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बिहार ग्रामीण बैंक के 10,900 से अधिक कर्मचारियों को ₹77.69 करोड़ का लाभ, श्रम विवाद सुलझा

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बिहार ग्रामीण बैंक के 10,900 से अधिक कर्मचारियों को ₹77.69 करोड़ का लाभ, श्रम विवाद सुलझा

सारांश

बिहार ग्रामीण बैंक में वर्षों से लटके दो औद्योगिक विवाद सुलझ गए हैं। केंद्र सरकार की मध्यस्थता से हुए इन समझौतों से 10,900 से अधिक कर्मचारियों को ₹77.69 करोड़ का फायदा मिलेगा — वेतन वृद्धि से लेकर दिव्यांग भत्ते तक।

मुख्य बातें

बिहार ग्रामीण बैंक के 10,900 से अधिक कर्मचारियों को ₹77.69 करोड़ के वित्तीय लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
पहले समझौते से लगभग 8,400 कर्मचारियों को ₹67.17 करोड़ का लाभ — PLI, वेतन वृद्धि और पदोन्नति शामिल।
दूसरे समझौते से लगभग 2,500 कर्मचारियों को ₹10.52 करोड़ (जिसमें ₹9.02 करोड़ वार्षिक आवर्ती) का लाभ।
12वें द्विपक्षीय वेतन समझौते का प्रभावी क्रियान्वयन, HRA वृद्धि और दिव्यांग कर्मचारियों के लिए परिवहन भत्ता बढ़ाया गया।
विवाद सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय), पटना की मध्यस्थता से सुलझाए गए।

केंद्र सरकार ने 27 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि बिहार ग्रामीण बैंक प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच वर्षों से चले आ रहे दो औद्योगिक विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान हो गया है। इन समझौतों से बैंक के 10,900 से अधिक कर्मचारियों को कुल मिलाकर लगभग ₹77.69 करोड़ के वित्तीय लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

मध्यस्थता की प्रक्रिया

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि ये दोनों विवाद भारत सरकार के मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय के अंतर्गत सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय), पटना की मध्यस्थता और सुलह प्रयासों के ज़रिए सुलझाए गए। मंत्रालय के अनुसार, यह उपलब्धि कर्मचारियों के हितों की रक्षा, निष्पक्ष श्रम व्यवस्था और औद्योगिक सौहार्द की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पहला समझौता: अधिकारी संघ के साथ

पहला समझौता बिहार ग्रामीण बैंक अधिकारी संघ, पटना और बैंक प्रबंधन के बीच संपन्न हुआ। इससे लगभग 8,400 कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा और इसका कुल वित्तीय प्रभाव करीब ₹67.17 करोड़ आंका गया है। इस समझौते में परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI), कार्यवाहक भत्ता, वेतन वृद्धि, यात्रा भत्ते में बढ़ोतरी, पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति जैसी प्रमुख माँगें शामिल की गई हैं।

दूसरा समझौता: वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन के साथ

दूसरा समझौता बिहार ग्रामीण बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन (BGBWO) और बैंक प्रबंधन के बीच हुआ है। इसके तहत लगभग 2,500 कर्मचारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है और कुल ₹10.52 करोड़ के वित्तीय लाभ प्रदान किए जाएँगे, जिसमें लगभग ₹9.02 करोड़ का वार्षिक आवर्ती लाभ भी सम्मिलित है। इस समझौते में 12वें द्विपक्षीय वेतन समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन, मकान किराया भत्ता (HRA) में वृद्धि, दिव्यांग कर्मचारियों के लिए परिवहन भत्ता बढ़ाने, ओवरटाइम भुगतान, पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता और एक नेगोशिएटिंग काउंसिल के गठन जैसी माँगों का समाधान किया गया है।

आम कर्मचारियों पर असर

यह समाधान ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों की माँगें लंबे अर्से से लंबित थीं। गौरतलब है कि ग्रामीण बैंकों के कर्मचारी बड़े राष्ट्रीयकृत बैंकों की तुलना में अपेक्षाकृत कम वेतन और सुविधाओं पर कार्यरत रहते हैं। इस समझौते से न केवल तत्काल आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि दिव्यांग कर्मचारियों के लिए बेहतर भत्ते और पदोन्नति में पारदर्शिता जैसे संरचनात्मक सुधार भी सुनिश्चित होंगे।

आगे की राह

सरकार ने कहा कि ये समझौते कर्मचारी संगठनों और बैंक प्रबंधन के बीच रचनात्मक संवाद तथा सहयोग की भावना के कारण संभव हो सके। मंत्रालय का मानना है कि इससे बैंक में औद्योगिक शांति और बेहतर कार्य-वातावरण को बढ़ावा मिलेगा, जिसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ग्रामीण और क्षेत्रीय बैंकों में ऐसे विवाद वर्षों तक क्यों खिंचते रहते हैं। बड़े राष्ट्रीयकृत बैंकों की तुलना में ग्रामीण बैंक कर्मचारियों की सेवा-शर्तें अब भी कमज़ोर हैं, और मध्यस्थता की ज़रूरत इसी संरचनात्मक असमानता का लक्षण है। नेगोशिएटिंग काउंसिल का गठन एक सकारात्मक कदम है, बशर्ते इसे नियमित और बाध्यकारी बनाया जाए — अन्यथा अगला विवाद भी उसी लंबी राह पर होगा।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार ग्रामीण बैंक का श्रम विवाद समझौता क्या है?
केंद्र सरकार की मध्यस्थता से बिहार ग्रामीण बैंक प्रबंधन और दो कर्मचारी संगठनों के बीच दो औद्योगिक विवाद सुलझाए गए हैं। इन समझौतों से 10,900 से अधिक कर्मचारियों को कुल ₹77.69 करोड़ के वित्तीय लाभ मिलेंगे।
इस समझौते से किन कर्मचारियों को फायदा होगा?
पहले समझौते से बिहार ग्रामीण बैंक अधिकारी संघ के लगभग 8,400 कर्मचारी लाभान्वित होंगे, जबकि दूसरे समझौते से बिहार ग्रामीण बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन (BGBWO) के लगभग 2,500 कर्मचारियों को फायदा मिलेगा।
कर्मचारियों को कौन-कौन से वित्तीय लाभ मिलेंगे?
पहले समझौते में PLI, कार्यवाहक भत्ता, वेतन वृद्धि, यात्रा भत्ता और पदोन्नति शामिल हैं। दूसरे समझौते में 12वें द्विपक्षीय वेतन समझौते का क्रियान्वयन, HRA वृद्धि, दिव्यांग कर्मचारियों के लिए परिवहन भत्ता और ओवरटाइम भुगतान जैसे लाभ शामिल हैं।
ये विवाद कैसे सुलझाए गए?
ये विवाद भारत सरकार के मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय के तहत सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय), पटना की मध्यस्थता और सुलह प्रयासों के ज़रिए सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाए गए।
नेगोशिएटिंग काउंसिल का गठन क्यों अहम है?
नेगोशिएटिंग काउंसिल के गठन से भविष्य में कर्मचारी संगठनों और बैंक प्रबंधन के बीच नियमित संवाद का एक संरचनात्मक मंच तैयार होगा। यह पदोन्नति में पारदर्शिता और श्रम विवादों को शुरुआती स्तर पर सुलझाने में सहायक होगा।
राष्ट्र प्रेस
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