यूपी में पनीर मिलावट पर योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई: 25 इकाइयाँ जाँच में, 7,686 किलो सामग्री नष्ट, 6 FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में पनीर और दुग्ध उत्पादों में मिलावट के खिलाफ योगी सरकार ने 14 अगस्त 2026 को एक बड़ा प्रवर्तन अभियान चलाया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की 24 विशेष टीमों ने गाजियाबाद, मथुरा और सहारनपुर में एक साथ छापेमारी की, जिसमें 25 विनिर्माण इकाइयों में गंभीर अनियमितताएँ उजागर हुईं। अभियान के दौरान 7,686 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई और 6 एफआईआर दर्ज की गईं।
अभियान की पृष्ठभूमि और संरचना
विभाग के अनुसार, प्राप्त अभिसूचना और जनहित को ध्यान में रखते हुए आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश के निर्देश पर यह विशेष टीमें गठित की गई थीं। तीनों जिलों की प्रमुख दुग्ध एवं दुग्ध पदार्थ निर्माण इकाइयों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। उल्लेखनीय है कि 3 इकाइयाँ निरीक्षण के समय नॉन-ऑपरेशनल पाई गईं।
मुख्य उल्लंघन: रसायन और अस्वच्छ परिस्थितियाँ
जाँच के दौरान कुछ इकाइयों में पनीर निर्माण में औद्योगिक प्रयोग वाले रसायनों तथा पामोलिन ऑयल/रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल के मामले सामने आए। इसके अलावा कई स्थानों पर खाद्य पदार्थों का निर्माण अस्वास्थ्यकर एवं अस्वच्छ परिस्थितियों में होता पाया गया। टीमों ने कच्चे माल, तैयार उत्पाद और निर्माण प्रक्रिया — तीनों स्तरों पर जाँच की।
जब्ती और नुकसान का ब्यौरा
अनियमितता मिलने पर संबंधित खाद्य सामग्री को तत्काल नष्ट कराया गया। विभाग के अनुसार, 7,686 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट की गई जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹10 लाख है। इसके अतिरिक्त 2,131 किलोग्राम खाद्य सामग्री एवं अपमिश्रक जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब ₹4.75 लाख है। इस प्रकार अभियान में कुल 9,817 किलोग्राम खाद्य सामग्री एवं अपमिश्रकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
एफआईआर और कानूनी कार्रवाई
गंभीर मामलों में कुल 6 एफआईआर दर्ज की गई हैं। औद्योगिक रसायनों एवं अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों से जुड़े 5 मामलों में एफआईआर दर्ज हुई, जबकि सरकारी कार्य में बाधा डालने के एक अलग मामले में भी प्राथमिकी दर्ज की गई। जिलेवार देखें तो गाजियाबाद में 3 और मथुरा में 2 एफआईआर दर्ज की गई हैं। सहारनपुर में भी संबंधित अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई।
नमूने और आगे की जाँच
अभियान के दौरान कुल 72 खाद्य नमूने एकत्र किए गए, जिन्हें प्रयोगशाला जाँच के लिए भेजा जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जाँच रिपोर्ट में नमूने निर्धारित मानकों के विपरीत पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। विभाग के अनुसार, प्रदेश में दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान आगे भी जारी रहेंगे।