बिहार सरकार ने अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान की घोषणा की, सीमा क्षेत्रों पर ध्यान
सारांश
Key Takeaways
- अतिक्रमण हटाने की योजना 1 अप्रैल से शुरू होगी।
- सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आश्वासन दिया है।
- किसी भी कार्रवाई से पहले पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
- सरकार ने वित्तीय आवंटन का भी निर्णय लिया है।
- अधिकारियों को अतिक्रमण मामलों की सूची तैयार करने के लिए निर्देशित किया गया है।
पटना, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार सरकार ने राज्य में अतिक्रमण के खिलाफ एक व्यापक और संगठित मुहिम शुरू करने का निर्णय लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी जिलाधिकारियों, अपर समाहर्त्ताओं, भूमि सुधार उप समाहर्त्ताओं, अनुमंडल पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को एक अप्रैल से अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
उप मुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि राज्य में शहरी सौंदर्यीकरण और सुव्यवस्थित विकास के लिए अतिक्रमण हटाना आवश्यक है। सरकार इस कार्य को पूरी संवेदनशीलता के साथ कर रही है। गरीब और असहाय लोगों के जीवनयापन का ध्यान रखते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि उनका अतिक्रमण तभी हटाया जाए, जब उनके लिए रोजगार के विकल्प या पुनर्वास की उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं है, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण के साथ विकास को आगे बढ़ाना है, ताकि किसी भी जरूरतमंद की आजीविका प्रभावित न हो। सरकार की प्राथमिकताओं में मुख्य धारा से पीछे छूटी हुई आबादी का ध्यान रखना शामिल है।"
इसी क्रम में, प्रधान सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश देते हुए भारत-नेपाल सीमा से सटे सात जिलों के नो मैन्स लैंड में अतिक्रमण के मामलों को गंभीरता से लेने की सलाह दी है। इन मुद्दों के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा सीमांकन के लिए संयुक्त सर्वेक्षण कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। ऐसे में इन क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि गरीब और असहाय लोग अक्सर जीविकोपार्जन के लिए सार्वजनिक स्थानों का उपयोग करते हैं।
अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू करें। अतिक्रमण हटाने को शहरी सौंदर्यीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए सरकार ने इसके लिए वित्तीय आवंटन भी किया है। हाल ही में विभिन्न जिलों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। सभी अंचल अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे अतिक्रमण मामलों की सूची तैयार करें और उसका विधिवत संधारण करें।