वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड को Q2 में ₹2.7 करोड़ का शुद्ध घाटा, राजस्व 16.4% बढ़कर ₹747 करोड़
सारांश
मुख्य बातें
वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड लिमिटेड — पश्चिमी और दक्षिणी भारत में मैकडॉनल्ड्स का संचालन करने वाली कंपनी — को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में ₹2.7 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही से तीखा उलटफेर है, जब कंपनी ने ₹37 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। बेहतर परिचालन प्रदर्शन और मजबूत राजस्व वृद्धि के बावजूद गैर-परिचालन एवं वित्तीय खर्चों के दबाव ने अंतिम लाभ-रेखा को नकारात्मक कर दिया।
राजस्व और परिचालन प्रदर्शन
स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, सितंबर तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व 16.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹747 करोड़ रहा, जो एक वर्ष पूर्व इसी अवधि में ₹642 करोड़ था। यह वृद्धि दर्शाती है कि ग्राहक-यातायात और औसत खर्च दोनों में सुधार जारी है।
परिचालन लाभ मापक ईबीआईटीडीए सालाना आधार पर 39.2 प्रतिशत बढ़कर ₹94 करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष ₹67.3 करोड़ था। ईबीआईटीडीए मार्जिन भी 10.5 प्रतिशत से सुधरकर 12.5 प्रतिशत पर पहुँच गया। ऑपरेटिंग ईबीआईटीडीए 29 प्रतिशत की छलाँग के साथ ₹98.1 करोड़ रहा और इसका मार्जिन 13.1 प्रतिशत दर्ज किया गया।
कैश प्रदर्शन और विस्तार
कंपनी का कैश पीएटी ₹52.6 करोड़ रहा, जो 7 प्रतिशत के स्वस्थ मार्जिन को दर्शाता है। इससे स्पष्ट है कि परिचालन स्तर पर नकदी प्रवाह सकारात्मक बना हुआ है, भले ही लेखांकन-स्तर पर शुद्ध घाटा दर्ज हुआ हो।
तिमाही के दौरान वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड ने 11 नए रेस्तरां खोले, जिससे कुल आउटलेट्स की संख्या 80 शहरों में 492 हो गई है। कंपनी का ध्यान मौजूदा और उभरते बाज़ारों में अपनी पहुँच विस्तार पर केंद्रित है।
डिजिटल चैनलों की बढ़ती भूमिका
डिजिटल कारोबार कंपनी की वृद्धि का प्रमुख इंजन बना हुआ है। सितंबर तिमाही में कुल बिक्री में डिजिटल चैनलों की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक रही। मैकडॉनल्ड्स ऐप के कुल डाउनलोड 5.8 करोड़ के पार पहुँच गए, जबकि मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़कर लगभग 42 लाख हो गई।
चेयरमैन की प्रतिक्रिया
कंपनी के चेयरमैन अमित जटिया ने तिमाही नतीजों पर कहा कि ये परिणाम कंपनी की रणनीति और निष्पादन क्षमता की मजबूती को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, 'ग्राहकों की संख्या में वृद्धि, बेहतर लाभप्रदता और लगातार विस्तार हमें भविष्य के बड़े अवसरों का लाभ उठाने, दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने और उद्योग में अपनी नेतृत्व स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में अच्छी स्थिति में रखते हैं।'
घाटे की वजह और आगे की राह
गौरतलब है कि परिचालन स्तर पर मजबूत सुधार के बावजूद शुद्ध घाटे का मुख्य कारण गैर-परिचालन व वित्तीय खर्चों का बढ़ा हुआ बोझ है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय त्वरित-सेवा रेस्तरां (QSR) क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है और उपभोक्ता खर्च पर महँगाई का दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों की नज़र अगली तिमाही में परिचालन लाभ और शुद्ध लाभ के बीच के इस अंतर पर रहेगी।