क्या नए श्रम कानूनों से निजी बैंकों और बीमा कंपनियों का खर्च बढ़ा है?

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क्या नए श्रम कानूनों से निजी बैंकों और बीमा कंपनियों का खर्च बढ़ा है?

सारांश

नए श्रम कानूनों के लागू होने से निजी बैंकों और बीमा कंपनियों पर कर्मचारियों से जुड़ा खर्च बढ़ा है। जानें कैसे एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और अन्य बैंकों ने अपने ओपेक्स में वृद्धि देखी है।

Key Takeaways

  • नए श्रम कानूनों के कारण परिचालन व्यय में वृद्धि हुई है।
  • बैंकों ने कर्मचारियों की लागत में बढ़ोतरी की है।
  • निजी बीमा कंपनियों पर भी असर पड़ा है।
  • सरकारी बैंकों को कम असर का सामना करना पड़ा है।
  • कर्मचारियों के अधिकारों में सुधार की उम्मीद है।

नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार द्वारा नवंबर 2025 में लागू किए गए नए श्रम कानूनों (न्यू लेबर कोड्स) के कारण निजी क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों पर कर्मचारियों से जुड़ा खर्च बढ़ गया है। वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर से दिसंबर 2025 की तिमाही में इन कंपनियों की परिचालन व्यय (ऑपरेटिंग एक्सपेंस या ओपेक्स) पहले की तुलना में अधिक रही है।

देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 18,770 करोड़ रुपए का परिचालन व्यय दर्ज किया, जबकि पिछले साल के इसी तिमाही में यह खर्च 17,110 करोड़ रुपए था।

एक्सचेंज फाइलिंग में एचडीएफसी बैंक ने बताया कि नए श्रम कानूनों की वजह से 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों की अवधि के दौरान कर्मचारियों की लागत में करीब 800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त असर पड़ा है। यह असर लाभ और हानि खाते में जोड़ा गया है।

बैंक ने यह भी कहा कि वह केंद्र और राज्य सरकारों के नियमों और स्पष्टीकरणों पर नजर बनाए हुए है और आगे जरूरत पड़ने पर लेखांकन में बदलाव करेगा।

इसी तरह, आईसीआईसीआई बैंक ने कहा कि नए श्रम कानूनों के कारण इस तिमाही में उसके लाभ-हानि खाते पर करीब 145 करोड़ रुपए का असर पड़ा है।

यस बैंक ने भी नए नियमों की वजह से 155 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च जोड़ा है। वहीं, फेडरल बैंक ने 20.8 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है और आरबीएल बैंक ने करीब 32 करोड़ रुपए के अतिरिक्त खर्च का अनुमान लगाया है।

निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों पर भी नए श्रम कानूनों का असर पड़ा है। एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस ने कर्मचारियों से जुड़े लाभों के लिए 106.02 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान किया है, जिसे कंपनी की कुल आय से घटाया गया है।

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने 11.04 करोड़ रुपए और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस ने 53.06 करोड़ रुपए के असर का अनुमान लगाया है।

इसके उलट, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वेतन संरचना पहले से ही नए नियमों के काफी करीब थी, इसलिए उन्हें उसमें कोई बड़ा बदलाव या अतिरिक्त प्रावधान करने की जरूरत नहीं पड़ी।

विश्लेषकों के अनुसार, नए श्रम कानूनों के तहत वेतन संरचना में बदलाव होगा। इसमें बेसिक सैलरी और कुछ जरूरी भत्तों का हिस्सा बढ़ेगा। इससे नियोक्ताओं को कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और पेंशन फंड में ज्यादा पैसा जमा करना पड़ेगा, जिससे कंपनियों का खर्च बढ़ेगा।

21 नवंबर 2025 को भारत सरकार ने चार नए श्रम कानूनों को अधिसूचित किया था। इनमें वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता 2020 शामिल हैं। इन्हें सामूहिक रूप से 'न्यू लेबर कोड्स' कहा जाता है, जो पहले के 29 श्रम कानूनों को एक साथ जोड़ते हैं।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने पिछले महीने इन नए नियमों से जुड़ा मसौदा केंद्रीय नियम और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न जारी किए थे, ताकि कंपनियां इन बदलावों के आर्थिक असर का आकलन कर सकें। इसके बाद बैंकों और बीमा कंपनियों ने अपने लाभ-हानि खातों में अतिरिक्त खर्च का अनुमान लगाया है।

Point of View

बल्कि समस्त भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। नए श्रम कानूनों का प्रभाव आने वाले समय में व्यापक रूप से महसूस किया जाएगा, जिससे सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारियों के अधिकारों में सुधार की उम्मीद है।
NationPress
19/01/2026

Frequently Asked Questions

नए श्रम कानूनों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
नए श्रम कानूनों का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके वेतन में सुधार करना है।
इन कानूनों का बैंकों पर क्या प्रभाव पड़ा है?
इन कानूनों के कारण बैंकों के परिचालन व्यय में वृद्धि हुई है, जिससे उन्हें कर्मचारियों की लागत में बढ़ोतरी करनी पड़ी है।
क्या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर भी इसका असर होगा?
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वेतन संरचना पहले से ही नए नियमों के करीब थी, इसलिए उन्हें अधिक बदलाव की आवश्यकता नहीं पड़ी।
क्या कंपनियां नए नियमों का पालन करेंगी?
हां, कंपनियां केंद्र और राज्य सरकारों के नियमों का पालन करने के लिए तत्पर हैं और आवश्यकतानुसार लेखांकन में बदलाव करेंगी।
क्या इससे कर्मचारियों को लाभ होगा?
हां, नए श्रम कानूनों से कर्मचारियों के लाभ और सुरक्षा में सुधार होगा।
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