महाराष्ट्र साइबर विभाग ने ₹4.97 लाख की शेयर बाज़ार धोखाधड़ी में आरोपी को दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने ₹4.97 लाख रुपए की ऑनलाइन शेयर बाज़ार निवेश धोखाधड़ी के मामले में मोहम्मद अली कपाडिया (23) को गिरफ्तार किया है। 26 अक्टूबर 2026 को जाँच अधिकारी के समक्ष पेश होने के बाद उसे हिरासत में लिया गया। यह ठगी 25 अगस्त से 23 सितंबर 2026 के बीच सोशल मीडिया विज्ञापन और फर्जी व्हाट्सऐप ग्रुप के ज़रिये की गई थी।
धोखाधड़ी का तरीका
पीड़ित, 42 वर्षीय कल्याण निवासी, को सोशल मीडिया पर 'सस्केहाना इंटरनेशनल ग्रुप' से जुड़ा एक विज्ञापन दिखा, जिसके बाद उन्हें 'ब्रेकथ्रू कम्युनिकेशन' नाम के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया। अधिकारियों के अनुसार, शिखा शर्मा नामक एक व्यक्ति ने शिकायतकर्ता से संपर्क कर निवेश संबंधी मार्गदर्शन दिया और उन्हें एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन के माध्यम से शेयर बाज़ार में धन लगाने के लिए प्रोत्साहित किया।
अधिकारियों ने बताया, 'शिकायतकर्ता ने विश्वास में आकर कुल ₹4.97 लाख रुपए आठ अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए।' जब ठगी का संदेह हुआ, तो पीड़ित ने 27 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
एफआईआर और कानूनी कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद महाराष्ट्र साइबर के नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 319(2) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66(सी) और 66(डी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इन धाराओं के तहत पहचान की चोरी और कंप्यूटर द्वारा धोखाधड़ी के गंभीर आरोप शामिल हैं।
मुख्य आरोपी तक कैसे पहुँची पुलिस
जाँच में पुलिस ने बैंकिंग लेन-देन का बारीकी से विश्लेषण किया। अधिकारियों के अनुसार, धोखाधड़ी की रकम विभिन्न खातों से होते हुए निखिल कांबले के खाते में पहुँची, जहाँ से उसे नकद निकाला गया। इसके बाद यह राशि एक मध्यस्थ के ज़रिये आरोपी मोहम्मद अली कपाडिया तक पहुँचाई गई। अधिकारियों का संकेत है कि आरोपी ने साइबर ठगी से प्राप्त धन को छुपाने और निकालने के लिए अन्य व्यक्तियों के साथ भी समन्वय किया हो सकता है।
जाँच की स्थिति और आगे की कार्रवाई
गौरतलब है कि फर्जी ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सऐप-आधारित ठगी के मामले देशभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल निवेश घोटालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। महाराष्ट्र साइबर विभाग के अनुसार, इस मामले में अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है और पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए जाँच आगे बढ़ाई जा रही है।