एसआईआर विवाद: भाजपा एमएलसी सीटी रवि ने सीएम शिवकुमार के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और भाजपा एमएलसी सीटी रवि ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में माँग की कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर निराधार आरोप लगाने वालों के विरुद्ध स्वतः संज्ञान ले। उन्होंने विशेष रूप से मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने BJP पर एक विशेष समुदाय के 60 लाख से 70 लाख मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाने का प्रयास करने का आरोप लगाया, जो कथित तौर पर झूठा और भ्रामक है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए मुद्दे
भाजपा के प्रदेश मुख्यालय जगन्नाथ भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीटी रवि ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री द्वारा इस प्रकार के गंभीर आरोप लगाना अस्वीकार्य है। उनके अनुसार, यदि शिवकुमार अपने आरोपों को साबित करने में असमर्थ रहते हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए और उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
रवि ने ईवीएम छेड़छाड़ के आरोपों को भी खारिज करते हुए तर्क दिया कि यदि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में वाकई हेरफेर हुई होती, तो कांग्रेस को बहुमत नहीं मिलता और शिवकुमार स्वयं मुख्यमंत्री नहीं बनते। उनका यह तर्क कांग्रेस के ईवीएम-विरोधी अभियान को सीधी चुनौती देता है।
एसआईआर पर आँकड़ों का विरोधाभास
सीटी रवि ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवकुमार ने 60 लाख से 70 लाख मतदाताओं को सूची से हटाने का दावा किया, जबकि चुनाव आयोग के अनुसार एसआईआर प्रक्रिया में केवल 91,000 फॉर्म-7 आवेदन प्राप्त हुए। रवि ने इस विसंगति को गंभीर बताते हुए कहा कि शिवकुमार को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए और पद के कथित दुरुपयोग के लिए जवाब देना चाहिए।
गौरतलब है कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, किंतु कर्नाटक में इसे लेकर राजनीतिक तनाव इस बात को दर्शाता है कि राज्य में अगले चुनावी चक्र से पहले मतदाता सूचियाँ किस कदर राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन गई हैं।
कांग्रेस पर 'सामूहिक मानचित्रण' का आरोप
रवि ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस ने 'सामूहिक मानचित्रण' के जरिये अपने पसंदीदा मतदाताओं को सूचियों में शामिल कराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस साजिश का पर्दाफाश करने के लिए शिकायतें दर्ज कराईं, और इसी के कारण कथित तौर पर अब भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ पलटकर मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए रवि ने दोहरे मानदंड का आरोप लगाया — उनके अनुसार, कांग्रेस नेताओं की शिकायतें स्वीकार्य मानी जाती हैं, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायतों को अपराध की तरह देखा जाता है।
भाजपा की माँगें और आगे का रुख
सीटी रवि ने चुनाव आयोग से तीन स्पष्ट माँगें रखीं: सभी शिकायतों की निष्पक्ष जाँच हो, अयोग्य या अवैध मतदाताओं के नाम सूचियों से हटाए जाएँ, और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा इस 'साजिश' के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में BJP और सत्तारूढ़ कांग्रेस के बीच मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और मुख्यमंत्री शिवकुमार का जवाब इस विवाद की दिशा तय करेगा।