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विकसित भारत के लिए पीएम मोदी का विज्ञान-तकनीक विजन अनिवार्य: प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद

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विकसित भारत के लिए पीएम मोदी का विज्ञान-तकनीक विजन अनिवार्य: प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद

सारांश

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने ESTIC 2026 को विकसित भारत की दिशा में निर्णायक मंच बताया। PM मोदी करेंगे उद्घाटन। 12 तकनीकी विषय, सेल-जीन थेरेपी पर विशेष फ़ोकस — विज्ञान-आधारित आत्मनिर्भरता का नया खाका।

मुख्य बातें

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो.
अजय कुमार सूद ने 27 अक्टूबर 2026 को कहा कि PM मोदी का विजन 'विकसित भारत' लक्ष्य के लिए अनिवार्य है।
ESTIC 2026 का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे; इस बार 12 समकालीन तकनीकी विषय शामिल।
सम्मेलन में शिक्षण संस्थान, उद्योग, राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ और नीति निर्माता एक साथ आएँगे।
सूद ने सेल और जीन थेरेपी को चिकित्सा विज्ञान की 'अगली बड़ी सीमा' बताया; CAR-T सेल थेरेपी, सिकल सेल एनीमिया, कैंसर उपचार में बढ़ता उपयोग।
उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और नवाचार-अनुसंधान में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर बल।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन और समर्थन बेहद ज़रूरी है। उन्होंने आगामी इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज, इनोवेशन एंड साइंस कॉन्क्लेव (ESTIC) 2026 को देश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया।

ESTIC 2026: विस्तारित दायरा और नई प्राथमिकताएँ

प्रोफेसर सूद ने बताया कि ESTIC 2025 की सफलता के बाद ESTIC 2026 को और व्यापक रूप दिया गया है। इस बार सम्मेलन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े 12 समकालीन विषय शामिल किए गए हैं, जो देश के वैज्ञानिक और तकनीकी भविष्य के विभिन्न आयामों को समेटेंगे। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्घाटन स्वयं प्रधानमंत्री मोदी करेंगे, जो इस बात का प्रतीक है कि सरकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-आधारित विकास को कितनी उच्च प्राथमिकता देती है।

प्रोफेसर सूद के शब्दों में, 'प्रधानमंत्री द्वारा इस कार्यक्रम का उद्घाटन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और विकसित भारत के निर्माण में इसकी भूमिका को दर्शाता है। उनका समर्थन बिल्कुल आवश्यक है और हम उनके विजन से प्रेरित और निर्देशित होते रहे हैं।'

सभी हितधारकों को एक मंच पर लाने की कोशिश

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा कि ESTIC 2026 में शिक्षण संस्थान, उद्योग जगत, राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ और नीति निर्माता — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के सभी प्रमुख हितधारक — एक ही मंच पर आएँगे। उनके अनुसार, 'यह हमारे पूरे इकोसिस्टम को नई ऊर्जा देता है कि भारत इन तकनीकों में अग्रणी भूमिका कैसे निभा सकता है।' यह सम्मेलन भारत को उभरती तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सेल और जीन थेरेपी: चिकित्सा विज्ञान की अगली बड़ी सीमा

स्वास्थ्य क्षेत्र की उभरती तकनीकों पर चर्चा करते हुए प्रोफेसर सूद ने कहा कि सेल और जीन थेरेपी आने वाले वर्षों में चिकित्सा विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में से एक साबित होगी। उन्होंने बताया कि पहले इसे मुख्य रूप से दुर्लभ बीमारियों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब सिकल सेल एनीमिया, कैंसर, CAR-T सेल थेरेपी और सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में इसका उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है।

उनके शब्दों में, 'मेरा मानना है कि सेल और जीन थेरेपी चिकित्सा विज्ञान की अगली बड़ी सीमा (फ्रंटियर) बनने जा रही है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर जीन-एडिटिंग और सेलुलर उपचारों में अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है।

आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की ओर

प्रोफेसर सूद ने ज़ोर देकर कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी भारत को आत्मनिर्भर बनाने के केंद्र में हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में तेज़ प्रगति देश की आर्थिक, औद्योगिक और रणनीतिक क्षमताओं को मज़बूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकियों, जैव प्रौद्योगिकी और नवाचार-आधारित अनुसंधान में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की, ताकि भारत वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान देने में अग्रणी बन सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या इनसे नीतिगत प्रतिबद्धताएँ निकलती हैं जो अनुसंधान बजट और संस्थागत स्वायत्तता को ठोस रूप देती हैं। सेल-जीन थेरेपी पर जोर सराहनीय है, पर भारत में इस क्षेत्र की नियामकीय और विनिर्माण-क्षमता की चुनौतियाँ अभी भी अनसुलझी हैं — जिनका ESTIC के मंच से समाधान निकलना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ESTIC 2026 क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
ESTIC 2026 यानी इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज, इनोवेशन एंड साइंस कॉन्क्लेव 2026 एक राष्ट्रीय विज्ञान-तकनीक सम्मेलन है, जिसमें 12 समकालीन तकनीकी विषयों पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य शिक्षा, उद्योग, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाकर भारत को उभरती तकनीकों में वैश्विक नेता बनाना है।
ESTIC 2026 का उद्घाटन कौन करेगा?
ESTIC 2026 का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद के अनुसार, यह इस बात का प्रतीक है कि सरकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-आधारित विकास को उच्चतम प्राथमिकता देती है।
ESTIC 2026 में कौन-कौन भाग लेगा?
सम्मेलन में शिक्षण संस्थान, उद्योग जगत, राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ और नीति निर्माता — यानी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के सभी प्रमुख हितधारक — भाग लेंगे। ESTIC 2025 की सफलता के बाद इस बार सम्मेलन का दायरा और विस्तृत किया गया है।
सेल और जीन थेरेपी को प्रो. सूद ने इतना महत्वपूर्ण क्यों बताया?
प्रो. सूद के अनुसार, सेल और जीन थेरेपी अब केवल दुर्लभ बीमारियों तक सीमित नहीं है — सिकल सेल एनीमिया, कैंसर, CAR-T सेल थेरेपी और सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी गंभीर बीमारियों में इसका उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। उन्होंने इसे चिकित्सा विज्ञान की 'अगली बड़ी सीमा' (नेक्स्ट फ्रंटियर) करार दिया।
विकसित भारत के लक्ष्य में विज्ञान-तकनीक की क्या भूमिका है?
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद के अनुसार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी भारत को आत्मनिर्भर बनाने के केंद्र में हैं। इन क्षेत्रों में तेज़ प्रगति देश की आर्थिक, औद्योगिक और रणनीतिक क्षमताओं को मज़बूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी और भारत को वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अग्रणी बनाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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