क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का रिकॉर्ड मुनाफा: FY26 में शुद्ध लाभ ₹10,176 करोड़, GNPA घटकर 5.3%
सारांश
मुख्य बातें
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने इतिहास का सर्वश्रेष्ठ वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। वित्तीय सेवा विभाग की समीक्षा बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, देश के सभी 28 आरआरबी का संयुक्त शुद्ध लाभ बढ़कर ₹10,176 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया — जो वित्त वर्ष 2024-25 के ₹6,820 करोड़ की तुलना में करीब 49% अधिक है। यह उछाल ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र में बेहतर ऋण गुणवत्ता, बढ़ते कारोबार और वित्तीय समावेशन की गहरी पैठ का संकेत देता है।
मुख्य वित्तीय संकेतक
परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर भी आरआरबी ने उल्लेखनीय प्रगति की है। बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 5.3% पर आ गया है, जबकि शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NNPA) अनुपात 2.1% रह गया है। इसके साथ ही, ऋण-जमा अनुपात बढ़कर 75.2% के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया, जो दर्शाता है कि बैंक जमा राशि को अधिक प्रभावी ढंग से ऋण के रूप में वितरित कर रहे हैं।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, सभी 28 आरआरबी का कुल कारोबार ₹13.5 लाख करोड़ के आँकड़े को पार कर गया है — जो ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते विश्वास और वित्तीय गतिविधियों का प्रमाण है।
समीक्षा बैठक और भागीदार संस्थाएँ
आरआरबी के प्रदर्शन की इस उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने की। बैठक में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अध्यक्ष, सभी 28 आरआरबी के अध्यक्ष, प्रायोजक बैंकों के प्रतिनिधि, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी/SIDBI) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
ग्रामीण पहुँच और वित्तीय समावेशन
वर्तमान में ये 28 आरआरबी, 26 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में 22,273 शाखाओं के माध्यम से सेवाएँ दे रहे हैं और इनकी पहुँच देश के लगभग 700 जिलों तक है। वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इन बैंकों ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 54.98 लाख से अधिक नए खाते खोले। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में औपचारिक बैंकिंग की पहुँच बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है।
गौरतलब है कि आरआरबी प्राथमिकता क्षेत्र ऋण वितरण से जुड़े सभी लक्ष्यों और उप-लक्ष्यों को लगातार हासिल कर रहे हैं, जिससे समाज के कमज़ोर, वंचित और कम बैंकिंग सुविधा वाले वर्गों तक वित्तीय सेवाओं की पहुँच और मज़बूत हुई है।
सरकार की प्राथमिकताएँ और आगे की राह
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने बैठक में आरआरबी से आधुनिक बैंकिंग तकनीक और डिजिटल सेवाओं को तेज़ी से अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल बैंकिंग की सुविधाएँ दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक पहुँचनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने प्रायोजक बैंकों से अनुरोध किया कि वे आरआरबी को विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अवसंरचना मज़बूत करने में सक्रिय सहयोग दें।
सचिव ने सभी आरआरबी अध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्रों की ज़रूरतों के अनुसार ऋण वितरण बढ़ाने और नवाचारी ऋण उत्पाद विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह गति बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र भारत की समग्र वित्तीय स्थिरता में और बड़ी भूमिका निभा सकता है।