कोलकाता भगदड़: SIT को मिला 15 मिनट का CCTV फुटेज, श्रद्धालुओं ने अनदेखी की पुलिस की अपील
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को उत्तरी कोलकाता के चोरबागन सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर 2026 को हुई भगदड़ की जांच में एक अहम सुराग हाथ लगा है — 15 मिनट का सीसीटीवी फुटेज, जिसमें स्पष्ट दिखता है कि श्रद्धालुओं ने भीड़ न बढ़ाने की पुलिस की बार-बार की अपीलों को अनसुना किया। इस हादसे में 19 लोगों की जान जा चुकी है, और जांच एजेंसियाँ अब घटनाक्रम की परत-दर-परत पड़ताल कर रही हैं।
सीसीटीवी फुटेज में क्या दिखा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह फुटेज 17 अक्टूबर को शाम 7:15 बजे से 7:30 बजे IST के बीच का है — यानी भगदड़ से ठीक पहले का वह समय जब हालात सबसे नाजुक थे। फुटेज में देखा जा सकता है कि पंडाल के भीतर तैनात पुलिसकर्मी भक्तों से बाहर निकलने का अनुरोध कर रहे थे, जबकि बाहर खड़े जवान लोगों को तब तक प्रवेश न करने की सलाह दे रहे थे जब तक अंदर वाले बाहर न आ जाएं।
सूत्रों ने बताया कि बारिश इस अव्यवस्था का एक बड़ा कारण रही — अंदर मौजूद भक्त भीगने के डर से बाहर नहीं निकले, और बाहर खड़े लोग बारिश से बचने के लिए पंडाल में घुसने की कोशिश करते रहे। इससे पंडाल के भीतर दम घोंटू और खतरनाक भीड़ की स्थिति बन गई।
चश्मदीदों की गवाही
SIT द्वारा पूछताछ किए गए कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने भी पुष्टि की है कि पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की थी। जांच अधिकारियों के अनुसार, फुटेज और गवाहियाँ दोनों मिलकर घटनाक्रम की एक स्पष्ट तस्वीर पेश कर रही हैं।
अप्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड बने जांच का केंद्र
जांच में एक और चिंताजनक तथ्य सामने आया है — पूजा समिति के आयोजकों ने किसी पंजीकृत या पेशेवर सुरक्षा एजेंसी की जगह कुछ स्थानीय बेरोजगार युवाओं को निजी सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम पर रखा था। इन युवाओं को भीड़ प्रबंधन की बुनियादी जानकारी या प्रशिक्षण भी नहीं था। SIT के सदस्य इस बिंदु पर आयोजकों से विस्तार से पूछताछ कर रहे हैं।
न्यायिक जांच पैनल की प्रगति
SIT की जांच के समानांतर, राज्य सरकार द्वारा गठित छह सदस्यीय न्यायिक जांच पैनल भी हादसे की स्वतंत्र पड़ताल कर रहा है। पैनल की अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि पैनल 31 अक्टूबर 2026 से औपचारिक रूप से साक्ष्य संकलन शुरू करेगा। इस पैनल को गठन के छह महीने के भीतर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
आगे क्या होगा
SIT और न्यायिक पैनल — दो समानांतर जांचें — इस हादसे की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की कमजोरियाँ बार-बार सामने आती रही हैं, और इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक पूजा आयोजनों के लिए सुरक्षा मानकों पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और किसे जवाबदेह ठहराया जाएगा।