जावेद अली के विवादित बयान से सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने बनाई दूरी, बोले — सपा सभी धर्मों का करती है सम्मान
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 15 जून 2026 को लखनऊ में पार्टी सांसद जावेद अली के उस विवादित बयान से स्पष्ट रूप से किनारा कर लिया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि 'बहुसंख्यक समाज जहरीला हो गया है।' मेहरोत्रा ने कहा कि समाजवादी पार्टी सभी धर्मों और जातियों का सम्मान करती है और किसी भी वर्ग के साथ अन्याय होने पर उसके खिलाफ संघर्ष करती है।
मुख्य घटनाक्रम
लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि सपा लगातार पीडीए — यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक — समाज को उनका हक दिलाने के लिए संघर्षरत है। उन्होंने पार्टी सांसद जावेद अली के बयान को पार्टी की आधिकारिक राय नहीं माना और स्पष्ट किया कि सपा का रुख हमेशा से समावेशी रहा है।
मेहरोत्रा ने कहा, 'भाजपा नफरत फैलाने का काम कर रही है — भाई से भाई को लड़वाने का काम कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी मोहब्बत का पैगाम फैलाती है और दिलों को जोड़ने का काम करती है। हिंदू-मुस्लिम एकता बनाए रखने के लिए सपा हर कुर्बानी देने को तैयार है।'
पीडीए बैठक पर रुख
पीडीए समाज की आगामी बैठक को लेकर रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि इसमें सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि जुर्म और अन्याय के खिलाफ संघर्ष के समय सभी को एकजुट होकर लड़ना होगा।
ओवैसी पर तीखा हमला
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बयानों पर तंज कसते हुए सपा विधायक ने उन्हें भाजपा की 'बी-टीम' करार दिया। मेहरोत्रा का कहना था कि भाजपा और AIMIM दोनों एक ही काम करते हैं — नफरत फैलाना — और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में दोनों मिलकर सपा को हराने की कोशिश करेंगे। उन्होंने दावा किया कि जनता जागरूक है और वोट बँटने नहीं देगी।
मेहरोत्रा ने यह भी कहा कि ओवैसी की पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिलने वाली।
2027 चुनाव पर दावा
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए रविदास मेहरोत्रा ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने दोहराया कि सपा नफरत की राजनीति के विरुद्ध मोहब्बत का संदेश देकर सभी वर्गों के हितों की रक्षा करती है।
गौरतलब है कि जावेद अली के बयान के बाद सपा के भीतर और विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएँ आई थीं। मेहरोत्रा का यह बयान पार्टी की आंतरिक छवि को संभालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब 2027 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं।