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कोलकाता भगदड़: SIT को मिला 15 मिनट का CCTV फुटेज, श्रद्धालुओं ने अनदेखी की पुलिस की अपील

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कोलकाता भगदड़: SIT को मिला 15 मिनट का CCTV फुटेज, श्रद्धालुओं ने अनदेखी की पुलिस की अपील

सारांश

कोलकाता के चोरबागन पंडाल भगदड़ की जांच में SIT को 15 मिनट का CCTV फुटेज मिला है जिसमें श्रद्धालु पुलिस की अपीलों को अनसुना करते दिख रहे हैं। बारिश, अप्रशिक्षित गार्ड और भीड़ का दबाव — तीनों मिलकर 19 मौतों की वजह बने। न्यायिक पैनल 31 अक्टूबर से साक्ष्य जुटाएगा।

मुख्य बातें

SIT को 17 अक्टूबर 2026 की शाम 7:15 से 7:30 बजे के बीच का 15 मिनट का अहम CCTV फुटेज मिला है।
फुटेज में दिखता है कि चोरबागन दुर्गा पूजा पंडाल के श्रद्धालुओं ने भीड़ कम करने की पुलिस की अपीलें अनसुनी कीं।
बारिश के कारण न अंदर वाले बाहर निकले, न बाहर वाले रुके — जिससे पंडाल में दम घोंटू भीड़ बन गई।
पूजा समिति ने पेशेवर एजेंसी की जगह अप्रशिक्षित स्थानीय युवाओं को सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात किया था।
न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय न्यायिक पैनल 31 अक्टूबर से साक्ष्य संकलन शुरू करेगा।
न्यायिक पैनल को गठन के 6 महीने के भीतर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपनी है।

कोलकाता पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को उत्तरी कोलकाता के चोरबागन सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर 2026 को हुई भगदड़ की जांच में एक अहम सुराग हाथ लगा है — 15 मिनट का सीसीटीवी फुटेज, जिसमें स्पष्ट दिखता है कि श्रद्धालुओं ने भीड़ न बढ़ाने की पुलिस की बार-बार की अपीलों को अनसुना किया। इस हादसे में 19 लोगों की जान जा चुकी है, और जांच एजेंसियाँ अब घटनाक्रम की परत-दर-परत पड़ताल कर रही हैं।

सीसीटीवी फुटेज में क्या दिखा

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह फुटेज 17 अक्टूबर को शाम 7:15 बजे से 7:30 बजे IST के बीच का है — यानी भगदड़ से ठीक पहले का वह समय जब हालात सबसे नाजुक थे। फुटेज में देखा जा सकता है कि पंडाल के भीतर तैनात पुलिसकर्मी भक्तों से बाहर निकलने का अनुरोध कर रहे थे, जबकि बाहर खड़े जवान लोगों को तब तक प्रवेश न करने की सलाह दे रहे थे जब तक अंदर वाले बाहर न आ जाएं।

सूत्रों ने बताया कि बारिश इस अव्यवस्था का एक बड़ा कारण रही — अंदर मौजूद भक्त भीगने के डर से बाहर नहीं निकले, और बाहर खड़े लोग बारिश से बचने के लिए पंडाल में घुसने की कोशिश करते रहे। इससे पंडाल के भीतर दम घोंटू और खतरनाक भीड़ की स्थिति बन गई।

चश्मदीदों की गवाही

SIT द्वारा पूछताछ किए गए कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने भी पुष्टि की है कि पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की थी। जांच अधिकारियों के अनुसार, फुटेज और गवाहियाँ दोनों मिलकर घटनाक्रम की एक स्पष्ट तस्वीर पेश कर रही हैं।

अप्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड बने जांच का केंद्र

जांच में एक और चिंताजनक तथ्य सामने आया है — पूजा समिति के आयोजकों ने किसी पंजीकृत या पेशेवर सुरक्षा एजेंसी की जगह कुछ स्थानीय बेरोजगार युवाओं को निजी सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम पर रखा था। इन युवाओं को भीड़ प्रबंधन की बुनियादी जानकारी या प्रशिक्षण भी नहीं था। SIT के सदस्य इस बिंदु पर आयोजकों से विस्तार से पूछताछ कर रहे हैं।

न्यायिक जांच पैनल की प्रगति

SIT की जांच के समानांतर, राज्य सरकार द्वारा गठित छह सदस्यीय न्यायिक जांच पैनल भी हादसे की स्वतंत्र पड़ताल कर रहा है। पैनल की अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि पैनल 31 अक्टूबर 2026 से औपचारिक रूप से साक्ष्य संकलन शुरू करेगा। इस पैनल को गठन के छह महीने के भीतर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।

आगे क्या होगा

SIT और न्यायिक पैनल — दो समानांतर जांचें — इस हादसे की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की कमजोरियाँ बार-बार सामने आती रही हैं, और इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक पूजा आयोजनों के लिए सुरक्षा मानकों पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और किसे जवाबदेह ठहराया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

पुलिस की सीमित बाध्यकारी शक्ति और खराब मौसम में भीड़ प्रबंधन की कोई वैकल्पिक योजना न होना — यह संयोग नहीं, बल्कि प्रणालीगत विफलता है। सवाल यह है कि राज्य सरकार ने आयोजन की अनुमति देते समय किन मानकों की जाँच की थी। न्यायिक पैनल की रिपोर्ट यदि केवल व्यक्तिगत लापरवाही तक सीमित रही और सुरक्षा अनुमति प्रक्रिया में सुधार की सिफारिश नहीं की, तो अगला हादसा रोकने में यह जांच भी अधूरी साबित होगी।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता चोरबागन दुर्गा पूजा भगदड़ में क्या हुआ था?
17 अक्टूबर 2026 को उत्तरी कोलकाता के चोरबागन सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ मच गई, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई। बारिश के दौरान पंडाल के अंदर और बाहर भीड़ का दबाव एक साथ बढ़ने से दम घोंटू स्थिति बन गई।
SIT को मिले CCTV फुटेज में क्या दिखा?
15 मिनट के CCTV फुटेज में शाम 7:15 से 7:30 बजे के बीच पुलिसकर्मी भक्तों से बाहर निकलने और प्रवेश न करने की अपील करते दिख रहे हैं। फुटेज से स्पष्ट है कि श्रद्धालुओं ने बारिश के कारण इन अपीलों को नजरअंदाज किया।
पूजा समिति के सुरक्षा गार्डों पर क्या सवाल उठे हैं?
जांच में पता चला है कि पूजा समिति ने किसी पंजीकृत सुरक्षा एजेंसी की जगह स्थानीय बेरोजगार युवाओं को गार्ड के रूप में रखा था, जिन्हें भीड़ प्रबंधन का कोई प्रशिक्षण नहीं था। SIT इस बिंदु पर आयोजकों से पूछताछ कर रही है।
न्यायिक जांच पैनल कब तक रिपोर्ट देगा?
न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय न्यायिक पैनल 31 अक्टूबर 2026 से साक्ष्य संकलन शुरू करेगा। पैनल को गठन के छह महीने के भीतर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
SIT और न्यायिक पैनल की जांच में क्या फर्क है?
SIT कोलकाता पुलिस की अपनी जांच इकाई है जो आपराधिक पहलुओं और सबूत जुटाने पर केंद्रित है। न्यायिक पैनल राज्य सरकार द्वारा गठित एक स्वतंत्र जाँच निकाय है जो घटना की व्यापक परिस्थितियों, प्रशासनिक जिम्मेदारी और भविष्य के लिए सिफारिशें तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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