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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: मेरठ की 7 सीटों पर 2022 में सपा-रालोद ने जीती थीं 4, भाजपा को मिली थीं 3

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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: मेरठ की 7 सीटों पर 2022 में सपा-रालोद ने जीती थीं 4, भाजपा को मिली थीं 3

सारांश

2027 के यूपी चुनाव की तैयारी में मेरठ की 7 सीटें फिर से केंद्र में हैं। 2022 में सपा-रालोद गठबंधन ने 4 सीटें जीती थीं और भाजपा को 3 से संतोष करना पड़ा था। मेरठ दक्षिण और हस्तिनापुर में जीत का अंतर इतना कम था कि 2027 में हर वोट निर्णायक होगा।

मुख्य बातें

मेरठ जिले की 7 विधानसभा सीटों पर 2022 में सपा-रालोद गठबंधन ने 4 और भाजपा ने 3 सीटें जीती थीं।
मेरठ कैंट से भाजपा के अमित अग्रवाल ( 1,62,032 वोट ), मेरठ दक्षिण से सोमेंद्र तोमर ( 1,29,667 ) और हस्तिनापुर से दिनेश खटिक ( 1,07,587 ) वर्तमान भाजपा विधायक हैं।
मेरठ शहर से सपा के रफीक अंसारी ने भाजपा को 26,065 वोटों के बड़े अंतर से हराया था।
किठौर में सर्वाधिक 69.45% और मेरठ कैंट में सबसे कम 56.84% मतदान हुआ था।
2027 के लिए जाट, मुस्लिम और दलित मतदाताओं का समीकरण सभी दलों की प्राथमिकता है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी रणनीतियाँ तैयार करनी शुरू कर दी हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की 7 विधानसभा सीटों पर सियासी समीकरण बनने लगे हैं, जहाँ 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा)-राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) गठबंधन ने 4 सीटें जीती थीं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को केवल 3 सीटों से संतोष करना पड़ा था। इस पृष्ठभूमि में नेता जातीय और सामाजिक समीकरण साधने में जुटे हुए हैं।

मेरठ जिले का राजनीतिक परिचय

मेरठ दिल्ली-एनसीआर में शामिल एक ऐतिहासिक जिला है, जो प्राचीन नगर हस्तिनापुर का उत्तराधिकारी माना जाता है — महाभारत काल में यह कौरव राज्य की राजधानी थी। इसे 'भारत का खेल नगर' भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ विशाल खेल उद्योग है। इसके अलावा चीनी मिलें और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग भी यहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

जिले में मेरठ शहर, मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण, सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर और किठौर — ये सात विधानसभा सीटें हैं। प्रशासनिक रूप से जिले में तीन तहसीलें, 12 ब्लॉक और 662 गाँव हैं।

2022 में सीटवार मतदान के आँकड़े

मेरठ कैंट सीट पर भाजपा के अमित अग्रवाल ने 1,62,032 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। रालोद की मनीषा अहलावत को 43,960, बसपा के अमित शर्मा को 28,519 और कांग्रेस के अवनीश काजला को 5,096 वोट मिले थे। इस सीट पर 56.84 फीसदी मतदान हुआ था।

मेरठ शहर सीट पर सपा के रफीक अंसारी ने 1,06,395 वोट (52.77%) पाकर भाजपा के कमल शर्मा को 26,065 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। रालोद के रंजन शर्मा को 5,333 और बसपा के दिलशाद को 493 वोट मिले थे। कुल 64.56 फीसदी मतदान हुआ।

मेरठ दक्षिण से भाजपा के सोमेंद्र तोमर विधायक हैं, जिन्हें 2022 में 1,29,667 वोट मिले थे। सपा के मोहम्मद आदिल चौधरी को 1,21,725 और बसपा के कुंवर दिलशाद अली को 39,857 वोट मिले — यह मुकाबला काफी करीबी रहा।

सिवालखास सीट पर रालोद के गुलाम मोहम्मद ने 1,01,749 वोट से जीत हासिल की। भाजपा के मनेंद्र पाल सिंह को 92,567, बसपा के मुकर्रम अली खान को 29,958 और एआईएमआईएम के रफत खान को 3,019 वोट मिले।

सरधना से सपा के अतुल प्रधान मौजूदा विधायक हैं। 2022 में उन्हें 1,18,573 वोट मिले, जबकि भाजपा के संगीत सिंह सोम को 1,00,373 और बसपा के संजीव धामा को 18,140 वोट मिले थे। इस सीट पर 67.22 फीसदी मतदान दर्ज हुआ था।

हस्तिनापुर सीट से भाजपा के दिनेश खटिक विधायक हैं, जिन्हें 2022 में 1,07,587 वोट मिले। सपा के योगेश वर्मा को 1,00,275, बसपा के संजीव कुमार जाटव को 14,240 और एआईएमआईएम के विनोद जाटव को 4,290 वोट मिले थे। 66.84 फीसदी मतदान हुआ।

किठौर सीट पर सपा के शाहिद मंजूर ने 1,07,104 वोट से जीत दर्ज की। भाजपा के सत्यवीर त्यागी को 1,04,924, बसपा के कुशल पाल को 31,213 और एआईएमआईएम के तसलीम अहमद को 4,833 वोट मिले। इस सीट पर 69.45 फीसदी मतदान हुआ — जो जिले में सर्वाधिक था।

2022 के नतीजों का सार

2022 विधानसभा चुनाव में मेरठ जिले की 7 में से 4 सीटें सपा-रालोद गठबंधन के खाते में गईं — मेरठ शहर, सिवालखास, सरधना और किठौर। भाजपा ने मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण और हस्तिनापुर सीटें जीती थीं। गौरतलब है कि मेरठ दक्षिण और हस्तिनापुर जैसी सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर काफी कम रहा, जो 2027 में इन्हें संवेदनशील बनाता है।

2027 के लिए सियासी बिसात

यह ऐसे समय में आया है जब सपा और रालोद के बीच गठबंधन की भावी स्थिति अभी अनिश्चित है, और भाजपा अपने खोए हुए मतदाताओं को वापस लाने की रणनीति पर काम कर रही है। मेरठ में जाट, मुस्लिम और दलित मतदाताओं का निर्णायक प्रभाव है, और ये समीकरण ही 2027 के नतीजों की दिशा तय करेंगे। आने वाले महीनों में प्रत्येक सीट पर उम्मीदवारों के नाम और जातीय गणित पर राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 2027 तक यह गठबंधन अनिश्चित है। भाजपा के लिए चेतावनी यह है कि मेरठ दक्षिण और हस्तिनापुर जैसी 'जीती' सीटें दरअसल बेहद करीबी रहीं — हज़ारों वोटों का फर्क मामूली है। विपक्ष का बिखराव और बसपा का मत-प्रतिशत भाजपा के काम आया था; यदि 2027 में विपक्ष एकजुट रहा, तो समीकरण पलट सकते हैं। मेरठ पश्चिमी यूपी की नब्ज़ है और यहाँ के नतीजे पूरे क्षेत्र की राजनीतिक दिशा का संकेत देते हैं।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2022 में मेरठ जिले की कितनी विधानसभा सीटें भाजपा ने जीती थीं?
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मेरठ जिले की 7 में से 3 सीटें — मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण और हस्तिनापुर — जीती थीं। शेष 4 सीटें सपा-रालोद गठबंधन के खाते में गई थीं।
मेरठ में सपा-रालोद गठबंधन ने 2022 में कौन-सी सीटें जीती थीं?
सपा-रालोद गठबंधन ने 2022 में मेरठ शहर (सपा), सिवालखास (रालोद), सरधना (सपा) और किठौर (सपा) — ये चार सीटें जीती थीं। इन सभी सीटों पर जीत का अंतर उल्लेखनीय था।
2027 के यूपी चुनाव के लिए मेरठ में कौन-से प्रमुख मुद्दे हैं?
मेरठ में जाट, मुस्लिम और दलित मतदाताओं का समीकरण 2027 में निर्णायक होगा। गठबंधन की स्थिति और उम्मीदवार चयन के साथ-साथ स्थानीय खेल उद्योग, चीनी मिलें और रोज़गार भी मतदाताओं के प्रमुख सरोकार माने जा रहे हैं।
मेरठ की सबसे करीबी विधानसभा सीट 2022 में कौन-सी थी?
किठौर सबसे करीबी सीटों में रही, जहाँ सपा के शाहिद मंजूर ने 1,07,104 वोटों से भाजपा के सत्यवीर त्यागी (1,04,924 वोट) को केवल 2,180 वोटों के अंतर से हराया था। मेरठ दक्षिण भी बेहद करीबी रही, जहाँ भाजपा की जीत का अंतर करीब 7,942 वोटों का था।
मेरठ जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं और कौन-कौन सी हैं?
मेरठ जिले में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं: मेरठ शहर, मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण, सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर और किठौर। जिले में 3 तहसीलें, 12 ब्लॉक और 662 गाँव हैं।
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