27 अक्टूबर 2026
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नोबेल विजेता रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स का बड़ा बयान: 'एआई नहीं, ह्यूमन इंटेलिजेंस पर करें भरोसा'

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नोबेल विजेता रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स का बड़ा बयान: 'एआई नहीं, ह्यूमन इंटेलिजेंस पर करें भरोसा'

सारांश

नोबेल विजेता रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स ने नई दिल्ली में ईएसटीआईसी 2026 के मंच से एआई को लेकर दो-टूक बात कही — वे खुद मानवीय बुद्धि को प्राथमिकता देते हैं। एआई की अपारदर्शी प्रक्रिया को वैज्ञानिक पद्धति के विरुद्ध बताते हुए उन्होंने भारत की वैज्ञानिक क्षमता पर गहरा भरोसा भी जताया।

मुख्य बातें

नोबेल विजेता रिचर्ड जे.
रॉबर्ट्स ने 27 अक्टूबर 2026 को ईएसटीआईसी 2026 , नई दिल्ली में एआई के बढ़ते प्रभाव पर सावधानी बरतने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मौजूदा एआई मॉडल अपना बेसिक डेटासेट और प्रक्रिया नहीं बताते, जो वैज्ञानिक पद्धति के विरुद्ध है।
एआई में हैलुसिनेशन (भ्रम) की समस्या को उन्होंने बेकार डेटा पर प्रशिक्षण का परिणाम बताया।
भारत में फर्स्ट-क्लास वैज्ञानिक होने की बात कहते हुए उन्होंने देश की आत्मनिर्भर अनुसंधान क्षमता पर भरोसा जताया।
कोलाई में 400-500 जीन और मानव जीनोम के कई जीन अब भी अज्ञात हैं — यह जेनेटिक्स का सबसे बड़ा अनसुलझा प्रश्न बना हुआ है।
ईएसटीआईसी 2026 का आयोजन 27-29 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम में, 12 क्षेत्रों पर चर्चा।

नोबेल पुरस्कार विजेता रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ईएसटीआईसी (इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव) 2026 में स्पीकर के रूप में शिरकत करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर स्पष्ट चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तुलना में मानवीय बुद्धि पर भरोसा करना कहीं अधिक उचित है। 1993 में फिजियोलॉजी/मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रॉबर्ट्स की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय एआई के अनुसंधान में उपयोग को लेकर गहरे विमर्श में है।

एआई की कार्यप्रणाली पर वैज्ञानिक आपत्ति

रॉबर्ट्स ने मौजूदा एआई मॉडलों की बुनियादी कमज़ोरी की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, 'हमें बहुत सावधान रहना होगा। व्यक्तिगत रूप से, मैं ह्यूमन इंटेलिजेंस को तरजीह देता हूं।' उनके अनुसार वर्तमान एआई प्रणालियाँ अपना मूल डेटासेट और निष्कर्ष तक पहुँचने की प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं करतीं, जो वैज्ञानिक पद्धति के मूल सिद्धांत के विपरीत है।

उन्होंने कहा, 'विज्ञान का आधार ही यह है कि धारणाओं से शुरू होता है और फिर किस तरीके से परिणाम तक पहुँचे, यह बताया जाता है। एआई अक्सर बेकार डेटा पर प्रशिक्षित होने की वजह से हैलुसिनेशन (भ्रम) पैदा करता है। लेकिन अगर इसे सही से प्रशिक्षित किया जाए और यह अपनी प्रक्रिया बताए, तो विज्ञान के लिए बहुत अच्छा साबित होगा।' गौरतलब है कि एआई में 'हैलुसिनेशन' की समस्या — यानी गलत तथ्यों को सत्य की तरह प्रस्तुत करना — पिछले कुछ वर्षों में अनुसंधान जगत में गंभीर चिंता का विषय बनी है।

भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य पर विश्वास

रॉबर्ट्स ने भारत में विज्ञान की स्थिति और ग्लोबल साउथ के एक शक्ति केंद्र के रूप में उभरने पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत में 'फर्स्ट-क्लास वैज्ञानिक' मौजूद हैं और देश में स्वयं ही विश्वस्तरीय अनुसंधान की क्षमता है।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण के अवसर सिकुड़ रहे हैं। उनके अनुसार, 'अब वैज्ञानिकों को देश से बाहर निकलना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि अमेरिका जाना आसान नहीं और यूरोप भी वैज्ञानिकों को लेने का इच्छुक नहीं है। लेकिन मुझे इसकी चिंता नहीं, क्योंकि मुझे लगता है कि आप यह सब खुद कर सकते हैं। आप में इतना दम है कि आप दुनिया को भाड़ में जाने के लिए कह सकते हैं।' यह टिप्पणी भारत की आत्मनिर्भरता की क्षमता में उनके गहरे विश्वास को दर्शाती है।

जेनेटिक्स के अनसुलझे रहस्य

अपनी ऐतिहासिक स्प्लिट जीन की खोज — जिसने आणविक जीव विज्ञान की समझ बदल दी और जिसके लिए उन्हें नोबेल मिला — के तीन दशक बाद भी रॉबर्ट्स ने माना कि जेनेटिक्स में अभी अनगिनत प्रश्न अनुत्तरित हैं।

उन्होंने कहा, 'ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया पर हम दशकों से काम कर रहे हैं, फिर भी उसमें 400-500 ऐसे जीन हैं जिनका काम हमें नहीं पता। आज के ज़माने में यह भयावह है कि हमने उनका काम पता करने में समय नहीं लगाया।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यही स्थिति मानव जीनोम की भी है, जहाँ बहुत से जीन के कार्य अब भी अज्ञात हैं। यह स्वीकारोक्ति इस बात की याद दिलाती है कि अत्याधुनिक तकनीक के बावजूद जीव विज्ञान की गहराइयाँ अभी पूरी तरह सुलझी नहीं हैं।

ईएसटीआईसी 2026 का संदर्भ

ईएसटीआईसी 2026 का आयोजन 27 अक्टूबर से 29 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है। यह भारत का एक प्रमुख विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंच है, जिसमें 12 क्षेत्रों पर चर्चा निर्धारित है। रॉबर्ट्स जैसे वैश्विक वैज्ञानिकों की उपस्थिति इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय महत्व प्रदान करती है और भारत के बढ़ते वैज्ञानिक कूटनीतिक प्रभाव को रेखांकित करती है।

रॉबर्ट्स की यह चेतावनी और भारतीय विज्ञान में उनका विश्वास — दोनों मिलकर एक महत्वपूर्ण संदेश देते हैं: तकनीक शक्तिशाली है, लेकिन मानवीय विवेक और पारदर्शी वैज्ञानिक पद्धति अभी भी अपरिहार्य हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी समय एक नोबेल विजेता भारत के वैज्ञानिकों को आत्मनिर्भरता की याद दिला रहा है। यह संदेश नीति-निर्माताओं के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है — तकनीकी उत्साह में वैज्ञानिक जवाबदेही का सिद्धांत न खो जाए।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स कौन हैं और उन्हें नोबेल पुरस्कार क्यों मिला था?
रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स एक著名 ब्रिटिश-अमेरिकी आणविक जीव विज्ञानी हैं, जिन्हें 1993 में फिजियोलॉजी/मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार मिला था। यह पुरस्कार उनकी 'स्प्लिट जीन' की खोज के लिए दिया गया, जिसने आणविक जीव विज्ञान की समझ को मौलिक रूप से बदल दिया।
रॉबर्ट्स ने एआई की किस कमज़ोरी की ओर इशारा किया?
उन्होंने कहा कि मौजूदा एआई मॉडल अपना बेसिक डेटासेट और निष्कर्ष तक पहुँचने की प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं करते, जो वैज्ञानिक पद्धति के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने यह भी बताया कि खराब डेटा पर प्रशिक्षित एआई 'हैलुसिनेशन' यानी भ्रामक जानकारी उत्पन्न करता है।
क्या रॉबर्ट्स ने एआई को पूरी तरह अनुपयोगी बताया?
नहीं, उन्होंने एआई को पूरी तरह नकारा नहीं। उनके अनुसार यदि एआई को सही डेटा पर प्रशिक्षित किया जाए और वह अपनी पूरी प्रक्रिया बताए, तो यह विज्ञान के लिए बहुत लाभकारी साबित हो सकता है। उनकी आपत्ति एआई की अपारदर्शिता से है, न कि तकनीक से।
रॉबर्ट्स ने भारतीय वैज्ञानिकों के बारे में क्या कहा?
उन्होंने भारत में 'फर्स्ट-क्लास वैज्ञानिक' होने की बात कही और माना कि भारत में स्वतंत्र रूप से विश्वस्तरीय अनुसंधान करने की पर्याप्त क्षमता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण के अवसर सिकुड़ने के बावजूद भारत को इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए।
ईएसटीआईसी 2026 क्या है और यह कहाँ हो रहा है?
ईएसटीआईसी यानी इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव भारत का एक प्रमुख विज्ञान एवं नवाचार मंच है। इसका आयोजन 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है, जिसमें 12 क्षेत्रों पर विशेष चर्चा निर्धारित है।
राष्ट्र प्रेस
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