टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: सभी आरोपियों पर मकोका लगाया, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कनेक्शन
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई पुलिस ने बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में मंगलवार को सभी आरोपियों के विरुद्ध महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका), 1999 की तीन गंभीर धाराएं जोड़ दीं, जो इस मामले को एक साधारण हमले से संगठित अपराध की श्रेणी में ले जाती हैं। 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में हुई इस फायरिंग में अभिनेता बाल-बाल बचे थे, जबकि उनका ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया था।
मकोका कैसे जोड़ा गया
मुंबई पुलिस ने आरोपियों पर मकोका लगाने हेतु सक्षम अधिकारी से पूर्व में अनुमति माँगी थी। मंगलवार को वह मंजूरी मिलते ही पुलिस ने इस कठोर कानून की तीन धाराएं सभी आरोपियों के खिलाफ दर्ज कर दीं। इससे पहले मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज था। मकोका जुड़ने से अब आरोपियों को जमानत मिलना काफी कठिन हो जाएगा और दोष सिद्ध होने पर सज़ा भी कड़ी होगी।
घटनाक्रम: 18 अक्टूबर की वह रात
रिपोर्टों के अनुसार 18 अक्टूबर 2026 की रात टाइगर श्रॉफ एक फुटबॉल क्लब से लौट रहे थे, तभी जुहू इलाके में बाइक सवार हमलावरों ने उनकी कार पर पाँच से छह राउंड गोलियाँ चलाईं और फरार हो गए। इस हमले में अभिनेता सुरक्षित रहे, लेकिन उनका ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया था। घटना की सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस ने तत्काल जाँच शुरू की।
गिरफ्तारियाँ और जाँच का दायरा
शुरुआती गिरफ्तारियों में रेहान उर्फ सुक्का, फूल सिंह और ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन के नाम सामने आए। पुलिस के अनुसार इन आरोपियों की सीधी भूमिका फायरिंग की घटना में थी। आरोपियों की तलाश में पुलिस ने हरियाणा के सोनीपत और दिल्ली समेत कई स्थानों पर छापेमारी की। जाँच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने हमलावरों तक हथियार पहुँचाने में मदद की। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार कहाँ से आए, आरोपियों के आपसी संपर्क किस तरह बने और घटना के पीछे संगठित षड्यंत्र कितना गहरा था।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग कनेक्शन
इस मामले में कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अनिल पंडित का नाम भी सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब बिश्नोई गैंग पहले भी बॉलीवुड हस्तियों को निशाना बनाने की धमकियों के चलते सुर्खियों में रहा है। गौरतलब है कि मकोका का इस्तेमाल तभी किया जाता है जब पुलिस के पास यह मानने के पर्याप्त आधार हों कि आरोपी किसी संगठित आपराधिक सिंडिकेट का हिस्सा हैं।
आगे क्या होगा
मामले में जाँच अभी जारी है और पुलिस आरोपियों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है। मकोका लागू होने के बाद मामले की सुनवाई एक विशेष अदालत में होगी। अदालती कार्यवाही और आरोप-पत्र दाखिल होने के साथ इस मामले के और पहलू सामने आने की संभावना है।