ईएसटीआईसी 2026: नीति आयोग के प्रो. गोवर्धन दास बोले — विज्ञान और नवाचार से विश्व नेतृत्व करेगा भारत
सारांश
मुख्य बातें
नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोवर्धन दास ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत एक ऐसे निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है जहाँ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार देश की प्रगति के मूल आधार बन चुके हैं। उन्होंने ईएसटीआईसी 2026 सम्मेलन को भारतीय वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को एकजुट करने वाला सबसे महत्वपूर्ण मंच करार दिया।
भारत की वैज्ञानिक क्षमता का उदाहरण
प्रो. दास ने कोविड 19 महामारी को भारत की वैज्ञानिक परिपक्वता का सबसे ठोस प्रमाण बताया। उन्होंने कहा, "भारत ने न केवल अपने लिए वैक्सीन विकसित की, बल्कि 150 से अधिक देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई। यह भारत की वैज्ञानिक क्षमता और वैश्विक योगदान का प्रमाण है।" यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मंच पर भारत अपनी 'विश्व मित्र' की भूमिका को लगातार सुदृढ़ कर रहा है।
ईएसटीआईसी 2026 का महत्व
प्रो. दास ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में उल्लेखनीय शोध और नवाचार का कार्य चल रहा है, लेकिन अब ज़रूरत इन सभी प्रयासों को एक मंच पर लाकर सहयोग, समन्वय और ज्ञान साझाकरण को बढ़ाने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि "यही वजह है कि ईएसटीआईसी 2026 जैसे आयोजन बेहद महत्वपूर्ण हैं।" गौरतलब है कि यह सम्मेलन वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
शिक्षा और नवाचार — दोनों समान रूप से अनिवार्य
प्रो. दास ने यह भी कहा कि परंपरागत रूप से शिक्षा को किसी भी देश की रीढ़ माना जाता था, किंतु आज के दौर में शिक्षा और नवाचार दोनों समान महत्व रखते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज्ञान और अनुसंधान आधारित विकास के प्रति गंभीर दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत का वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र निरंतर सुदृढ़ हो रहा है।
आईआईएसईआर मोहाली के निदेशक की राय
आईआईएसईआर मोहाली के निदेशक डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी ने भी इस अवसर पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को वैश्विक नेतृत्व के लिए जिस आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है, वह ज्ञान निर्माण और वैज्ञानिक उपलब्धियों से ही उत्पन्न होता है। डॉ. त्रिपाठी ने ईएसटीआईसी 2026 को बड़े और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर सामूहिक कार्य के अवसर बढ़ाने वाला मंच बताया।
प्रयोगशाला से उद्योग तक — अगली बड़ी चुनौती
डॉ. त्रिपाठी ने स्वीकार किया कि भारत में लंबे समय तक वैज्ञानिक शोध को व्यावहारिक उत्पादों और प्रक्रियाओं में रूपांतरित करना एक बड़ी चुनौती रही है। हालाँकि उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार द्वारा स्टार्टअप्स और नवाचार को प्रोत्साहन देने से स्थिति में उल्लेखनीय बदलाव आया है। उन्होंने कहा, "विज्ञान को प्रयोगशाला से निकालकर उद्योग और समाज तक पहुँचाना ही भारत की अगली बड़ी उपलब्धि होगी।" आने वाले वर्षों में यह रूपांतरण भारत को वैश्विक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मानचित्र पर नई पहचान दिला सकता है।