30 अगस्त 2026
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रविदास मेहरोत्रा का BJP पर हमला: मिलावटी मसालों से कैंसर, 2027 में सपा सरकार तय

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रविदास मेहरोत्रा का BJP पर हमला: मिलावटी मसालों से कैंसर, 2027 में सपा सरकार तय

सारांश

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने एक साथ कई मोर्चों पर BJP को घेरा — मिलावटी मसालों से कैंसर का खतरा, हल्द्वानी में दलित अपमान, और NDA में दरार। 2027 में सत्ता परिवर्तन का दावा करते हुए उन्होंने पीडीए फॉर्मूले को अजेय बताया।

मुख्य बातें

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 29 अगस्त को लखनऊ में BJP सरकार पर कई मुद्दों पर हमला बोला।
एवेरेस्ट के हींग, गरम मसाला और मीट मसाला में मिलावट पाए जाने के बाद लगे प्रतिबंध को उन्होंने कैंसर के बढ़ते मामलों से जोड़ा।
उन्होंने जयंत चौधरी के भाजपा के साथ जाने को चौधरी चरण सिंह की किसान-केंद्रित राजनीति के विरुद्ध बताया।
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित शुद्धिकरण को दलित-विरोधी भेदभाव करार दिया।
मेहरोत्रा ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सरकार बनना तय है।

समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 29 अगस्त को लखनऊ में केंद्र और उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर कई मोर्चों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कथित मिलावटी खाद्य उत्पादों, दलित आरक्षण में क्रीमी लेयर विवाद, दलितों के साथ भेदभाव और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर आंतरिक मतभेदों को लेकर सरकार को घेरा। मेहरोत्रा ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के पक्ष में जनमत बन चुका है और 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन सुनिश्चित है।

मिलावटी मसाले और सार्वजनिक स्वास्थ्य

एवेरेस्ट ब्रांड की हींग, गरम मसाला और मीट मसाला पर जाँच में मिलावट पाए जाने के बाद लगे प्रतिबंध के संदर्भ में मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में देशभर में और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में नकली व मिलावटी सामान की बिक्री बेरोकटोक जारी है। उनका कहना था कि बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को देश में कैंसर के बढ़ते मामलों से जोड़ते हुए सरकार को सीधे जिम्मेदार ठहराया।

गौरतलब है कि खाद्य मिलावट का मुद्दा उत्तर प्रदेश में बार-बार राजनीतिक बहस का केंद्र बनता रहा है। आलोचकों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में बड़ी खामियाँ हैं, जिसका खामियाजा निम्न और मध्यम वर्ग को भुगतना पड़ता है।

जयंत चौधरी और गठबंधन धर्म पर सवाल

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के लखनऊ दौरे और ब्राह्मण-जाट सामाजिक समीकरण से जुड़े कार्यक्रम को लेकर मेहरोत्रा ने कहा कि 2022 में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और सपा के बीच हुए गठबंधन का कम से कम पाँच वर्ष तक पालन होना चाहिए था। उन्होंने जयंत चौधरी के भाजपा के साथ जाने को सैद्धांतिक रूप से गलत बताया।

मेहरोत्रा ने चौधरी चरण सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि किसान आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों की जान गई, और अब उनके पोते उसी भाजपा के साथ हैं जो चरण सिंह की किसान व ग्राम-केंद्रित राजनीति के विपरीत है।

दलित आरक्षण और NDA में मतभेद

दलित आरक्षण में क्रीमी लेयर के मुद्दे पर NDA घटक दलों के बीच कथित मतभेदों को लेकर मेहरोत्रा ने कहा कि गठबंधन के सहयोगी आपस में ही टकराव में हैं। उन्होंने कहा कि सपा चाहती है कि शोषित, वंचित, दलित और पिछड़े वर्गों को उनका अधिकार, न्याय और सम्मान मिले। उनका आरोप था कि भाजपा सरकार पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के साथ अन्याय कर रही है।

मेहरोत्रा ने यह भी दावा किया कि चुनाव नज़दीक आते ही NDA के घटक दल बिखर जाएँगे और गठबंधन टूट जाएगा।

हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद पर प्रतिक्रिया

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर स्थान को गंगाजल से शुद्ध किए जाने की घटना पर मेहरोत्रा ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि यह इसलिए किया गया क्योंकि खड़गे दलित हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम (SC/ST Act) के तहत कार्रवाई की माँग का समर्थन करते हुए दोषियों की गिरफ्तारी की अपील की।

2027 का दावा और पीडीए फॉर्मूला

सपा के पीडीए फॉर्मूले की बढ़ती स्वीकार्यता पर मेहरोत्रा ने कहा कि लगातार नए सामाजिक समूह इससे जुड़ रहे हैं और यही भाजपा की परेशानी का कारण है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनना तय है। राजनीतिक विश्लेषक इस दावे को अभी के लिए पार्टी की चुनावी रणनीति का हिस्सा मानते हैं, क्योंकि चुनाव में अभी लगभग दो वर्ष शेष हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जातिगत न्याय और गठबंधन की विश्वसनीयता को एक ही धागे में पिरोकर। लेकिन एवेरेस्ट प्रतिबंध को सीधे सरकारी नीति की विफलता बताना तथ्यात्मक रूप से सरलीकरण है, क्योंकि यह नियामक प्रक्रिया का हिस्सा था। हल्द्वानी शुद्धिकरण प्रकरण निश्चित रूप से गंभीर है और जाँच की माँग करता है, परंतु इसे BJP की केंद्रीय नीति से जोड़ना अभी आरोप के स्तर पर है। 2027 के दावे अभी राजनीतिक महत्वाकांक्षा हैं — ज़मीनी समीकरण इससे कहीं अधिक जटिल हैं।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रविदास मेहरोत्रा ने मिलावटी मसालों पर क्या आरोप लगाए?
मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में उत्तर प्रदेश और देशभर में नकली व मिलावटी सामान की बिक्री जारी है। उन्होंने एवेरेस्ट ब्रांड के हींग, गरम मसाला और मीट मसाला में मिलावट पाए जाने के बाद लगे प्रतिबंध का हवाला देते हुए इसे कैंसर के बढ़ते मामलों से जोड़ा और सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
मेहरोत्रा ने जयंत चौधरी पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि 2022 में RLD और सपा के गठबंधन का कम से कम पाँच वर्ष पालन होना चाहिए था। जयंत चौधरी का भाजपा के साथ जाना उनके पितामह चौधरी चरण सिंह की किसान व ग्राम-केंद्रित राजनीति के विपरीत है।
हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद क्या है?
कथित तौर पर उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद स्थान को गंगाजल से शुद्ध किया गया। मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि यह इसलिए किया गया क्योंकि खड़गे दलित हैं, और SC/ST Act के तहत दोषियों की गिरफ्तारी की माँग की।
सपा का पीडीए फॉर्मूला क्या है और मेहरोत्रा ने इसके बारे में क्या कहा?
पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक — यह सपा की चुनावी सामाजिक गोलबंदी की रणनीति है। मेहरोत्रा ने कहा कि लगातार नए सामाजिक समूह इससे जुड़ रहे हैं और इसी से भाजपा परेशान है।
क्या 2027 में उत्तर प्रदेश में सपा सरकार बन सकती है?
मेहरोत्रा ने दृढ़ता से दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा की सरकार बनना तय है। हालाँकि यह अभी पार्टी का राजनीतिक दावा है — चुनाव में लगभग दो वर्ष शेष हैं और वास्तविक समीकरण अभी बनने हैं।
राष्ट्र प्रेस
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