कीव में रूसी मिसाइल हमला: विश्वविद्यालय परिसर तबाह, मलबे में दबे लोग, जेलेंस्की ने लगाई मदद की गुहार
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन की राजधानी कीव में 27 अक्टूबर 2026 की रात रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों ने एक विश्वविद्यालय परिसर और उसके आसपास के नागरिक इलाकों को निशाना बनाया, जिसमें कुछ लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर इस हमले की जानकारी साझा की और आपातकालीन बचाव कार्य जारी रहने की पुष्टि की।
हमले का विवरण और प्रभावित क्षेत्र
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपनी पोस्ट में बताया कि मिसाइलें विश्वविद्यालय कैंपस, क्योटो पार्क, मेट्रो स्टेशन के समीपवर्ती क्षेत्र और आसपास की रिहायशी इमारतों पर गिरीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमले वाले क्षेत्रों के आसपास कोई सैन्य ठिकाना नहीं था। हताहतों की सटीक संख्या की अभी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कुछ लोगों की मौत और अनेक लोगों के घायल होने की आशंका जताई गई है।
आशंका है कि कुछ लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। सभी आपातकालीन सेवाएँ मौके पर तैनात हैं और बचाव अभियान तेज़ी से जारी है।
शाहेद ड्रोन हमले भी जारी
बैलिस्टिक मिसाइलों के अलावा, 'शाहेद' ड्रोन के ज़रिए हमले भी समानांतर रूप से जारी रहे, जो कीव समेत यूक्रेन के अन्य शहरों और बस्तियों को निशाना बना रहे हैं। जेलेंस्की के अनुसार, मिसाइलें उन इलाकों में गिरीं जहाँ आम नागरिकों की भारी भीड़ रहती है — यह सीधे शहरी बुनियादी ढाँचे को नष्ट करने की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
जेलेंस्की की साझेदार देशों से अपील
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि जब खतरा हर पल बना हुआ हो, तो हवाई रक्षा प्रणाली की आपूर्ति में होने वाली देरी आतंक को बढ़ावा देने जैसी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, 'राजनीतिक स्तर पर हुए समझौतों को बिना देरी के लागू किया जाए।'
उनके अनुसार, यूक्रेन को रूस के बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट करने के लिए आवश्यक हथियार और रक्षा उपकरण उपलब्ध कराना ही नागरिकों की जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
रूस की जवाबदेही और वैश्विक आह्वान
जेलेंस्की ने स्पष्ट कहा कि युद्ध के जारी रहने और नागरिकों की मौतों की पूर्ण जिम्मेदारी रूस पर है। उन्होंने दुनिया से अपील की कि वह देखे कि रूस लगातार युद्ध जारी रखने और जानें लेने की मंशा रखता है। यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन संघर्ष को लेकर पश्चिमी देशों में समर्थन और थकान दोनों की बहस चल रही है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब रूसी मिसाइलों ने कीव के नागरिक इलाकों को निशाना बनाया हो — विश्वविद्यालयों और अस्पतालों जैसे संरक्षित नागरिक ढाँचे पर इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के रूप में देखे जाते हैं। आगे भी हमलों की आशंका बनी हुई है।