिक्किम के भारत में विलय से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों को निकट से देखा था।
जैविक राज्य की 'सांस्कृतिक क्रांति'
उपराष्ट्रपति ने सिक्किम को 'हरा-भरा, जैविक, स्वच्छ और साफ-सुथरा' राज्य बताते हुए कहा कि यह राज्य केवल कृषि में नहीं, बल्कि 'स्वभाव से भी जैविक' है। उन्होंने रेखांकित किया कि सिक्किम 2016 में विश्व का पहला 100 प्रतिशत जैविक राज्य बना और 76,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को रसायन-मुक्त पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तित करना महज एक कृषि सुधार नहीं, बल्कि एक 'सांस्कृतिक क्रांति' है।
उन्होंने 'मेरो रुख मेरो संताति' पहल की विशेष सराहना की, जिसके तहत प्रत्येक नवजात शिशु के जन्म पर 108 पेड़ लगाए जाते हैं। इसके साथ ही 'शिशु समृद्धि योजना' — जो बच्चों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है — को भी उन्होंने आध्यात्मिकता और सतत विकास को जोड़ने वाली मिसाल बताया।
विकास परियोजनाओं का शुभारंभ और आधारशिला
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने कनेक्टिविटी, बुनियादी ढाँचे, शिक्षा और शासन से जुड़ी कई परियोजनाओं की वर्चुअल आधारशिला रखी और उद्घाटन किया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं — रिम्बी-युक्सम सड़क का उन्नयन, NH-10 पर सुरक्षात्मक कार्य और पुल निर्माण, रंगपो खोला पर स्टील का पुल, बुरतुक हेलीपोर्ट का पुनर्निर्माण एवं उन्नयन, नामची के कामरंग सरकारी डिग्री कॉलेज में नया विज्ञान ब्लॉक, तथा पाकयोंग के अरितार में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान।
इसके अलावा उन्होंने सिक्किम उत्पाद शुल्क प्रबंधन प्रणाली, सरकार-समर्थित उद्यमिता कार्यक्रम 'सिक्किम राइज' और जैविक नेतृत्व को सुदृढ़ करने के लिए 'मिशन सिक्किम ऑर्गेनिक्स' का भी शुभारंभ किया। 'सिक्किम राइज' का उद्देश्य मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन, वित्तपोषण और अवसंरचनात्मक सहायता के ज़रिये नवोन्मेषी विचारों को बड़े व्यवसायों में बदलना है।
PM मोदी की यात्रा और ₹4,000 करोड़ की परियोजनाएँ
राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सिक्किम यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि उस दौरान ₹4,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाएँ शुरू की गईं और जनता को समर्पित की गईं। उन्होंने प्रधानमंत्री के 'एक्ट ईस्ट, एक्ट फास्ट' दृष्टिकोण को रेखांकित किया और सिक्किम को पूर्वोत्तर की 'अष्टलक्ष्मी' का अभिन्न अंग बताया।
उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की सराहना करते हुए कहा कि रेलवे और हेलीपोर्ट सुविधाओं के विस्तार से पूरे क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और आर्थिक विकास को बल मिला है। उन्होंने विश्वास जताया कि सिक्किम को भी जल्द ही सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे राज्य के जैविक उत्पाद देशभर के बाज़ारों तक पहुँच सकेंगे।
सीमावर्ती गाँव और राष्ट्रीय सुरक्षा
उपराष्ट्रपति ने सिक्किम के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए राज्य को 'राष्ट्र का रक्षक' बताया। उन्होंने कहा कि जीवंत ग्राम कार्यक्रम के तहत सिक्किम के 58 गाँवों को चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा। उनके अनुसार, सीमावर्ती गाँव अब 'अंतिम गाँव' नहीं, बल्कि 'भारत के पहले गाँव' हैं — यह वाक्य उन्होंने देशभक्ति और समावेशी विकास की भावना के प्रतीक के रूप में कहा।
काजी लेंडुप दोरजी को श्रद्धांजलि और 'विकसित भारत 2047' का संकल्प
उपराष्ट्रपति ने सिक्किम के पहले मुख्यमंत्री काजी लेंडुप दोरजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें एक 'दूरदर्शी नेता' बताया, जिन्होंने बुद्धिमत्ता, साहस और प्रतिबद्धता के साथ राज्य को ऐतिहासिक लोकतांत्रिक परिवर्तन के दौर से गुज़ारा। उन्होंने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व में सिक्किम सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सतत विकास के वैश्विक मॉडल के रूप में उभरा है।
राधाकृष्णन ने कहा कि 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना समावेशी विकास पर आधारित है जिसमें कोई भी क्षेत्र पीछे न छूटे। उन्होंने लेपचा, भूटिया और नेपाली समुदायों सहित विभिन्न समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा और समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम का अवलोकन भी किया और कहा कि यह विविधता 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के दृष्टिकोण को साकार करती है। राज्य स्थापना का यह 51वाँ वर्ष सिक्किम के लिए विकास और समावेशी प्रगति के नए चरण का आरंभ है।