27 अक्टूबर 2026
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स्वामी प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान: ईवीएम हटाओ, बैलेट पेपर लाओ; CEC के इस्तीफे की माँग

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स्वामी प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान: ईवीएम हटाओ, बैलेट पेपर लाओ; CEC के इस्तीफे की माँग

सारांश

स्वामी प्रसाद मौर्य ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को निशाने पर रखते हुए ईवीएम हटाने, सीईसी के इस्तीफे और सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की एक साथ माँग कर दी। उनका तर्क है कि जब से सीजेआई को नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर किया गया, तभी से आयोग की निष्पक्षता पर संकट शुरू हुआ।

मुख्य बातें

स्वामी प्रसाद मौर्य ने 27 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में ईवीएम हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग की।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के इस्तीफे की माँग; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से कार्रवाई का अनुरोध।
सर्वोच्च न्यायालय से एसआईआर विवाद और निर्वाचन आयुक्त नियुक्ति मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अपील।
एसआईआर के नाम पर करोड़ों जीवित मतदाताओं के नाम काटने का आरोप; नाम बहाल करने की माँग।
1 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की रैली का समर्थन; केंद्र सरकार से इस्तीफे की माँग।
सपा पर BJP के एजेंडे पर काम करने का आरोप; UP सीट बंटवारे पर बातचीत होने पर खुलासे का संकेत।

अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने 27 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने माँग की कि देश में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएँ और एसआईआर के दौरान काटे गए जीवित मतदाताओं के नाम तत्काल बहाल किए जाएँ।

मुख्य माँगें और आरोप

मौर्य ने कहा कि चुनाव आयोग पर सवाल विपक्ष नहीं, बल्कि आम जनता उठा रही है। उनके अनुसार ईवीएम के दुरुपयोग को लेकर बार-बार चर्चाएँ होती रही हैं और चुनाव आयोग से निष्पक्षता व पारदर्शिता की अपेक्षा स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर करोड़ों जीवित मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

मौर्य ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की माँग करते हुए कहा कि दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों द्वारा उनकी भूमिका पर सवाल उठाए जाने के बाद सीईसी को नैतिक आधार पर पद छोड़ देना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता, तो उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से इस मामले में उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

सर्वोच्च न्यायालय से स्वतः संज्ञान की अपील

मौर्य ने सर्वोच्च न्यायालय से इस गंभीर मामले में स्वतः संज्ञान लेकर प्रभावी हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि जब से भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर किया गया है, तब से चुनाव आयोग के दुरुपयोग की स्थिति बनी है। उनके अनुसार पहले इस प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और मुख्य न्यायाधीश — तीनों शामिल होते थे, तब आयोग पर इस तरह के सवाल नहीं उठते थे।

मौर्य ने यह भी कहा कि आयोग की कार्यप्रणाली पर सहमति जताकर सर्वोच्च न्यायालय सरकारी दबाव में दिखाई देता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अदालत को उसी समय स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था जब सीजेआई को नियुक्ति प्रक्रिया से हटाया गया था।

इंडिया ब्लॉक रैली और सीट बंटवारा

दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की रैली पर मौर्य ने कहा कि लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने केंद्र सरकार से 'अहंकार छोड़ने और इस्तीफा देने' की माँग की तथा कहा कि आज भी लोग लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं।

उत्तर प्रदेश चुनाव में सीट बंटवारे पर मौर्य ने कहा कि जब बातचीत होगी तभी विवरण सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) पर आरोप लगाते हुए कहा कि सपा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एजेंडे पर काम करती दिखाई दे रही है और उसकी गतिविधियों का अनुसरण करती है।

अन्य मुद्दों पर प्रतिक्रिया

बाबा बागेश्वर के रामचरितमानस को पूर्णतः लागू करने संबंधी बयान पर मौर्य ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि 'धर्म का चोला पहनकर धर्माचार्य बनने वाले पढ़े-लिखे लोगों की ऐसी भाषा उनकी मूर्खता को दर्शाती है।' बाबा रामदेव के उस बयान पर कि ओवैसी के उत्तर प्रदेश चुनाव लड़ने से BJP को फायदा होगा, मौर्य ने कहा कि रामदेव ऐसा क्यों कह रहे हैं, यह वही बता सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और संविधान प्रत्येक नागरिक को चुनाव लड़ने का अधिकार देता है।

दिवाली से पहले बाज़ार बंद होने और व्यापारियों को नुकसान की आशंका पर उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन केवल एक दिन का है और दिवाली तक पूरा एक सप्ताह मिलेगा। मौर्य ने जोड़ा कि वे व्यापारियों के कारोबार में किसी भी हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं हैं। आने वाले समय में इंडिया ब्लॉक की एकजुटता और विपक्ष की रणनीति पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सर्वोच्च न्यायालय पहले ही एसआईआर से जुड़ी याचिका खारिज कर चुका है, जो उनके तर्क को कमज़ोर करती है। असली राजनीतिक संदेश उत्तर प्रदेश के अगले चुनाव से जोड़कर देखा जाना चाहिए, जहाँ इंडिया ब्लॉक के सीट बंटवारे की धुंध अभी छँटी नहीं है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी प्रसाद मौर्य ने ईवीएम पर क्या माँग की है?
मौर्य ने माँग की है कि देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएँ। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम ज़रूरी है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की माँग क्यों की जा रही है?
मौर्य के अनुसार दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों ने सीईसी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, इसलिए उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। ऐसा न होने पर उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से कार्रवाई की माँग की है।
एसआईआर विवाद क्या है और इसमें क्या आरोप हैं?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कथित तौर पर करोड़ों जीवित मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। मौर्य ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ गंभीर खिलवाड़ बताते हुए इन नामों को तत्काल बहाल करने की माँग की है।
मौर्य ने सर्वोच्च न्यायालय से क्या अपील की है?
मौर्य ने सर्वोच्च न्यायालय से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर मामले में स्वतः संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि जब से भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर किया गया, तब से आयोग के दुरुपयोग की स्थिति बनी है।
इंडिया ब्लॉक की 1 नवंबर की रैली पर मौर्य का क्या रुख है?
मौर्य ने दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की रैली का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए लोग आज भी संघर्ष करने को तैयार हैं और केंद्र सरकार को अहंकार छोड़कर इस्तीफा देना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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