31 जुलाई 2026
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जावेद अली के विवादित बयान से सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने बनाई दूरी, बोले — सपा सभी धर्मों का करती है सम्मान

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जावेद अली के विवादित बयान से सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने बनाई दूरी, बोले — सपा सभी धर्मों का करती है सम्मान

सारांश

सांसद जावेद अली के 'बहुसंख्यक समाज जहरीला' वाले बयान ने सपा को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया। वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा का यह खंडन 2027 चुनाव से पहले पार्टी की समावेशी छवि बचाने की कोशिश है — और ओवैसी पर 'बी-टीम' का आरोप इसी रणनीति का हिस्सा।

मुख्य बातें

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 15 जून 2026 को सांसद जावेद अली के 'बहुसंख्यक समाज जहरीला हो गया है' वाले बयान से सार्वजनिक रूप से दूरी बनाई।
मेहरोत्रा ने कहा कि समाजवादी पार्टी सभी धर्मों और जातियों का सम्मान करती है और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के हक के लिए लड़ती है।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को सपा विधायक ने भाजपा की 'बी-टीम' करार दिया और कहा कि दोनों मिलकर 2027 में सपा को हराने की कोशिश करेंगे।
मेहरोत्रा ने दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनेंगे।
ओवैसी की पार्टी को 2027 चुनाव में एक भी सीट न मिलने का दावा भी मेहरोत्रा ने किया।

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 15 जून 2026 को लखनऊ में पार्टी सांसद जावेद अली के उस विवादित बयान से स्पष्ट रूप से किनारा कर लिया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि 'बहुसंख्यक समाज जहरीला हो गया है।' मेहरोत्रा ने कहा कि समाजवादी पार्टी सभी धर्मों और जातियों का सम्मान करती है और किसी भी वर्ग के साथ अन्याय होने पर उसके खिलाफ संघर्ष करती है।

मुख्य घटनाक्रम

लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि सपा लगातार पीडीए — यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक — समाज को उनका हक दिलाने के लिए संघर्षरत है। उन्होंने पार्टी सांसद जावेद अली के बयान को पार्टी की आधिकारिक राय नहीं माना और स्पष्ट किया कि सपा का रुख हमेशा से समावेशी रहा है।

मेहरोत्रा ने कहा, 'भाजपा नफरत फैलाने का काम कर रही है — भाई से भाई को लड़वाने का काम कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी मोहब्बत का पैगाम फैलाती है और दिलों को जोड़ने का काम करती है। हिंदू-मुस्लिम एकता बनाए रखने के लिए सपा हर कुर्बानी देने को तैयार है।'

पीडीए बैठक पर रुख

पीडीए समाज की आगामी बैठक को लेकर रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि इसमें सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि जुर्म और अन्याय के खिलाफ संघर्ष के समय सभी को एकजुट होकर लड़ना होगा।

ओवैसी पर तीखा हमला

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बयानों पर तंज कसते हुए सपा विधायक ने उन्हें भाजपा की 'बी-टीम' करार दिया। मेहरोत्रा का कहना था कि भाजपा और AIMIM दोनों एक ही काम करते हैं — नफरत फैलाना — और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में दोनों मिलकर सपा को हराने की कोशिश करेंगे। उन्होंने दावा किया कि जनता जागरूक है और वोट बँटने नहीं देगी।

मेहरोत्रा ने यह भी कहा कि ओवैसी की पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिलने वाली।

2027 चुनाव पर दावा

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए रविदास मेहरोत्रा ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने दोहराया कि सपा नफरत की राजनीति के विरुद्ध मोहब्बत का संदेश देकर सभी वर्गों के हितों की रक्षा करती है।

गौरतलब है कि जावेद अली के बयान के बाद सपा के भीतर और विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएँ आई थीं। मेहरोत्रा का यह बयान पार्टी की आंतरिक छवि को संभालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब 2027 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2027 से पहले सपा की छवि-प्रबंधन रणनीति का हिस्सा लगता है — जावेद अली के बयान ने पार्टी को उस 'मुस्लिम-तुष्टीकरण' के आरोप के सामने खड़ा कर दिया जिससे भाजपा चुनावी लाभ उठाती है। ओवैसी को 'बी-टीम' कहना भी इसी रणनीति का विस्तार है, ताकि अल्पसंख्यक वोट एकजुट रहें। लेकिन सवाल यह है कि क्या पार्टी के भीतर से आने वाले ऐसे विवादित बयानों पर आंतरिक अनुशासन की कोई ठोस व्यवस्था है — या हर बार किसी वरिष्ठ नेता को सफाई देने के लिए आगे आना पड़ेगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जावेद अली के किस बयान से सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने दूरी बनाई?
सपा सांसद जावेद अली ने कथित तौर पर कहा था कि 'बहुसंख्यक समाज जहरीला हो गया है।' इस बयान पर विवाद बढ़ने के बाद वरिष्ठ सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 15 जून 2026 को लखनऊ में स्पष्ट किया कि यह पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं है।
समाजवादी पार्टी का पीडीए समाज को लेकर क्या रुख है?
रविदास मेहरोत्रा के अनुसार, सपा लगातार पीडीए — पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक — समाज को उनका हक दिलाने के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पीडीए की बैठक में सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
सपा ने ओवैसी को भाजपा की 'बी-टीम' क्यों कहा?
सपा विधायक मेहरोत्रा का आरोप है कि AIMIM और भाजपा दोनों नफरत फैलाने का काम करते हैं और 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव में मिलकर सपा को हराने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि जनता जागरूक है और वोट नहीं बँटेगा।
2027 यूपी चुनाव को लेकर सपा का क्या दावा है?
रविदास मेहरोत्रा ने दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि AIMIM को एक भी सीट नहीं मिलेगी।
क्या जावेद अली के बयान से सपा की छवि पर असर पड़ा?
जावेद अली के बयान के बाद सपा को रक्षात्मक स्थिति में आना पड़ा और वरिष्ठ विधायक मेहरोत्रा को सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी। यह घटना 2027 चुनाव से पहले पार्टी की समावेशी छवि को लेकर आंतरिक अनुशासन पर सवाल उठाती है।
राष्ट्र प्रेस
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