एफएंडओ एक्सपायरी: सेंसेक्स 73,598 पर सपाट बंद, मिडकैप-स्मॉलकैप में तेज़ उछाल
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को एफएंडओ एक्सपायरी के दिन उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद महज़ 8.08 अंक यानी 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 73,598.67 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 3.45 अंक यानी 0.02 प्रतिशत फिसलकर 22,749.75 पर बंद हुआ, जबकि बैंक निफ्टी 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 53,974.90 पर आ गया। कच्चे तेल की ऊँची कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाए रखा।
व्यापक बाज़ार में खरीदारी का माहौल
प्रमुख सूचकांकों की सुस्त चाल के बावजूद व्यापक बाज़ार में उत्साह देखने को मिला। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 2 प्रतिशत से अधिक उछला, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 में 1 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़त दर्ज की गई। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकेत देता है कि निवेशकों की रुचि चुनिंदा मिड और स्मॉलकैप शेयरों में बनी हुई है।
यह ऐसे समय में आया है जब दूसरी तिमाही (Q2) के कॉर्पोरेट नतीजों के आधार पर बाज़ार में स्टॉक-आधारित हलचल तेज़ हो गई है। गौरतलब है कि इस तरह की सेक्टर-विशेष खरीदारी अक्सर प्रमुख सूचकांकों को सीमित दायरे में रखती है, जबकि व्यापक बाज़ार बेहतर प्रदर्शन करता है।
सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी सीमेंट में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही — जो सबसे बड़ा नुकसान था। इसके साथ निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी आईटी में भी कमज़ोरी देखी गई।
दूसरी ओर, निफ्टी मीडिया 3.6 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.9 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा 1.9 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो 1.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए। निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मेटल और निफ्टी पीएसयू बैंक भी बढ़त के साथ बंद हुए।
रक्षा खरीद को मंज़ूरी — बाज़ार के लिए सकारात्मक संकेत
मंगलवार के कारोबार में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह रहा कि सरकार ने लगभग ₹2.12 लाख करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंज़ूरी दी। इन प्रस्तावित खरीदों में लगभग 82 प्रतिशत उपकरण घरेलू निर्माताओं से लिए जाने की संभावना है।
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए सकारात्मक है और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इससे रक्षा क्षेत्र से जुड़े शेयरों और कंपनियों के दीर्घकालिक विकास की संभावनाएँ मज़बूत हुई हैं।
रुपया और कच्चे तेल का दबाव
करेंसी बाज़ार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली मज़बूती के साथ खुला — 95.19 के मुकाबले 95.17 प्रति डॉलर पर। हालाँकि कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियाँ रुपए पर दबाव बनाए हुए हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि ब्रेंट क्रूड के ऊँचे स्तर पर बने रहने से महँगाई और आयात लागत को लेकर चिंता बरकरार है, जिसके चलते निवेशक फिलहाल बड़े दाँव लगाने से बच रहे हैं।
आगे क्या देखेंगे निवेशक
बाज़ार विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले सत्रों में निवेशकों की नज़र मुख्य रूप से Q2 कॉर्पोरेट नतीजों, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की मौद्रिक नीति बैठक, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के प्रवाह पर बनी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की मज़बूत आर्थिक बुनियाद, घरेलू माँग और निरंतर निवेश प्रवाह भारतीय शेयर बाज़ार को दीर्घकाल में सहारा देते रहेंगे।