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गुजरात में 'ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम': 14 दिनों में 84 बाल मजदूर मुक्त, 26 पर FIR

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गुजरात में 'ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम': 14 दिनों में 84 बाल मजदूर मुक्त, 26 पर FIR

सारांश

गुजरात पुलिस का 'ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम' महज कानूनी कार्रवाई नहीं — यह बाल श्रम की जड़ों पर चोट करने की कोशिश है। 14 दिनों में 84 बच्चे मुक्त, 26 पर FIR और बिहार-राजस्थान से जुड़े तस्करी नेटवर्क का खुलासा — यह अभियान राज्य की औद्योगिक इकाइयों में छिपी एक गहरी समस्या को उजागर करता है।

मुख्य बातें

गुजरात पुलिस के 'ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम' के पहले 14 दिनों में 84 बाल मजदूर मुक्त कराए गए।
26 आरोपियों के खिलाफ मामले दर्ज; 67 बच्चों का पुनर्वास पूरा, 160 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।
सूरत की 'जय अम्बे टेक्सटाइल्स' में दो नाबालिगों को मात्र ₹200 प्रतिदिन पर 11 घंटे काम कराया जा रहा था।
बचाए गए कई बच्चे बिहार और राजस्थान से आए प्रवासी — अंतर-राज्यीय तस्करी नेटवर्क की जांच जारी।
अभियान का लक्ष्य 50,000+ स्थानों की जांच और 5,000+ बाल मजदूरों को मुक्त कराना।

गुजरात पुलिस ने बाल श्रम के विरुद्ध राज्यव्यापी अभियान 'ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम' के पहले 14 दिनों में 84 बच्चों को शोषणकारी कामकाजी परिस्थितियों से मुक्त कराया और 26 आरोपियों के खिलाफ मामले दर्ज किए। गांधीनगर से संचालित यह एक महीने का अभियान उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य 'हर बच्चा स्कूल में, कोई बच्चा काम पर नहीं' सुनिश्चित करना है।

मुख्य घटनाक्रम

अभियान के तहत औद्योगिक क्लस्टर, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और असंगठित श्रम इकाइयों में प्रवर्तन कार्रवाई तेज की गई है। सूरत में कामरेज पुलिस ने सूचना के आधार पर 'जय अम्बे टेक्सटाइल्स' नामक इकाई पर छापा मारकर दो नाबालिग लड़कों को मुक्त कराया, जिन्हें कथित तौर पर जबरन काम पर लगाया गया था।

प्रारंभिक जांच के अनुसार इन बच्चों को प्रतिदिन मात्र ₹200 का भुगतान किया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि बच्चों से सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक — केवल एक घंटे के लंच ब्रेक के साथ — काम कराया जाता था। जब नाबालिगों ने काम करने से इनकार किया, तो उन्हें कथित तौर पर उनकी इच्छा के विरुद्ध वापस काम पर लौटने के लिए मजबूर किया गया।

पुलिस महानिदेशक की प्रतिक्रिया

पुलिस महानिदेशक (DGP) जी.एस. मलिक ने कहा, 'ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम' के पहले 14 दिनों में 84 बाल मजदूरों को बचाया गया और 26 आरोपियों पर मामले दर्ज किए गए। उन्होंने बताया कि अब तक 67 बच्चों का पुनर्वास किया जा चुका है और पूरे राज्य में 160 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं। मलिक के अनुसार यह ऑपरेशन केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं, बल्कि बचाए गए बच्चों के दीर्घकालिक पुनर्वास पर भी केंद्रित है।

अंतर-राज्यीय तस्करी का खतरा

सीआईडी क्राइम (महिला सेल) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अजय चौधरी ने बताया कि बाल मजदूरी के मामले टेक्सटाइल इकाइयों, होटलों, राइस मिलों और छोटे उद्योगों से सामने आए हैं। जांच से यह भी पता चला है कि बचाए गए कई बच्चे बिहार और राजस्थान से आए प्रवासी थे, जिससे अंतर-राज्यीय श्रम तस्करी नेटवर्क की आशंका उभरी है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान अब व्यक्तिगत नियोक्ताओं के साथ-साथ बच्चों की आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों और सप्लाई-चेन नेटवर्क को तोड़ने पर भी केंद्रित हो गया है।

चार-चरणीय रणनीति

चौधरी ने बताया कि अभियान को चार चरणों में बांटा गया है — पहले चरण में बाल श्रम हॉटस्पॉट की मैपिंग और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान; दूसरे में जांच और रेस्क्यू ऑपरेशन; तीसरे में बचाए गए बच्चों का पुनर्वास और स्कूलों में दाखिला; और चौथे में दोषियों व नेटवर्क के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई। गौरतलब है कि गरीबी, पलायन, स्कूल छोड़ना और सस्ते श्रम की माँग को बाल मजदूरी के प्रमुख कारण बताया गया है।

आगे का लक्ष्य

गुजरात पुलिस ने इस अभियान के तहत 50,000 से अधिक स्थानों की जांच, 10,000 खुफिया सूचनाएं एकत्र करने और 5,000 से अधिक बाल मजदूरों को मुक्त कराने का लक्ष्य रखा है। श्रम विभाग, बाल कल्याण समितियों, एनजीओ और शैक्षणिक संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय के जरिए खुफिया-आधारित निरीक्षण और अचानक छापेमारी जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ये बच्चे वहाँ पहुंचे कैसे — और क्यों बार-बार पहुंचते रहते हैं। बिहार और राजस्थान से जुड़े अंतर-राज्यीय प्रवासन नेटवर्क का खुलासा बताता है कि यह समस्या केवल गुजरात की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय श्रम प्रवासन नीति की विफलता का प्रतिबिंब है। टेक्सटाइल, होटल और राइस मिल जैसे क्षेत्र दशकों से सस्ते बाल श्रम पर निर्भर रहे हैं — एकल अभियान इस ढाँचे को नहीं तोड़ सकता। जब तक सप्लाई-चेन में भागीदार उद्योगों की जवाबदेही तय नहीं होती और स्रोत राज्यों में शिक्षा व आजीविका के विकल्प नहीं बढ़ते, 'ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम' एक चक्रीय राहत बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम' क्या है?
यह गुजरात पुलिस का राज्यव्यापी एक महीने का अभियान है जो बाल श्रम के विरुद्ध चलाया जा रहा है। इसके पहले 14 दिनों में 84 बच्चों को मुक्त कराया गया और 26 आरोपियों पर मामले दर्ज किए गए। अभियान उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में संचालित है।
बचाए गए बच्चों के साथ क्या किया जा रहा है?
बचाए गए बच्चों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अब तक 67 बच्चों का पुनर्वास पूरा हो चुका है और उन्हें स्कूलों में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया चल रही है। DGP जी.एस. मलिक के अनुसार दीर्घकालिक बेहतरी अभियान का अभिन्न हिस्सा है।
क्या इस अभियान में अंतर-राज्यीय तस्करी का भी पहलू है?
हाँ। जांच से पता चला है कि बचाए गए कई बच्चे बिहार और राजस्थान से आए प्रवासी थे। अतिरिक्त DGP अजय चौधरी के अनुसार इससे अंतर-राज्यीय श्रम तस्करी नेटवर्क की संभावना उभरी है, जिसकी जांच जारी है।
किन क्षेत्रों में सबसे अधिक बाल मजदूरी के मामले मिले?
टेक्सटाइल इकाइयों, होटलों, राइस मिलों और असंगठित छोटे उद्योगों में सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। सूरत की एक टेक्सटाइल इकाई में दो नाबालिगों को ₹200 प्रतिदिन पर 11 घंटे काम कराया जा रहा था।
इस अभियान का समग्र लक्ष्य क्या है?
गुजरात पुलिस का लक्ष्य 50,000 से अधिक स्थानों की जांच, 10,000 खुफिया सूचनाएं एकत्र करना और 5,000 से अधिक बाल मजदूरों को मुक्त कराना है। अभियान को चार चरणों में विभाजित किया गया है — मैपिंग, रेस्क्यू, पुनर्वास और कानूनी कार्रवाई।
राष्ट्र प्रेस
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