मुंबई: कांदिवली की नकली गहने फैक्ट्री से 13 बाल मजदूर मुक्त, मालिक-ऑपरेटर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई पुलिस ने 20 अगस्त 2026 को कांदिवली वेस्ट स्थित चारकोप इंडस्ट्रियल एस्टेट में नकली गहने बनाने वाली एक इकाई पर छापा मारकर 13 नाबालिग बाल मजदूरों को मुक्त कराया। बचाए गए सभी बच्चे पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों के रहने वाले बताए जा रहे हैं और उनकी उम्र 13 से 17 वर्ष के बीच है। यह कार्रवाई बाल श्रम के विरुद्ध मुंबई पुलिस के हालिया अभियान का हिस्सा है।
छापेमारी का घटनाक्रम
पुलिस ने 'जहारा फैशन एरा' नामक इकाई पर गुरुवार को अभियान चलाया। यह यूनिट नकली गहने और चूड़ियाँ बनाने का काम करती थी। छापेमारी के दौरान पुलिस को पता चला कि बच्चे कार्यस्थल पर ही रहते थे — यानी काम और आवास दोनों एक ही जगह थे, जो उनकी दयनीय स्थिति को उजागर करता है।
यूनिट के मालिक और ऑपरेटर किसी भी बच्चे की उम्र साबित करने वाले वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिससे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का आधार और मजबूत हो गया।
बच्चों की स्थिति और शोषण का स्वरूप
पुलिस के अनुसार, इन नाबालिगों से कथित तौर पर प्रतिदिन 9 से 10 घंटे काम करवाया जाता था और उन्हें उचित मजदूरी भी नहीं दी जाती थी। गौरतलब है कि बच्चों को पश्चिम बंगाल से मुंबई लाया गया था — यह तथ्य संभावित अंतर्राज्यीय बाल श्रम नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जिसकी जाँच अब पुलिस कर रही है।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने यूनिट के मालिक अंकित कुमार महेंद्र रावल और ऑपरेटर समीनुर मोतियार रहमान शेख को हिरासत में लिया है। दोनों के विरुद्ध बाल एवं किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम तथा किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बचाए गए सभी 13 नाबालिगों को आगे की देखभाल और आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित सरकारी विभाग को सौंप दिया गया है।
जाँच का दायरा
पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि इन बच्चों को पश्चिम बंगाल से मुंबई कौन लाया और क्या इस मामले के पीछे बाल श्रम से जुड़ा कोई बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में बाल तस्करी और अंतर्राज्यीय श्रम शोषण के मामलों पर चिंता बढ़ रही है। आगे की जाँच के नतीजे इस रैकेट की गहराई और व्यापकता को स्पष्ट करेंगे।