क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का रिकॉर्ड मुनाफा: वित्त वर्ष 2025-26 में ₹10,177 करोड़ का शुद्ध लाभ
सारांश
मुख्य बातें
देश के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹10,177 करोड़ का समेकित शुद्ध लाभ अर्जित किया — जो अब तक का सर्वाधिक है। नई दिल्ली में 28 जुलाई 2026 को राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में आरआरबी के वित्तीय प्रदर्शन में उल्लेखनीय और निरंतर सुधार दर्ज किया गया है।
मुख्य वित्तीय संकेतक
सरकार द्वारा साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, आरआरबी का सकल एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) अनुपात वित्त वर्ष 2023-24 के 6.1 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 5.4 प्रतिशत पर आ गया। यह सुधार बैंकों की साख गुणवत्ता में आई मजबूती का संकेत है।
इसके साथ ही, आरआरबी की नेटवर्थ भी लगातार बढ़ी है — जो पहले ₹56,780 करोड़, फिर वित्त वर्ष 2023-24 में ₹63,927 करोड़ और अब वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹74,086 करोड़ पर पहुँच गई है। कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट रेशियो (सीआरएआर), जमा, ऋण वितरण और क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) अनुपात जैसे प्रमुख मानकों पर भी बैंकों का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
सरकार की निगरानी व्यवस्था
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर आरआरबी के प्रदर्शन और वित्तीय स्थिति की नियमित समीक्षा करती है। वित्त मंत्रालय का वित्तीय सेवा विभाग समय-समय पर आरआरबी और उनके प्रायोजक बैंकों के साथ विभिन्न स्तरों पर बैठकें आयोजित करता है।
इन समीक्षा बैठकों में वित्तीय प्रदर्शन के मूल्यांकन के साथ-साथ तकनीकी उन्नयन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में ऋण विस्तार, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों तथा खुदरा ऋण पोर्टफोलियो के विविधीकरण पर विशेष जोर दिया जाता है।
वित्तीय समावेशन पर जोर
सरकार ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करने के लिए भी आरआरबी की प्रगति की निगरानी करती है। प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई), प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) जैसी प्रमुख योजनाओं के लक्ष्य वित्तीय सेवा विभाग द्वारा निर्धारित किए जाते हैं और उनकी नियमित निगरानी की जाती है।
गौरतलब है कि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ऋण की माँग बढ़ रही है और कृषि क्षेत्र को संस्थागत वित्त पोषण की अधिक आवश्यकता है।
आगे की राह
आँकड़ों के अनुसार, आरआरबी की बेहतर होती वित्तीय सेहत ग्रामीण भारत में ऋण प्रवाह को और गति दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि एनपीए में गिरावट और नेटवर्थ में वृद्धि बैंकों को भविष्य में अधिक आक्रामक तरीके से कृषि और एमएसएमई ऋण वितरण करने में सक्षम बनाएगी।