यूपी 2027: सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा का दावा — भाजपा सहयोगी दलों का होगा सफाया, बदलाव की लहर तेज
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 22 अगस्त को लखनऊ में दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के पक्ष में जनमत तेज़ी से बन रहा है और प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) महंगाई और बेरोज़गारी जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए जातीय टकराव का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।
मुख्य आरोप: जातीय विभाजन की राजनीति
मेहरोत्रा ने कहा कि भाजपा सरकार चुनाव से पहले दलित, पिछड़े और सवर्ण समाज के बीच विवाद पैदा करना चाहती है, ताकि जनता महंगाई, बेरोज़गारी और अन्य बुनियादी समस्याओं पर सवाल न उठाए। उन्होंने इसे जनता को गुमराह करने की सोची-समझी रणनीति बताया। यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ सभी दलों में तेज़ हो चुकी हैं।
जयंत चौधरी और 'चवन्नी' विवाद पर प्रतिक्रिया
सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा जयंत चौधरी को लेकर की गई 'चवन्नी' टिप्पणी पर मेहरोत्रा ने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) को मिली आठ सीटें दरअसल सपा की लहर का परिणाम थीं। उन्होंने दावा किया कि जयंत चौधरी बाद में सपा विधायकों के समर्थन से राज्यसभा पहुँचे। मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि जयंत चौधरी ने गठबंधन धर्म तोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया, जबकि गठबंधन को पाँच वर्षों तक निभाया जाना चाहिए था। उन्होंने जयंत चौधरी से अपील की कि यदि उन्हें अपनी लोकप्रियता पर भरोसा था, तो उन्हें जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ना चाहिए था।
बसपा पर निशाना: भाजपा की 'बी-टीम' का आरोप
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती द्वारा अखिलेश यादव की टिप्पणी पर माफ़ी माँगने की माँग पर मेहरोत्रा ने पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा भाजपा की 'बी-टीम' बन चुकी है और भाजपा जो एजेंडा चाहती है, बसपा वही मुद्दे उठाती है। हालाँकि उन्होंने चौधरी चरण सिंह के राजनीतिक योगदान का सम्मान करते हुए जयंत चौधरी से उनके पिता और दादा के विचारों को पढ़ने की अपील भी की।
चीनी की महंगाई और इथेनॉल नीति पर सवाल
मेहरोत्रा ने चीनी की बढ़ती कीमतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि गन्ने का बड़ा हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने के कारण चीनी का उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे बाज़ार में आपूर्ति घटी और कीमतें बढ़ीं। उनके अनुसार, इस महंगाई का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।
आगे क्या
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी डेढ़ वर्ष से अधिक का समय है, लेकिन सभी प्रमुख दल — सपा, भाजपा, बसपा और कांग्रेस — अभी से अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। मेहरोत्रा के इन बयानों को सपा की चुनावी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें जातीय समीकरण और महंगाई को केंद्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश स्पष्ट दिखती है।