27 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने ₹4.97 लाख की शेयर बाज़ार धोखाधड़ी में आरोपी को दबोचा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने ₹4.97 लाख की शेयर बाज़ार धोखाधड़ी में आरोपी को दबोचा

सारांश

व्हाट्सऐप ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग ऐप के ज़रिये ₹4.97 लाख की ठगी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को महाराष्ट्र साइबर विभाग ने दबोचा। बैंकिंग ट्रेल खंगालकर पुलिस आरोपी तक पहुँची; पूरे नेटवर्क की जाँच जारी है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने मोहम्मद अली कपाडिया (23) को 26 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया।
धोखाधड़ी की रकम ₹4.97 लाख रुपए ; पैसे 8 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर हुए।
ठगी 25 अगस्त से 23 सितंबर 2026 के बीच सोशल मीडिया विज्ञापन और व्हाट्सऐप ग्रुप के ज़रिये हुई।
पीड़ित ने 27 सितंबर को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
बीएनएस की धारा 318(4), 319(2) और आईटी अधिनियम की धारा 66(सी), 66(डी) के तहत एफआईआर।
जाँच में नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश जारी।

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने ₹4.97 लाख रुपए की ऑनलाइन शेयर बाज़ार निवेश धोखाधड़ी के मामले में मोहम्मद अली कपाडिया (23) को गिरफ्तार किया है। 26 अक्टूबर 2026 को जाँच अधिकारी के समक्ष पेश होने के बाद उसे हिरासत में लिया गया। यह ठगी 25 अगस्त से 23 सितंबर 2026 के बीच सोशल मीडिया विज्ञापन और फर्जी व्हाट्सऐप ग्रुप के ज़रिये की गई थी।

धोखाधड़ी का तरीका

पीड़ित, 42 वर्षीय कल्याण निवासी, को सोशल मीडिया पर 'सस्केहाना इंटरनेशनल ग्रुप' से जुड़ा एक विज्ञापन दिखा, जिसके बाद उन्हें 'ब्रेकथ्रू कम्युनिकेशन' नाम के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया। अधिकारियों के अनुसार, शिखा शर्मा नामक एक व्यक्ति ने शिकायतकर्ता से संपर्क कर निवेश संबंधी मार्गदर्शन दिया और उन्हें एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन के माध्यम से शेयर बाज़ार में धन लगाने के लिए प्रोत्साहित किया।

अधिकारियों ने बताया, 'शिकायतकर्ता ने विश्वास में आकर कुल ₹4.97 लाख रुपए आठ अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए।' जब ठगी का संदेह हुआ, तो पीड़ित ने 27 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

एफआईआर और कानूनी कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद महाराष्ट्र साइबर के नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 319(2) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66(सी) और 66(डी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इन धाराओं के तहत पहचान की चोरी और कंप्यूटर द्वारा धोखाधड़ी के गंभीर आरोप शामिल हैं।

मुख्य आरोपी तक कैसे पहुँची पुलिस

जाँच में पुलिस ने बैंकिंग लेन-देन का बारीकी से विश्लेषण किया। अधिकारियों के अनुसार, धोखाधड़ी की रकम विभिन्न खातों से होते हुए निखिल कांबले के खाते में पहुँची, जहाँ से उसे नकद निकाला गया। इसके बाद यह राशि एक मध्यस्थ के ज़रिये आरोपी मोहम्मद अली कपाडिया तक पहुँचाई गई। अधिकारियों का संकेत है कि आरोपी ने साइबर ठगी से प्राप्त धन को छुपाने और निकालने के लिए अन्य व्यक्तियों के साथ भी समन्वय किया हो सकता है।

जाँच की स्थिति और आगे की कार्रवाई

गौरतलब है कि फर्जी ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सऐप-आधारित ठगी के मामले देशभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल निवेश घोटालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। महाराष्ट्र साइबर विभाग के अनुसार, इस मामले में अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है और पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए जाँच आगे बढ़ाई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें नामी विदेशी वित्तीय संस्थाओं की आड़ लेकर आम नागरिकों को फँसाया जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि ₹4.97 लाख की यह रकम एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बड़ी बचत हो सकती है, फिर भी आरोपी नेटवर्क में केवल एक 'मनी म्यूल' यानी नकद निकासी करने वाले व्यक्ति तक ही पुलिस अब तक पहुँच सकी है। असली सवाल यह है कि शिखा शर्मा जैसे मुख्य संचालक और 'ब्रेकथ्रू कम्युनिकेशन' ग्रुप चलाने वाले कहाँ हैं — बिना उनकी गिरफ्तारी के यह सफलता आधी-अधूरी है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र साइबर ने किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने 23 वर्षीय मोहम्मद अली कपाडिया को गिरफ्तार किया, जो ₹4.97 लाख की ऑनलाइन शेयर बाज़ार धोखाधड़ी में नकद राशि प्राप्त करने और उसे ठिकाने लगाने में संलिप्त पाया गया। 26 अक्टूबर 2026 को जाँच अधिकारी के सामने पेश होने के बाद उसे हिरासत में लिया गया।
इस ऑनलाइन ठगी में पीड़ित को कैसे फँसाया गया?
पीड़ित को सोशल मीडिया पर 'सस्केहाना इंटरनेशनल ग्रुप' का फर्जी विज्ञापन दिखाया गया और 'ब्रेकथ्रू कम्युनिकेशन' नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया। वहाँ 'शिखा शर्मा' ने निवेश सलाह देकर एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप में ₹4.97 लाख आठ अलग-अलग खातों में जमा करवा लिए।
शिकायत कब और कैसे दर्ज हुई?
पीड़ित ने 27 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद महाराष्ट्र साइबर के नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में बीएनएस की धारा 318(4) व 319(2) और आईटी अधिनियम की धारा 66(सी) व 66(डी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
इस मामले में जाँच अभी कहाँ तक पहुँची है?
अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने बैंकिंग ट्रेल खंगालकर आरोपी तक पहुँच बनाई है, लेकिन जाँच में संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क से और भी लोग जुड़े हो सकते हैं। अन्य संदिग्धों की तलाश और पूरे घोटाले के नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए जाँच जारी है।
ऐसी ऑनलाइन निवेश ठगी से कैसे बचें?
किसी भी सोशल मीडिया विज्ञापन या व्हाट्सऐप ग्रुप के ज़रिये आए निवेश प्रस्ताव पर पैसे लगाने से पहले सेबी (SEBI) की वेबसाइट पर ब्रोकर या कंपनी का पंजीकरण अवश्य जाँचें। किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएँ।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले