29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बैंकों ने वित्त वर्ष 23-26 में ₹26,170 करोड़ न्यूनतम बैलेंस शुल्क वसूले, संसद में सरकार का खुलासा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बैंकों ने वित्त वर्ष 23-26 में ₹26,170 करोड़ न्यूनतम बैलेंस शुल्क वसूले, संसद में सरकार का खुलासा

सारांश

चार वर्षों में ₹26,170 करोड़ की वसूली — और इसमें निजी बैंकों का हिस्सा सरकारी बैंकों से दोगुना। संसद में पेश आंकड़े बताते हैं कि न्यूनतम बैलेंस शुल्क का बोझ किस पर सबसे भारी पड़ रहा है।

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 2023 से 2026 के बीच बैंकों ने न्यूनतम बैलेंस न रखने पर ₹26,170 करोड़ से अधिक वसूले।
केवल वित्त वर्ष 2026 में ₹7,086.63 करोड़ वसूले गए; निजी बैंकों की हिस्सेदारी ₹4,948.71 करोड़ ।
एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2026 में सर्वाधिक ₹1,798.14 करोड़ वसूले, इसके बाद एक्सिस बैंक ने ₹1,081.33 करोड़ ।
SBI ने मार्च 2020 से बचत खातों पर न्यूनतम बैलेंस पेनाल्टी समाप्त कर दी है; उसके आंकड़े केवल चालू खातों के हैं।
12 में से 10 सार्वजनिक बैंकों ने बचत खातों पर न्यूनतम बैलेंस शुल्क पूरी तरह हटा दिया है।
लगभग 73 करोड़ BSBDA खाते — जिनमें PMJDY खाते शामिल हैं — न्यूनतम बैलेंस अनिवार्यता से मुक्त हैं।

संसद में सरकार द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार, देश के बैंकों ने वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2026 के बीच चार वर्षों में खातों में न्यूनतम औसत शेष राशि न बनाए रखने पर ग्राहकों से ₹26,170 करोड़ से अधिक की पेनाल्टी वसूली है। राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के लिखित जवाब में यह जानकारी सामने आई, जिसमें निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बीच स्पष्ट असमानता उजागर हुई है।

वित्त वर्ष 2026 में कितनी वसूली हुई

केवल वित्त वर्ष 2026 में बैंकों ने न्यूनतम बैलेंस शुल्क के रूप में ₹7,086.63 करोड़ वसूले। इनमें निजी क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी ₹4,948.71 करोड़ रही, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा वसूले गए ₹2,137.92 करोड़ से दोगुने से भी अधिक है।

किस बैंक ने सबसे अधिक वसूला

निजी बैंकों में एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2026 में सर्वाधिक ₹1,798.14 करोड़ न्यूनतम बैलेंस शुल्क के रूप में वसूले। इसके बाद एक्सिस बैंक ने ₹1,081.33 करोड़ वसूले। इन दोनों बैंकों की मिलाकर हिस्सेदारी निजी क्षेत्र के कुल शुल्क का लगभग 58 प्रतिशत रही।

अन्य प्रमुख निजी बैंकों में आईसीआईसीआई बैंक ने ₹353.50 करोड़, कोटक महिंद्रा बैंक ने ₹290.65 करोड़, यस बैंक ने ₹195.05 करोड़ और आईडीबीआई बैंक ने ₹175.15 करोड़ वसूले।

सार्वजनिक क्षेत्र में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सबसे आगे रहा, जिसने ₹477.27 करोड़ वसूले। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ने ₹394.10 करोड़ और इंडियन बैंक ने ₹299.17 करोड़ वसूले। गौरतलब है कि SBI द्वारा बताई गई यह राशि केवल चालू खातों (करंट अकाउंट) से संबंधित है, क्योंकि बैंक ने मार्च 2020 से बचत खातों पर न्यूनतम बैलेंस पेनाल्टी समाप्त कर दी है।

सार्वजनिक बैंकों की बदलती नीति

सरकार ने स्पष्ट किया कि हाल के वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने इस तरह के शुल्क में उल्लेखनीय कमी की है। 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से 10 ने बचत खातों में न्यूनतम औसत बैलेंस न रखने पर लगने वाले शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। शेष दो बैंकों ने अपने बोर्ड-अनुमोदित नीतियों और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप इन शुल्कों को तर्कसंगत बनाया है।

जन धन खातों को राहत

वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) — जिनमें प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत खोले गए खाते भी शामिल हैं — न्यूनतम बैलेंस की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त हैं। वर्तमान में ऐसे लगभग 73 करोड़ BSBDA खातों पर किसी प्रकार का जुर्माना नहीं लगता। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वित्तीय समावेशन की दिशा में सरकार की नीतियाँ व्यापक जनाधार वाले खातों को संरक्षण दे रही हैं, जबकि निजी बैंकों में शुल्क-वसूली का दबाव मध्यम वर्ग के खाताधारकों पर बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

170 करोड़ का यह आंकड़ा महज एक वित्तीय तथ्य नहीं — यह उस असमानता का दर्पण है जो सार्वजनिक और निजी बैंकिंग के बीच गहरी होती जा रही है। जहाँ सरकारी बैंकों ने राजनीतिक दबाव और नीतिगत दिशा में शुल्क घटाए, वहीं निजी बैंकों ने इसे राजस्व के एक स्थिर स्रोत की तरह बनाए रखा। असली सवाल यह है कि क्या RBI और वित्त मंत्रालय निजी बैंकों के लिए भी वही मानक लागू करेंगे जो सार्वजनिक बैंकों पर थोपे गए — या यह खुलासा संसद की फाइलों तक सीमित रहेगा।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैंकों ने वित्त वर्ष 23 से 26 के बीच न्यूनतम बैलेंस शुल्क से कितनी राशि वसूली?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बैंकों ने इन चार वर्षों में ₹26,170 करोड़ से अधिक की पेनाल्टी वसूली। यह जानकारी राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के लिखित जवाब में सामने आई।
न्यूनतम बैलेंस शुल्क में निजी और सरकारी बैंकों का अंतर कितना है?
वित्त वर्ष 2026 में निजी बैंकों ने ₹4,948.71 करोड़ वसूले, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ₹2,137.92 करोड़ — यानी निजी बैंकों की वसूली सरकारी बैंकों से दोगुने से भी अधिक रही।
कौन-सा बैंक न्यूनतम बैलेंस शुल्क में सबसे आगे रहा?
निजी बैंकों में एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2026 में सर्वाधिक ₹1,798.14 करोड़ वसूले, इसके बाद एक्सिस बैंक ने ₹1,081.33 करोड़। सार्वजनिक बैंकों में SBI ₹477.27 करोड़ के साथ शीर्ष पर रहा।
क्या जन धन या बेसिक सेविंग्स खातों पर भी न्यूनतम बैलेंस शुल्क लगता है?
नहीं। BSBDA खाते — जिनमें PMJDY के तहत खोले गए खाते शामिल हैं — न्यूनतम बैलेंस की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त हैं। वर्तमान में लगभग 73 करोड़ ऐसे खातों पर कोई पेनाल्टी नहीं लगती।
क्या SBI बचत खातों पर न्यूनतम बैलेंस शुल्क लेता है?
नहीं। SBI ने मार्च 2020 से बचत खातों पर न्यूनतम बैलेंस न रखने की पेनाल्टी समाप्त कर दी है। संसद में पेश उसके आंकड़े केवल चालू खातों (करंट अकाउंट) से संबंधित हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले