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चुनाव आयोग के हलफनामे का स्वागत करें: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत

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चुनाव आयोग के हलफनामे का स्वागत करें: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत

सारांश

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के हलफनामे का स्वागत किया, लेकिन ओडिशा के धामपुर में 10 बीएलओ द्वारा अपने ही अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की घटना को संस्थागत विश्वास के लिए गंभीर चेतावनी बताया।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनाव आयोग के एसआईआर और फॉर्म-6 पर दाखिल हलफनामे का स्वागत किया।
सर्वोच्च न्यायालय ने 5 अक्टूबर को चुनाव आयोग से प्रक्रिया संबंधी सभी तथ्य माँगे थे।
हलफनामे में स्पष्ट किया गया कि एसआईआर के फैसले सर्वसम्मति से हुए; 14 आपत्तियाँ दर्ज होने की भी पुष्टि।
ओडिशा के धामपुर में 10 बीएलओ ने अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई — आरोप: पहचान पत्रों और ओटीपी से मतदाता नाम हटाए।
रावत ने चेताया — संस्थागत शिकायत तंत्र पर बीएलओ का भरोसा कमज़ोर होना चुनाव आयोग के लिए गंभीर चुनौती।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने 27 अक्टूबर 2026 को भोपाल में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में चुनाव आयोग की ओर से एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) और फॉर्म-6 को लेकर दाखिल किए गए हलफनामे का स्वागत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने 5 अक्टूबर को आयोग से संबंधित फैसलों और उनकी प्रक्रिया से जुड़े सभी तथ्य माँगे थे, और ऐसे में हलफनामा दाखिल करना एक सकारात्मक कदम है।

हलफनामे की मुख्य बातें

रावत ने बताया कि फॉर्म-6 को लेकर आम लोगों के बीच कई तरह की भ्रांतियाँ थीं। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि नामांकन की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के अनुसार आयोग अपने फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर ले सकता है।

हलफनामे से यह स्पष्ट होता है कि एसआईआर से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। हालाँकि, इस पूरे मामले में 14 आपत्तियाँ दर्ज होने की बात भी सामने आई है, जो विवाद का एक बिंदु बनी हुई है।

पुराने विवादों का संदर्भ

रावत ने एक निजी समाचार पत्र में 23 सितंबर को प्रकाशित खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनमें चुनाव आयोग के दो आयुक्तों द्वारा कई आपत्तियाँ दर्ज कराने और कैबिनेट सचिव को पत्र लिखने जैसे दावे किए गए थे। साथ ही, करीब 10 महीने तक आंतरिक बैठक न होने का भी आरोप लगाया गया था।

उन्होंने कहा कि जब तक हलफनामे का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं हो जाता, इन दावों पर कोई निश्चित राय देना उचित नहीं होगा।

बीएलओ की एफआईआर — संस्थागत विश्वास पर सवाल

रावत ने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से जुड़े एक गंभीर मामले पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से बीएलओ और चुनाव आयोग के कर्मचारी किसी गड़बड़ी की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देते हैं, लेकिन अब कुछ मामलों में कर्मचारी सीधे पुलिस में शिकायत दर्ज करा रहे हैं।

प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, ओडिशा के धामपुर में 10 बीएलओ ने एफआईआर दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि उनके ही वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके पहचान पत्रों और ओटीपी का उपयोग करके कई मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए।

रावत की चेतावनी और आगे का रास्ता

रावत ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की घटनाएँ एक-दो जगहों से भी सामने आ रही हैं, तो यह दर्शाता है कि बीएलओ के बीच यह भरोसा कमज़ोर हो रहा है कि विभाग के भीतर उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले की गंभीरता से जाँच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और कर्मचारियों का संस्थागत व्यवस्था पर विश्वास बना रहे। यह मामला आने वाले समय में चुनाव आयोग की आंतरिक जवाबदेही की कसौटी बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

कैबिनेट सचिव को पत्र और 10 महीने तक बैठक न होने के आरोप — ये सब मिलकर एक ऐसी तस्वीर बनाते हैं जिसे हलफनामे से पूरी तरह ढका नहीं जा सकता। ओडिशा के धामपुर में बीएलओ का सीधे पुलिस के पास जाना यह बताता है कि आंतरिक शिकायत तंत्र पर भरोसा टूट चुका है — और यह मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में यह मामला जितना पारदर्शी होगा, चुनाव आयोग की साख उतनी ही बहाल होगी।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने किस विषय पर हलफनामा दाखिल किया है?
चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) और फॉर्म-6 से जुड़ी प्रक्रिया और फैसलों के बारे में हलफनामा दाखिल किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने 5 अक्टूबर को आयोग से इन विषयों पर सभी तथ्य माँगे थे।
ओपी रावत ने चुनाव आयोग के हलफनामे पर क्या कहा?
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने हलफनामे का स्वागत किया और कहा कि इससे फॉर्म-6 की प्रक्रिया में कोई बदलाव न होने की बात स्पष्ट होती है। उन्होंने यह भी कहा कि हलफनामे के पूरे विवरण के सामने आने तक किसी भी विवाद पर अंतिम राय देना उचित नहीं होगा।
ओडिशा के धामपुर में बीएलओ ने एफआईआर क्यों दर्ज कराई?
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, ओडिशा के धामपुर में 10 बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि इन अधिकारियों ने उनके पहचान पत्रों और ओटीपी का उपयोग करके कई मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए।
एसआईआर फैसले सर्वसम्मति से हुए या बहुमत से?
हलफनामे के अनुसार, एसआईआर से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। हालाँकि, इस मामले में 14 आपत्तियाँ भी दर्ज होने की बात सामने आई है, जिससे विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
चुनाव आयोग में आंतरिक विवाद के क्या संकेत थे?
एक निजी समाचार पत्र में 23 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आयोग के दो आयुक्तों ने कई आपत्तियाँ दर्ज कराईं और कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा। इसके अलावा, करीब 10 महीने तक आंतरिक बैठक न होने का भी आरोप लगाया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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