स्टर्लिंग टूल्स का Q2 मुनाफा 31% गिरकर ₹13.63 करोड़, खर्च 35% बढ़ने से दबाव
सारांश
मुख्य बातें
ऑटोमोटिव पार्ट्स निर्माता कंपनी स्टर्लिंग टूल्स का वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 31.12 प्रतिशत घटकर ₹13.63 करोड़ रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह ₹19.79 करोड़ था। कंपनी ने 27 अक्टूबर 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को एक्सचेंज फाइलिंग के ज़रिए यह जानकारी दी।
मुख्य वित्तीय संख्याएँ
तिमाही आधार पर भी मुनाफे में गिरावट आई है — वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹16.40 करोड़ था, जो अब घटकर ₹13.63 करोड़ पर आ गया है। दूसरी तरफ, परिचालन से आय (Revenue from Operations) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी की परिचालन आय सालाना आधार पर 32.93 प्रतिशत बढ़कर ₹225.89 करोड़ हो गई, जो वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में ₹169.93 करोड़ थी। तिमाही आधार पर भी इसमें 13.28 प्रतिशत की वृद्धि रही — पहली तिमाही में यह ₹199.40 करोड़ थी।
मुनाफे में गिरावट की वजह
आय बढ़ने के बावजूद मुनाफा घटने की प्रमुख वजह खर्च में तेज़ बढ़ोतरी रही। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी का कुल परिचालन खर्च सालाना आधार पर 35.16 प्रतिशत बढ़कर ₹210.29 करोड़ हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में यह ₹155.58 करोड़ था। तिमाही आधार पर भी खर्च में 16.89 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई — पहली तिमाही में यह ₹179.89 करोड़ था।
गौरतलब है कि खर्च की वृद्धि दर (35.16%) आय की वृद्धि दर (32.93%) से अधिक रही, जिसके कारण मार्जिन पर दबाव बढ़ा और शुद्ध मुनाफे में सिकुड़न आई।
नकद प्रवाह पर असर
कंपनी का नेट कैश फ्लो वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में -₹29.25 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में ₹9.09 करोड़ (धनात्मक) था। यह नकद स्थिति में उल्लेखनीय गिरावट को दर्शाता है और निवेशकों के लिए एक अतिरिक्त चिंता का विषय है।
शेयर बाज़ार में प्रतिक्रिया
नतीजे जारी होने के बाद स्टर्लिंग टूल्स का शेयर लाल निशान में आ गया। 27 अक्टूबर 2026 को दोपहर 1:30 बजे IST तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर यह 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹215.71 पर कारोबार कर रहा था। हालाँकि शेयर की शुरुआत सकारात्मक रही थी और यह ₹220 पर खुला था; कारोबारी सत्र में इसका इंट्राडे हाई ₹227.46 तक रहा।
यह ऐसे समय में आया है जब ऑटोमोटिव सेक्टर में लागत दबाव और कच्चे माल की कीमतें कंपनियों की लाभप्रदता को प्रभावित कर रही हैं। अगली तिमाहियों में खर्च प्रबंधन और ऑर्डर बुक की मज़बूती पर बाज़ार की नज़र रहेगी।