16 जुलाई 2026
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बिहार में बाल श्रम पर बड़ी कार्रवाई: 222 स्थानों पर छापे, 122 बच्चे मुक्त, 60 नियोजकों पर FIR

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बिहार में बाल श्रम पर बड़ी कार्रवाई: 222 स्थानों पर छापे, 122 बच्चे मुक्त, 60 नियोजकों पर FIR

सारांश

बिहार सरकार ने 10 दिनों में 222 प्रतिष्ठानों पर छापे मारकर 122 बच्चों को मुक्त कराया और 60 नियोजकों पर FIR दर्ज की। राज्य का दावा है कि वह देश में पहली बार मुक्त किशोर श्रमिकों को ₹25,000 की सीधी आर्थिक सहायता दे रहा है।

मुख्य बातें

20 मई से 30 मई 2026 के बीच बिहार में 222 स्थानों पर बाल श्रम विरोधी छापेमारी हुई।
अभियान में 122 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया और 60 नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई।
होटल, ढाबे, ईंट-भट्ठे, गैराज और घरेलू प्रतिष्ठान सहित कई तरह के कार्यस्थलों पर जाँच की गई।
मंत्री अरुण शंकर प्रसाद के अनुसार, बिहार देश का पहला राज्य है जो मुक्त किशोर श्रमिकों को मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹25,000 की सहायता देता है।
मुक्त बच्चों के विद्यालय नामांकन और पुनर्वास के लिए समन्वित प्रयास जारी हैं।

बिहार सरकार के श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने 20 मई से 30 मई 2026 के बीच राज्यव्यापी बाल श्रम विरोधी अभियान के तहत 222 प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर 122 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया और 60 नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की। यह अभियान बिहार को बाल श्रम मुक्त राज्य बनाने की दिशा में अब तक की सबसे व्यापक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।

अभियान का दायरा और कार्यप्रणाली

राज्य के सभी जिलों में जिला प्रशासन, श्रम विभाग, पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयों के समन्वय से विशेष धावा दलों का गठन किया गया। इन दलों ने होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, चाय की दुकानें, गैराज, कार्यशालाएँ, ईंट-भट्ठे, घरेलू प्रतिष्ठान और अन्य व्यावसायिक स्थलों पर सघन जाँच की।

गौरतलब है कि अभियान केवल छापेमारी तक सीमित नहीं रहा — मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास, विद्यालय नामांकन और उनके परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने की बहुआयामी रणनीति भी अपनाई गई है।

मंत्री का बयान और सरकार की प्राथमिकता

विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि बाल श्रम न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकारों का भी हनन करता है। उन्होंने कहा, 'बाल श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित करता है तथा उन्हें बेहतर भविष्य के अवसरों से वंचित कर देता है।'

मंत्री ने दावा किया कि बिहार देश का पहला राज्य है जहाँ मुक्त कराए गए किशोर श्रमिकों को मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से ₹25,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

पुनर्वास और शिक्षा से जोड़ने की योजना

विभाग के अनुसार, मुक्त कराए गए बच्चों को शिक्षा और कौशल विकास की मुख्यधारा से जोड़ना इस अभियान का केंद्रीय उद्देश्य है। यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि ये बच्चे विद्यालयों में नामांकित हों और पुनः बाल श्रम के चक्र में न फँसें।

यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर बाल श्रम उन्मूलन की गति को लेकर सवाल उठते रहे हैं और कई राज्यों में असंगठित क्षेत्र में बच्चों के शोषण की घटनाएँ सामने आती रही हैं।

आगे की राह

विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और नियमित अंतराल पर राज्यभर में छापेमारी की जाएगी। मुक्त कराए गए बच्चों की प्रगति की निगरानी के लिए संबंधित जिला अधिकारियों को जिम्मेदार बनाया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने बच्चे वास्तव में स्कूल की पाठशाला तक पहुँचेंगे और श्रम के चक्र से स्थायी रूप से बाहर निकलेंगे। ₹25,000 की एकमुश्त सहायता एक सकारात्मक पहल है, परंतु यदि परिवार की आर्थिक विवशता दूर न हो तो बच्चों के पुनः बाल श्रम में लौटने का जोखिम बना रहता है — यह पैटर्न देशभर में दोहराया जाता रहा है। अभियान की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नामांकन और पुनर्वास के आँकड़े सार्वजनिक रूप से सत्यापन-योग्य हों, न कि केवल प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार के बाल श्रम विरोधी अभियान में क्या हुआ?
20 मई से 30 मई 2026 के बीच बिहार के विभिन्न जिलों में 222 स्थानों पर छापेमारी की गई, जिसमें 122 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया और 60 नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई। यह अभियान श्रम संसाधन विभाग, पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयों के संयुक्त प्रयास से चलाया गया।
मुक्त कराए गए बाल श्रमिकों के पुनर्वास की क्या व्यवस्था है?
मुक्त किशोर श्रमिकों को मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹25,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके साथ ही उनके विद्यालय नामांकन और कौशल विकास के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वे पुनः श्रम के चक्र में न फँसें।
किन स्थानों पर बाल श्रम की जाँच की गई?
छापेमारी होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट, चाय की दुकानें, गैराज, कार्यशालाएँ, ईंट-भट्ठे, घरेलू और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर की गई। ये वे स्थान हैं जहाँ असंगठित क्षेत्र में बाल श्रम की सर्वाधिक आशंका रहती है।
बिहार सरकार का बाल श्रम उन्मूलन में क्या दावा है?
मंत्री अरुण शंकर प्रसाद के अनुसार, बिहार देश का पहला राज्य है जो मुक्त कराए गए किशोर श्रमिकों को मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से ₹25,000 की सीधी आर्थिक सहायता प्रदान करता है। सरकार बाल श्रम उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता बता रही है।
बाल श्रम कराने वाले नियोजकों के विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई?
इस अभियान में 60 नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर नियोजकों को कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
राष्ट्र प्रेस
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