सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त मंत्री सीतारमण को सौंपा ₹9,400 करोड़ से अधिक का डिविडेंड, बैंक ऑफ बड़ौदा सबसे आगे
सारांश
मुख्य बातें
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) ने 29 जून 2026 को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ₹9,400 करोड़ से अधिक के डिविडेंड चेक सौंपे। यह भुगतान ऐसे समय में हुआ है जब इन बैंकों ने बीते वित्त वर्ष में रिकॉर्ड मुनाफा, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और मजबूत बैलेंस शीट का प्रदर्शन किया।
बैंक ऑफ बड़ौदा सबसे आगे
बैंक ऑफ बड़ौदा ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सबसे अधिक ₹2,811 करोड़ का डिविडेंड चेक वित्त मंत्री को सौंपा। यह चेक बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. देबदत्त चंद ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय लोहिया और बैंक के कार्यकारी निदेशकों की उपस्थिति में प्रदान किया।
गौरतलब है कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सर्वाधिक ₹20,021 करोड़ का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ दर्ज किया — यह पहला अवसर है जब बैंक का वार्षिक मुनाफा ₹20,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया। इसके साथ ही 31 मार्च 2026 तक बैंक का कुल वैश्विक कारोबार ₹30 लाख करोड़ के स्तर से ऊपर पहुंच गया। बैंक ने प्रति शेयर ₹8.50 का डिविडेंड घोषित किया है, जो ₹2 अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर पर 425% के बराबर है।
अन्य प्रमुख बैंकों का योगदान
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने वित्त मंत्री को ₹2,416 करोड़ का डिविडेंड चेक सौंपा। यह चेक बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक चंद्र ने प्रदान किया।
केनरा बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹2,397 करोड़ का डिविडेंड चेक सौंपा, जो बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ बृजेश कुमार सिंह ने वित्त मंत्री को दिया। वहीं, इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ बिनोद कुमार ने ₹1,815 करोड़ का डिविडेंड चेक वित्त मंत्री को सौंपा।
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
यह डिविडेंड भुगतान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की उस वित्तीय पुनर्बहाली का प्रतिबिंब है, जो पिछले कुछ वर्षों में देखी गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन बैंकों ने न केवल रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया, बल्कि गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में भी उल्लेखनीय कमी आई और बैलेंस शीट पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ हुई।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार इन सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सबसे बड़ी शेयरधारक है, और डिविडेंड राजस्व सरकार की गैर-कर प्राप्तियों में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का यह मजबूत प्रदर्शन न केवल सरकारी खजाने के लिए लाभकारी है, बल्कि इससे बैंकिंग प्रणाली में जमाकर्ताओं और उधारकर्ताओं दोनों का विश्वास भी बढ़ता है। बेहतर पूंजी स्थिति के चलते ये बैंक भविष्य में ऋण वितरण और आर्थिक विकास में और सक्रिय भूमिका निभाने में सक्षम होंगे।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि PSB का यह प्रदर्शन जारी रहा, तो आने वाले वित्त वर्षों में सरकार को मिलने वाला डिविडेंड और भी बढ़ सकता है। बैंकिंग क्षेत्र की यह मजबूती भारत की समग्र आर्थिक स्थिरता का एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।